अपने उद्गम पर दम तोड़ गई नर्मदा, नींद से जागा प्रशासन, गाद निकालने का कार्य जारी

भविष्य में नर्मदा के अस्तित्व की चिंता, सकरी हो रही जलधार को शुभ नहीं मान रहे लोग

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 22 Feb 2021, 11:28 AM IST

अनूपपुर। कोरोना संकट के दौरान शासकीय स्तर पर लगाया गया लॉकडाउन पर्यावरण के लिए वारदान साबित हुई। लेकिन मध्यप्रदेश की जीवन रेखा माने जाने वाली नर्मदा अपने ही उद्गम स्थल अमरकंटक में दम तोड़ गई। गंदगी और गाद के लगातार जमाव में उद्गम कुंड से पुष्कर सरोवर में जमा होने वाली जलधारा सकरी व विरल हो चली। नर्मदा के प्रति जिम्मेदार विभागों की अनदेखी द्वारा संरक्षण के प्रति बरती गई लापरवाही में निभाई गई मात्र औपचारिकता में नर्मदा अमरकंटक में ही सूख गई। पानी के अभाव में जलीय जीव प्रभावित हुए हैं। जिसके बाद नींद से जागे प्रशासनिक अधिकारियों ने उसे पुन: जीवित करने कार्य आरम्भ किया है। रामघाट पुष्कर डैम में जमी ५-६ फीट मोटी सिल्ट (गाद) को निकालने का काम जारी है। हालांकि नर्मदा में पानी कब तक उपलब्ध हो पाएगा कहना मुश्किल है। सम्भावना है कि आगामी ६-७ माह में फिर नर्मदा अपने उद्गम स्थल पर लबालब पानी के साथ नजर आएगी। लेकिन वर्तमान नर्मदा की स्थिति और भविष्य की नर्मदा के अस्तित्व को लेकर चिंता बन गया है। जानकारों का मानना है कि इस प्रकार की स्थिति भविष्य के लिए शुभ संकेत नहीं हैं। नर्मदा के उद्गम स्थल के साथ डिंडौरी की सीमा तक लगभग १०० किलोमीटर लम्बी नदी में जगह जगह वनों का कटाव होने, रेत खनन और गंदगी के कारण भी नर्मदा में प्रदूषण दिनों दिन बढ़ रहा है। बताया जाता है कि नर्मदा की इस दुर्दशा के लिए नगरीय व्यवस्था दोषी है। जहां नगरीय प्रशासकों व जिम्मेदार विभागों ने नर्मदा तट तक हो रहे पक्के निर्माण पर आंखे मूंदे रखा, नगर के दूषित जल को नर्मदा में मिलने दिया और उसके सरंक्षण के प्रति कोई गम्भीर कदम नहीं उठाए। फिलहाल नर्मदा के पुन: कल-कल बहाव की उम्मीदों में श्रद्धालुओं की आंखें अमरकंटक में बिछी है।
बॉक्स: रामघाट का पानी सिर्फ स्नान योग्य, पीने योग्य नहीं
नर्मदा में लगातार बढ़ रहे प्रदूषण के बाद भी प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा जांच में औपचारिकता निभाई गई। वर्ष २०१९ में महाशिवरात्रि के दौरान पीसीबी ने रामघाट स्थित नर्मदा जल का संग्रह कर जांच किया था। जिसमें यह बात सामने आई थी कि रामघाट का पानी सिर्फ स्नान योग्य है, इसे पीया नहीं जा सकता। हालांकि रामघाट से काफी दूर का भी जल संग्रह किया गया था, जिसमें पानी साफ नजर आया था। लेकिन विभाग ने प्रदूषण को लेकर अपनी जांच सार्वजनिक नहीं की थी।
बॉक्स: कुंड का पानी हुआ काईयुक्त
नर्मदा के मुख्य कुंड में भी गंदगी से जलीय काई(शैवाल) का रूप धारण कर लिया है, जिसके कारण कभी नीला आसमान के रंग में नजर आने वाला कुंड का पानी अब काईनुमा जल दिखाई देती है। प्रशासन द्वारा पूजन सामग्रियों का कुंड में प्रवाह मनाही है। लेकिन श्रद्धालु पूजा पाठ की सामग्रियों को कुंड सहित नर्मदा की मुख्य जलधारा में समाहित कर रहे हैं। इसके लिए भी प्रशासक द्वारा रोकथाम के लिए कोई विशेष कार्ययोजना नहीं बनाई है।
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