लापरवाही: कैप से उठाव के अभाव में सड़ गई 159 क्विंटल धान की बोरियां, विभागीय जांच आरम्भ

दो सदस्यी टीम कर रही जांच पड़ताल, किन कारणों में नहीं हुआ धान का उठाव भेजेगी जांच रिपोर्ट

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 12 Nov 2020, 11:41 AM IST

अनूपपुर। जिला मुख्यालय से पांच किलोमीटर दूर वेयरहाउस बरबसपुर की ओपन कैप में पिछले नौ माह से लावारिश हालत में पड़ी १५९ क्विंटल लगभग ४२३ बोरी धान के मामले में अब विभागीय जांच आरम्भ हो गई है। जिला खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा नियुक्त दो सदस्यी जांच टीम पूरे मामले की जांच में जुट गई है। जिसमें धान किन परिस्थितियों में उठाव नहीं किए जाने सहित किन किन विभागों की लापरवाही में खराब हुई है पर जांच रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपेगी। फिलहाल बरबसपुर ओपन कैप में खराब भंडारित धान की बोरियां अब भी लावारिश हालत में भंडारित हैं। जिसके प्रति नागरिक आपूर्ति विभाग सहित वेयरहाउस प्रबंधक लापरवाह बने हुए हैं। पत्रिका में प्रकाशित खबर के बाद कलेक्टर ने मामले में संज्ञान लेते हुए विभाग से जांच के निर्देश दिए थे। जिसमें जिला खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा पिछले एक सप्ताह से मामले में जांच पड़ताल की जा रही है। हालंाकि ओपन कैप में लावारिश हालत में भंडारित धान की ४२३ से अधिक बोरियां पूरी तरह सड़ गया है। वहीं मानसून सीजन के दौरान लगातार बारिश और गर्मी के कारण पन्नी के नीचे ढकी बोरियों में बंद धान के दाने काले पड़ गए हैं और धान की बोरियों से दुर्गंध उठ रहा है। लेकिन उसकी सुधी लेने कोई विभाग सामने नहंी आया है। वहीं नागरिक आपूर्ति विभाग ने इसे वेयरहाउस और वेंकटनगर सोसायटी का मामला बताकर कार्रवाई से पल्ला झाड़ लिया है। इस सम्बंध में वेयरहाउस को पत्राचार कर धान होने की जानकारी दे दी गई है। लेकिन दूसरी ओर वेयरहाउस अनूपपुर ने मामले में चुप्पी साध ली है।
वर्ष २०१९-२० के दौरान जिलेभर में २० जनवरी तक खरीदी हुई लगभग साढे लाख क्विंटल धान को मिलिंग के लिए भेजा जा चुका है। जिसके बाद बरबसपुर ओपन कैप पर हुई खरीदी और भंडारण में विभाग की एक लापरवाही सामने आई थी, जिसमें यहां वैंकटनगर के सिंघौरा सोसायटी से भंडारण के लिए पहुंची १५९.६० क्विंटल धान की ४२३ बोरियां कैप पर लावारिश हालत में पाई गई। जिसे वेयरहाउस अनूपपुर द्वारा उठाव कर मिलिंग के लिए अबतक नहीं भेजा जा सका था। जिसके कारण यह ४२३ धान की बोरियां आज भी बरबसपुर ओपन कैप में रिजेक्शन लॉट के रूप लावारिश हालत में भंडारित हैं। इसकी अनुमानित कीमत २.९० लाख रूपए आंकी जा रही है। इस मामले का खुलासा तब हुआ ,जब वहां भडांरित धान को लेकर विभाग ने पत्राचार किया और पत्र में वेयरहाउस शाखा अनूपपुर ने इसे रिजेक्शन धान बताते हुए उठाव से इंकार कर दिया। वहीं अधिकारियों की दर्ज सूची में यह मौखिक निर्देश में सलेक्शनयुक्त धान बताई गई है। वहीं तकनीकि रूप में इन धान की बोरियों का अबतक डब्ल्यूएचआर भी नहीं काटे जाने की जानकारी दी गई है। विभागीय जानकारी के अनुसार आदिम जाति सेवा सहकारी समिति वेंकटनगर सिंघौरा समिति में किसानो से खरीदी गई धान को भंडारण के लिए बरबसपुर कैप में 21 अप्रैल को ट्रक क्रमांक एमपी 16 एच 1527 में 423 बोरी वजन 159.60 क्विंटल के लिए भेजा गया था।
बॉक्स: मौखिक आदेशों में रिजेक्शन और सलेक्शन
पूर्व केन्द्र प्रभारी द्वारा इस धान को रिजेक्ट करते हुए बरबसपुर कैंप में ही पंचनामा बनाकर अलग रखवा दिया था। और पंचनामे के आधार पर एक्सेप्टेंस नोट 25 अप्रैल को काटते हुए वेंकटनगर सिंघौरा समिति को धान के रिजेक्ट होने की सूचना दी थी। लेकिन इन रिजेक्टेड धान की बोरियों का बिना अपग्रेडेशन करवाए, सप्ताह भर दिन के भीतर अचानक तत्कालीन प्रभारी प्रबंधक नॉन ने मौखिक आदेश पर ही धान की एक्सेप्टेंन्स (स्वीकृत)नोट बना दिया। लेकिन यहां डब्ल्यूएचआर नहीं काटा गया। जिसके कारण वेयरहाउस शाखा बिना डब्ल्यूएचआर अपडेशन सम्बंधित धान को उठाने से इंकार कर दिया।
वर्सन:
ओपन कैप में लावारिश पड़ी धान की बोरियों के मामले में विभागीय जांच की जा रही है। कारणों पर जल्द ही जांच रिपोर्ट भेजा जाएगा।
एके श्रीवास्तव, जिला खाद्य आपूर्ति अधिकारी अनूपपुर।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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