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मकर संक्रांत पर श्रद्धालुओं ने नर्मदा सहित नदीघाटों पर किया स्नान, मंदिरों में किया विशेष पूजन अर्चन

कोरोना गाइडलाइन में जारी आदेश में अमरकंटक सहित जिलेभर में मेला उत्सव का नहीं हुआ आयोजन

अनूपपुर

Published: January 15, 2022 08:56:50 pm

अनूपपुर। नई फसल की कटाई और सूर्यदेव के उत्तरायण पर पौराणिक मान्यताओं में १४ जनवरी को मनाए जाने वाले मकर संक्रांति का पावन पर्व पूरे श्रद्धा व हर्षोउल्लास के साथ मनाया जा रहा है। जिले की पवित्रनगरी अमरकंटक के नर्मदा सहित जिला मुख्यालय के सोन-तिपान नदी संगम पर श्रद्धालुओं ने नदियों में आस्था की डुबकी लगाई। जबकि राजेन्द्रग्राम, कोतमा, जैतहरी, राजनगर, बिजुरी सहित अन्य क्षेत्रों से गुजरती नर्मदा, सोन, जुहिला, तिपान, केवई सहित अन्य नदियों के नदीघाटों पर स्थानीय लोगों ने स्नानकर इष्टदेवों की विशेष पूजा अर्चना की। हालांकि कोरोना संक्रमण के कारण मकरसंक्रांत के अवसर पर जिले के किसी भी स्थान पर मेले का आयोजन नहीं कराया जा सका। ज्योतिष पंचांग के अनुसार इस वर्ष भी मकर संक्रांति शुभ मुहूत्र्त में १५ जनवरी को मनाया जाएगा। जिसके कारण पूर्व की तिथि १४ जनवरी के कारण अधिकांश लोगों ने इस दिन भी पर्व मनाया। इसके कारण यह अब पर्व दो दिनी मनाया जाएगा। लेकिन प्रथम दिन ही पर्व की पौराणिक निर्धारित तिथि की महत्ता में मकरसंक्रांत हर्षाेउल्लास के साथ शुभारम्भ हुआ। पुराणों के अनुसार मकर संक्राति का पर्व बह्मा, विष्णु, महेश, गणेश सहित आदिशक्ति और सूूर्य की उपासना एवं आराधना का पावन व्रत माना जाता है। संतों के अनुसार इनके प्रभाव से प्राणी की आत्मा शुद्ध होती है, संकल्प शक्ति बढ़ती है, ज्ञान का विकास होता है। मकर संक्रंाति इसी चेतना को विकसित करने वाला पर्व है। यह सम्पूर्ण भारतवर्ष में किसी न किसी रूप में आयोजित होता है। जबकि अन्य मान्यताओं में गंगा को धरती पर लाने वाले महाराज भागीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इसी दिन तर्पण किया था। उनका तर्पण स्वीकार करने के बाद इस दिन गंगा समुद्र में मिली थी। वहीं मकर संक्राति के मौके पर शुक्रवार की सुबह पावन नगरी अमरकंटक में हजारो श्रदलुओं की भीड़ जुटी, जहां मां नर्मदा उद्गम के तीर्थकोटि सरोवर के साथ रामघाट पर डुबकी लगाकर माता नर्मदा का पूजन अर्चन किया। साथ ही तिल-चावल, गुड़ सहित अन्य सामग्रियों का दान दिया। नर्मदा का उद्गम स्थल होने के कारण इस दिन यहां देश- प्रदेश से हजारों की तादाद में श्रद्धालुु एवं पर्यटक पूजा अर्चना के लिए आते हैं। वर्तमान में अमरकंटक में अत्याधिक ठंड पड़ता है, जिसके कारण दूधधारा, कपिलधारा से निकलने वाली दूधिया भाप पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बना रहता है।
बॉक्स: गोंगपा सम्मेलन का नहीं हुआ आयोजन, स्थल पूजन कर लौटे आदिवासी परिवार
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी द्वारा दशकों से आयोजित की जा रही अखिल गोंगपा सम्मेलन इस वर्ष कोरोना के बढ़ते प्रकरण और मेला या आयोजन पर जारी जिला प्रशासन के प्रतिबंधात्मक आदेश में नहीं आयोजित किया जा सका। इस दौरान मेला ग्राउंड में स्थापित स्थल पर २५-३० की तादाद में पहुंचे आदिवासी परिवारों ने परंपरा के अनुसार पूजा पाठ कर वापस लौट गए। यहां प्रतिवर्ष १३ जनवरी से गोंगपा सम्मेलन का आयोजन होता है, जिसमें मां नर्मदा की पूजा अर्चना के बाद सैकड़ों की तादाद में आदिवासी समुदाय द्वारा शोभायात्रा निकालने के उपरांत गोंगपा सम्मेलन में गोंडी, धर्म, सांस्कृतिक, साहित्य सम्मेलन एवं फडापेन महापूजन का आयोजन करते हैं। हालांकि १४ जनवरी शुक्रवार की दोपहर तेज झमाझम बारिश और कड़ाके की ठंड का माहौल बना रहा। जिसके कारण इस वर्ष संक्रांत पर विशेष भीड़ नहीं देखी गई है।
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On Makar Sankrant, devotees took bath at river Ghats including Narmada
मकर संक्रांत पर श्रद्धालुओं ने नर्मदा सहित नदीघाटों पर किया स्नान, मंदिरों में किया विशेष पूजन अर्चन

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