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बाढ़ में बह गया पुल का हिस्सा, ग्रामीणों ने मिट्टी भर कर बना दिया रास्ता

6.80 करोड़ की स्वीकृत सामतपुर-हर्री तिपान नदी पुल का प्रस्ताव कागजों तक सीमित

अनूपपुर

Published: November 15, 2021 11:52:32 am

अनूपपुर। जिला मुख्यालय अनूपपुर के सामतपुर से हर्री-बर्री गांव होते हुए दर्जनों गांव को जोडऩे वाली सामतपुर-हर्री तिपान नदी पुल अब ग्रामीणों की परेशानी का कारण बन गई है। जहां क्षतिग्रस्त पुल पर आवाजाही के लिए ग्रामीणों को बार बार खुद ही मार्ग का निर्माण करना पड़ रहा है। हालंाकि दो साल पूर्व नदी में आई बाढ़ और तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हुए १ करोड़ २७ लाख की पुल के लिए शासन द्वारा २०२१ में ६.८० करोड़ की लागत से निर्माण की स्वीकृति मिल चुकी है। बावजूद पुल निगम शहडोल द्वारा अब तक इस पर निर्माण कार्य आरम्भ नहीं किया गया है। वहीं क्षतिग्रस्त हुए पुल के उपरांत ग्रामीणों की बन रही परेशानी पर प्रशासन द्वारा भी कोई पहल नहीं की गई है। जिसके बाद इस क्षतिग्रस्त पुल से आवाजाही में यहां के ग्रामीणों को ही मार्ग व्यवस्था की भरपाई करनी पड़ रही है। ऐसी ही पहल एक बार फिर यहां के हर्री-बर्री गांव सहित आसपास के ग्रामीणो द्वारा शासन-प्रशासन और पुल निगम विभाग की अनदेखी में किया है। १५ सितम्बर को तिपान नदी में आई बाढ और पूर्व से क्षतिग्रस्त हालत में खड़े पुल का एक हिस्सा पानी के तेज बहाव में बह गया था। जिससे पुल पर पैदल आवागमन पूरी तरह बंद हो गया। बताया जाता है कि यहां के ग्रामीणों ने कुछ दिनों तक प्रशासन की तरफ कुछ व्यवस्था भरी आशाओं को लेकर इंतजार किया। जब प्रशासन और विभाग द्वारा निर्माण या वैकल्पिक मार्ग के लिए कोई पहल नहीं किया गया तो सैकड़ो ग्रामीणों ने एकजुट होते हुए पुल के टूटे हुए हिस्से में ट्रैक्टर-ट्रॉली और जेसीबी के माध्यम से मिट्टी का भराव कर उसे बेहतर स्वरूप दे दिया। जिसके बाद अब इस क्षतिग्रस्त पुल से बाइक सवार सहित पैदल ग्रामीण आसानी से आवाजाही करने लगे हैं। अब भी दो स्थानों पर पुल वी सेप में क्षतिग्रस्त होकर ३-५ फीट की गहराई में अटका पड़ा है। इससे आवाजाही के लिए ग्रामीणों ने सीमेंट की पतली ढालनुमा पगडंडी बनाते हुए बाइक और साइकिल सवारों के लिए तैयार बना दिया है। लेकिन आश्चर्य दर्जनों गांव की आवाजाही का एक मात्र विकल्प मार्ग होने के बाद भी इसके निर्माण पर हीलाहवाली की जा ही है।
बॉक्स: दर्जनों गांव का सहारा
यह पुल सामतपुर जिला मुख्यालय से फुनगा तक शॉटकट होने के कारण हर्री, बर्री, भगताबांध, पसला, बिजौड़ी, चातरहिया, रक्शा, कोलमी, अमगंवा, छुलकारी, फुनगा के ग्रामीणों का सहारा है। ग्रामीणों का कहना है कि शॉटकट रास्ते में यह मार्ग बहुपयोगी है। लेकिन अब इस पुल के क्षतिग्रस्त से हजारों ग्रामीणों की यातायात प्रभावित है। गांवों तक चार पहिया वाहन अन्य धुमावदार रास्ते से गांव में पहुंच रहे हैं। इसमें समय व धन भी अधिक खर्च होता है।
बॉक्स: १० साल में करोड़ों की पुल हो गया बर्बाद
विभागीय जानकारी के अनुसार यह पुल वर्ष २००९ में १ करोड़ २७ लाख की लागत से बनाया गया था। जिसकी लम्बाई लगभग ६० मीटर है, पुल आम व्यक्तियों के लिए वर्ष २०१० में खोला गया था। लेकिन ९ अक्टूबर २०१९ में यह क्षतिग्रस्त होकर बैठ गया। जलसंसाधन विभाग के अनुसार २००९-१० के दौरान निर्माण से पूर्व तकनीकि सर्वेक्षण में नदी के नीचे लगभग ३५ फीट गहराई में हार्ड रॉक पाया गया था, निर्माण पर अधिक लागत होना बताया गया था और पुल निगम द्वारा यहंा पुल निर्माण की मनाही कर दी गई थी। लेकिन ग्रामीणों की मांग पर शासन के निर्देश में नदी के रेत पर मात्र सात फीट गहराई पर ही टाईबीम के रूप में बेस तैयार कराते हुए उसके उपर पुल तैयार कर दिया गया था। इस दौरान विभाग ने स्पष्ट कह दिया था कि नदी की रेत पर बने इस पुल के नीचे से बहने वाली नदी की धार में पुल लम्बे समय टिक नहीं पाएगा और जल्द क्षतिग्रस्त हो जाएगा।
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बाढ़ में बह गया पुल का हिस्सा, ग्रामीणों ने मिट्टी भर कर बना दिया रास्ता

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