पढाने का जुनून: खुद सामग्रियां जुटा बच्चों को बांट रहे भौतिकी विज्ञान का ज्ञान

शिक्षक दिवस विशेष: छह माह से लगातार वीडियों के माध्यम से बच्चों की करा रहे पढ़ाई, पत्नी वीडियो बनाने में करती है मदद

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 05 Sep 2020, 07:39 PM IST

अनूपपुर। कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों। कुछ ऐसी ही पहल जैतहरी जनपद पंचायत शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक स्कूल जैतहरी के उच्च माध्यमिक शिक्षक पर पदस्थ भौतिक विज्ञान के शिक्षक राजीव कुमार मिश्रा द्वारा किया जा रहा है। कोरोना काल में जहां दूरी दुनिया कमरों में बंद रही, यह सामान्य शिक्षक बच्चों की पढ़ाई अवरूद्ध न तो नए जतन कर गया। पिछले छह माह से वीडियो के माध्यम से लॉनआइन व यूट्यूब से शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं। बच्चों को विषय सम्बंधित और उनकी भाषा में समझ में आ सके सम्बंधित विषयक के वीडियो बनाकर बच्चों तक पहुंचा रहे हैं। यहीं नहीं उन वीडियों को जिला शिक्षा कार्यालय अनूपपुर की ग्रूप से लिंक कर जिलेभर के स्कूली छात्रों तक अपना ज्ञान बांट रहे हैं। सबसे आश्चर्य उनकी इस मेहनत में उनकी पत्नी क्षमा प्रीति मिश्रा भी आधे की सांझेदार हैं, जो रोजाना उनकी पाठ्य सामग्रियों की वीडियों तैयारी में खुद मोबाइल लेकर वीडियों तैयार करती है। साथ ही बच्चों की पढ़ाई अवरूद्ध न हो रोजाना वीडियो बनाकर बच्चों तक पाठ्य सामग्रियां उपलब्धता के लिए पति को भी प्रेरित करती रहती हंै। राजीव कुमार मिश्रा १२वीं कक्षा के भौतिक विषय को अधिक प्रमोट कर रहे हैं ताकि बोर्ड परीक्षा के साथ यहां से कॉलेज जाने वाले बच्चों में विषय सम्बंधित कॉन्सेप्ट आसानी से समझ में आ सके। इसके लिए राजीव मिश्रा प्रतिदिन १-१.३० घंटा तक मेहनत करते हैं। जिला शिक्षा कार्यालय एसीपी देवेश सिंह बघेल बताते हैं कि जिले में भौतिक विषय के ८ शिक्षक है। इनमें कुछ शिक्षकों को स्कूल की जिम्मेदारी भी है। लेकिन यहां राजीव कुमार मिश्रा ने अकेले ही सैकड़ो शिक्षकों की जरूरतों को पूरा करते हुए जिलेभर के बच्चों को भौतिकी विज्ञान सम्बंधित कोर्स को पूरा कराने का प्रयास किया है। अगर वर्तमान में स्कूल खुली होती तो उनकी पढ़ाई गई विषय वर्तमान कक्षा में चल रही पढ़ाई के बराबर या आगे होती।
बॉक्स: पढ़ाई से असंतुष्ट होता देखकर लिया निर्णय
राजीव कुमार मिश्रा बताते हैं कि शासन के आदेश में इच्छुक शिक्षकों से डिजीलैप के माध्यम से लॉनलाइन क्लास के निर्देश मिले थे। लेकिन शासकीय स्तर पर शुरूआती समय उपलब्ध हो रही सामग्रियों से बच्चों को पढ़ाई में अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। इससे बच्चें पढ़ाई से ज्यादा संतुष्ट नहंी हुए। इसे देखते हुए उन्होंने वीडियों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने का निर्णय लिया। शुरूआती समय में सिर्फ अपने स्कूल के बच्चों तक पढ़ाने के वीडियो बनाया और घर घर जाकर बच्चों से वाट्सएप नम्बर लेकर उनके एकाउंट में वीडियो डाले। पढ़ाई से सम्बंधित वीडियो जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारियों को पसंद आया और फिर विभागीय अधिकारियों की मांग पर वे कार्यालय के लिंक से जुड़ गए।
बॉक्स: चुनौतियों से जीता जंग, देशभर बनाई पहचान
शुरूआती दौर में वीडियो बनी और बच्चों तक पहुंची तो बीच बीच बन रही शोर से बच्चों ने शिकायत करते वीडियो से दूरी बना ली। इसके बाद पत्नी की राय और मित्र राघवेन्द्र तिवारी के सहयोग से उन्होंने ऑनलाइन माइक की खरीदी की। फिर घर के एक कमरे में ब्लैक बोर्ड, मार्कर सहित अन्य जरूरतों को जुटाया। और वीडियो बनाकर बच्चों को भेजा तो बहुत पंसद किए गए। इसी दौरान उनकी २-३ बेहतर वीडियो राष्ट्रीय स्तर की मंथन कार्यक्रम तक पहुंची, जिसे देशभर में संचालित कर बच्चों को भौतिकी विज्ञान से रूबरू कराया गया। राजीव मिश्रा बताते हैं कि वे रोजाना स्कूल जाने से पूर्व ११ बजे तक या दोपहर ४ बजे लौटने के उपरांत वीडियो के काम में जुटते थे।
बॉक्स: असफलता ही सफलता की सीढ़ी
कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर बताते हैं कि जब वे आईआईटीजी प्रवेश के लिए परीक्षा दिया था तो वे फेल हो गए थे। वे हताश और चिंतित हो गए। इसे देखकर उनके परिचित शिक्षक विनोद कुमार सिंह ने कहा तुम्हारी असफलता ही सफलता की निशानी है। असफलता से जिंदगी खत्म नहीं हो जाती और सफलता फिर दोबारा नहीं मिलती। तुम मेहनत करों जितना मेहनत होगी सफलता उतनी की अधिक मिलेगी, ये मत सोचों। सालभर घर में बैठकर पढ़ाई की और परीक्षा में टॉप किया। आज अनूपपुर कलेक्टर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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