संशय में मरीजों की जान: अस्पताल के ब्लड बैंक में नहीं खून, 300 यूनिट की जगह मात्र 2 यूनिट रक्त

कोतमा और पुष्पराजगढ़ ब्लड यूनिट को नहीं हो रही आपूर्ति, माहभर से बिना ब्लड मरीजों का इलाज

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 20 Sep 2020, 06:03 AM IST

अनूपपुर। जिला अस्पताल में गम्भीर उपचार सहित एनेमिक रूप में भर्ती प्रसव पीडि़त माताओं की जान संशय में बन आई है। जिले के सबसे बड़े अस्पताल के३०० यूनिट वाले ब्लड बैंक में मात्र २ यूनिट खून उपलब्ध है। जबकि विकासखंड स्तर की सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुष्पराजगढ़ और कोतमा की २५ यूनिट क्षमता वाली ब्लड यूनिट में कई माह से एक यूनिट भी रक्त की उपलब्धता नहीं हो सकी है। वर्तमान में ब्लड बैंक में जो ग्रूप उपलब्ध हैं ये ऐसे ग्रूप के ब्लड हैं जिसके मरीज नाममात्र हैं। जिसके कारण सडक़ हादसे से लेकर सिजेरियन प्रसव के लिए अस्पताल आने वाली माताओं को रक्त की कमी में अनूपपुर के बजाय शहडोल की ओर रेफर किया जा रहा है। रक्त की कमी को पूरा करने अस्पताल मरीजों के परिजनों से खून के बदले खून जैसी व्यवस्था में रक्त की उपलब्धता करा रहा है। इनमें अधिकांश परिवारों के परिजन खून देने लायक नहीं होते या किसी संशय में खून देने से इंकार कर जाते हैं। इसमें मरीजों के साथ साथ परिजनों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालात तो यह है कि सिकलसेल और प्रसव जैसी गम्भीर मरीजों के लिए खून के लिए कई दिनों का इंतजार करना पड़ रहा है। डोनर से किसी प्रकार खून की सुविधा बनाकर मरीजों की जान बचाई जा रही है। लेकिन इस अव्यवस्था में मरीजों की जान संशय में बनी हुई है। बताया जाता है कि कोरोना संक्रमण काल के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा कहीं कोई शिविर नही लगाए जा सके हैं। स्वेच्छा से जिला अस्पताल या अन्य संस्थानों ने रक्तदान कर कुछ मदद अवश्य की है। इससे पूर्व जिला अस्पताल में ब्लड की लगातार बन रही समस्या और कुपोषण व सिकल सेल मरीजों के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रतिमाह वृहत स्तर पर ब्लड डॉनेट शिविर के आयोजन की योजना बनाई थी। जिला अस्पताल कर्मचारियों के अनुसार जिले में दुर्घटनाओं और रोजाना सीजर प्रसव ऑपरेशन सहित अन्य जरूरतमंदों की पूर्ति में ३० यूनिट से अधिक ब्लड की आवश्यकता होती है। लेकिन वर्तमान हालात यह है कि मरीजों के परिजन भी अपने रक्त देने से इंकार कर रहे हैं।
उपलब्ध ब्लड ग्रूपों में ए निगेटिव की ०, बी पॉजिटिव की ०, ओ निगेटिव की ० तथा एबी पॉजिटिव की २ थैलियां है। लेकिन ए पॉजिटिव, बी निगेटिव, ओ पोजिटिव, एबी पॉजिटिव का अभाव बना हुआ है। जानकारी के अनुसार मदर ब्लड बैंक में ३०० यूनिट की क्षमता है इनमें न्यूनतम १०० यूनिट ब्लड रखना अनिवार्य है। हालंाकि इसे ३२५ यूनिट तक रखने की क्षमता में स्थापित किया गया है। इसमें प्रतिमाह जिला अस्पताल को १५०-२०० यूनिट की आवश्यकता होती है। इनमें सर्वाधिक ग्रूप ओ पोजिटिव लगभग ६०-७५ यूनिट तथा सबसे कम एबी पॉजिटिव १०-१२ यूनिट खर्च होता है।
बॉक्स: जागरूकता के प्रति नहीं गम्भीर स्वास्थ्य विभाग
एसईसीएल की १८ कोल खदान सहित हिन्दुस्तान पावर प्लांट जैसे संस्थानों के बाद भी जिला अस्पताल प्रशासन रक्तदान शिविर के लिए गम्भीर नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी आमजनों को अपने परिजनों के लिए रक्तदान करने या अन्य से कराने कोई जागरूकता कार्यक्रम नहीं आयोजित करवा रही है। जिसके कारण ग्रामीणों में आज भी रक्तदान को लेकर अनेक भ्रांतियां बनी हुई हैं और अस्पताल में अपने परिजनों के लिए रक्तदान करने से मनाही कर रहे हैं।
---------------------------------

Rajan Kumar Gupta Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned