घर में सो रहे परिवार पर छिडक़ दिया पेट्रोल लगा दी आग, तीन की जलने से मौत, एक गम्भीर

खुद भी फांसी लगाकर किया जीवन समाप्त, सुसाइट नोट पर लिखा भाई कहता है तेरा कुछ नहीं है यहां

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 27 Nov 2020, 12:05 PM IST

अनूपपुर। छोटे भाई को रोजगार के लिए बैंक से लोन देकर गैराज खुलवाने और लोन की राशि चुकाने की फटकार बड़े भाई के परिवार के लिए मौत का कारण बन गया। भाईयों की फटकार से नाराज सबसे छोटा भाई दीपक विश्वकर्मा ने पुराने कच्चे मकान में अपनी पत्नी और बेटी के साथ सो रहे सौतेले बड़े भाई ओंमकार को सोती हुई अवस्था में घर में पेट्रोल छिडक़कर आग के हवाले कर दिया है। घटना रात करीब १.३० बजे घटी, जिसमें परिवार के तीनों सदस्य ४४ वर्षीय भाई ओंमकार विश्वकर्मा, ४२ वर्षीय भाभी कस्तूरियाबाई विश्वकर्मा तथा 17 साल की भतीजी निधि विश्वकर्मा की जलकर मौत हो गई। जबकि बगल की कमरे में सो रहे २० वर्षीय भतीजा आशीष विश्वकर्मा माता पिता को बचाने के दौरान गम्भीर रूप से झुलस गया। जिसे उपचार के लिए शहडोल में भर्ती कराया गया है। वहीं आग लगाने के उपरांत छोटा भाई दीपक भी अपने कमरे में जाकर फांसी के फंदे से लटक गया। जिसमें उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना ग्रामीणों ने जैतहरी पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दमकल और ग्रामीणों की मदद से आग पर काबू पाते हुए जले हुए शवों को बाहर निकाला। जिसका पंचनामा और पीएम उपरांत परिवार के सदस्यों को सौंप दिया। वहीं घटना की सूचना पर शहडोल डीआईजी पीएस उइके सहित पुलिस अधीक्षक अनूपपुर मंागीलाल सोंलकी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक राजन सहित एसडीओपी ने मौके स्थल का निरीक्षण किया।
बॉक्स: बैंक के लोन की नहीं चुकाया था किस्त
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह पारिवारिक मामला था, जिसमें कुछ दिन पूर्व तीनों भाईयों के बीच बैंक के लोन की किस्त नहीं चुकाने पर आई नोटिस पर वाद विवाद हुआ था। जिसमें बड़े दोनों भाई ओंमकार और चेतराम विश्वकर्मा ने दीपक को फटकार भी लगाई थी। मझला भाई चेतराम ने बताया है कि दोनों भाईयों ने सेंट्रल बैंक से कुछ माह पूर्व १० लाख का लोन दिलाकर दीपक के लिए आर्दश गांव गैराज खुलवाया था। जिसमें बैंक की ओर से प्रतिमाह ३४००-३५०० की किस्त की नोटिस आ रही थी। किस्त नहीं चुकाने पर २१-२२ नवम्बर को ही उसे समझाते हुए बुरी संगतोंं से बचने और किस्त चुकाने की बात कही गई थी। सम्भवत: इसी बात से नाराज होकर छोटा भाई ने घर में सो रहे ओमकार के कमरे में आग लगाने के बाद खुद बचने अपने कमरे में जाकर खुदकुशी कर ली है।
बॉक्स: दिवार पर लिखा सुसाइड नोट, भाई को बताया दोषी
दीपक के कमरे की दिवार पर कुछ शब्द लिखे पाए गए। जिसमें भाईयों द्वारा मारपीट और सम्पत्ति में कुछ नहीं होने का जिक्र किया था। २२ नवम्बर का ही लिखे गए संदेश में लिखा था कि मेरे कमरे में घुस कर मुझे मारे है और कहते है कि तेरा यहां कुछ नही है और घर से भगा रहे है। आरोप लगाते है कि जुआं सट्टा खेलते हो।
बॉक्स: गैस सिलेंडर बनी आफत
ओंमकार पुराने कच्चे मकान में परिवार के साथ रहता था, जबकि दीपक के लिए पक्के और एसी युक्त मकान भाईयों ने बनवाया था। घटना के दिन ओमकार जिस कमरे में सोया था, उसकी खिडक़ी पर सिर्फ कपड़े लगे थे। माना जाता है कि दीपक ने बाइक से पेट्रोल निकाल उसे किवाड़ और खिडक़ी के सहारे कमरे डाल आग लगाया होगा। कमरे में पूर्व से भरी हुई गैस सिलेंडर भी था जो आग में ब्लास्ट हो गया। इसमें पूरा परिवार ही बुरी तरह जलकर खाक हो गए।
बॉक्स: शवों के साथ अमानवीयता
एक ओर जहां दिल दहलाने वाली घटना घटी वहीं पुलिस ने अमानवीयता भी दिखाई। लाशों को एम्बुलेंस या किसी वाहन में ढककर ले जाने की बजाय ट्रैक्टर से बिना ढक़े पीएम के लिए भेज दिया। खुली ट्रैक्टर ट्रॉली में गांवों के रास्ते लाशें अमानवीय स्थिति में स्वास्थ्य केन्द्र पहुंची।
वर्सन:
बैंक के लोन की किस्त नहीं चुकाने पर दोनों बड़े भाईयों ने दीपक को फटकार लगाई थी और गलत संगत छोड़ गैराज के काम देखने को कहा था। सम्भवत: इसी बात से नाराज होकर दीपक ने घर में सो रहे भाई और परिवार के सदस्यों को आग के हवाले कर खुद भी फांसी लगा लिया होगा।
मांगीलाल सोलंकी, पुलिस अधीक्षक अनूपपुर।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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