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इस जिले में लक्ष्य से अधिक तेंदुपत्ता संग्रहण की तैयारी, 50 हजार परिवार के सदस्यों को मिला रोजगार

8 वन समितियों के लिए 17200 मानक बोरा तेंदूपत्ता का लक्ष्य, 25-३० मई तक हो सकेगा संग्रहण का काम

अनूपपुर

Published: May 17, 2022 10:07:19 pm

अनूपपुर। जिले में इस वर्ष भी तेंदुपत्ता संग्रहण में वनविभाग ने लक्ष्य से अधिक तोरण की उम्मीद लगाई है। लगातार धूप और गर्मी के कारण इस वर्ष तेंदुपत्ता तोड़ाई के लिए मौसम को पूरी तरह से अनुकूल माना जा रहा है। इससे अच्छी गुणवत्ता का तेंदुपत्ता होने से शासन को करोड़ों की आमदनी होगी, वहीं तेंदुपत्ता तोरण कार्य से जुड़े परिवारों को भी कम मेहनत में बेहतर आय प्राप्त होगी। इस वर्ष १७२०० मानक बोरा तेंदुपत्ता संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें विभाग मौसम की अनुकूलता को भांपते हुए २२-२३ हजार मानक बोरा तेंदुपत्ता संग्रहण किए जाने की उम्मीद लगाए हैं। इसके लिए जिले में ८ समितियों के माध्यम से तेंदुपत्ता संग्रहण का कार्य कराया जा रहा है। वन उपमंडलाधिकारी राजेन्द्रग्राम मान सिंह मरावी बताते हैं कि इस वर्ष जिले के तेंदुपत्ता की तुड़ाई १७२०० मानक बोरा निर्धारित की गई है। यह लक्ष्य पूर्व वर्ष की भांति ही रखी गई है। इससे पूर्व वर्ष २०१७ तक यहां २२ हजार मानक बोरा का लक्ष्य रखा जाता था। लेकिन अब कम कर दिया गया है। लेकिन जिस तरह से यहां तेंदुपत्ता का उत्पादन होता है वह पूर्व लक्ष्य के आसपास ही पहुंच जाता है। इस वर्ष भी २२-२३ हजार मानक बोरा तेंदुपत्ता संग्रहण होने का अनुमान लगाया जा रहा है। तोरण ३ मई से आरंभ हुआ था जो ३० मई तक जारी रहेगा। अगर लक्ष्य २५ मई तक पूर्ण नहीं होते हैं तो ३० मई तक लगाकार तोरण कार्य जारी रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी लक्ष्य से अधिक १०२ प्रतिशत तेंदुपत्ता का संग्रहण कार्य पूरा किया गया था। जून माह में गोदामों में भंडारण किया जाएगा, जो १५ जून तक चलेगा।
लघुवन उपज के रूप में सर्वाधिक राजस्व और रोजगार देने का जरिया
वन उपमंडलाधिकारी राजेन्द्रग्राम बताते हैं कि तेंदुपत्ता से जुड़े परिवारों को सालों भर रोजगार उपलब्ध कराने अगर स्थानीय स्तर पर भी उद्योग स्थापित हो जाए तो लगभग ५०-६० हजार परिवारों को बारहों मास रोजगार मिल सकेगा। साथ जिले को आय के साधन भी उपलब्ध हो सकेंगे। बताया जाता है कि वनविभाग में लघुवन उपज के रूप में सर्वाधिक राजस्व और पत्तों की तुड़ाई से जुड़े लोगों को रोजगार देने का सबसे बड़ा जरिया तेंदुपत्ता का कारोबार है। इसकी पत्तियां बीड़ी बनाने के काम आती हैं। फरवरी से आरम्भ होकर मई-जून तक चलने वाले अल्प अवधि के इस कारोबार में जिले के ५०-६० हजार संग्र्राहक को रोजगार के साथ आय प्राप्त होता है। इसमें एक परिवार दो माह के रोजगार में ८-१० हजार से अधिक की आय प्राप्त होती है। वनविभाग भी प्रतिवर्ष अपने वनीय क्षेत्रों के साथ वनीय क्षेत्र के पैच एरिया से लगे नए राजस्व क्षेत्रों में तेंदुपत्ता को तुड़ाई कर विभाग को करोड़ों का आय देता हैं।
पत्ता संग्रहण के लिए बनी हैं ८ समितियां
वन उपमंडलाधिकारी राजेन्द्रग्राम के अनुसार जिले में ७ वनपरिक्षेत्र हैं। इनमें अनूपपुर, जैतहरी, कोतमा, बिजुरी, राजेन्द्रग्राम, अमरकंटक और अहिरगवां हैं। इन वनीय क्षेत्रों के साथ इनसे सटे राजस्व विभाग के पैच एरिया में भी तेंदुपत्ता की तुड़ाई कर संग्रहण किया जाता है। जिलेभर में लगभग ३०० हेक्टेयर राजस्व पैच एरिया हैं। जिले में ८ प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति भी गठित की गई है। जिनमें अनूपपुर, जैतहरी, वैंकटनगर, कोतमा, बिजुरी, मझगवां, बेनीबारी और बसनिहा समिति है।
बॉक्स: बीडी बनाने लायक पत्तों के लिए प्रतिवर्ष स्थल का चयन
विभागीय अधिकारी के अनुसार वनविभाग तेंदुपत्ता की तुडाई में यह ध्यान दिया जाता है कि बीडी बनाए जाने वाले फार्मा के अनुसार ही पत्तों की साइज की तुड़ाई हो। इसके लिए क्षेत्र का चयन प्रतिवर्ष किया जाता है। इसमें फड के प्राथमिक केन्द्र के बाद उप फड के लिए आसपास के ३-४ गांवों को शामिल किया जाता है, इसमें यह देखा जाता है कि फड कहां अच्छा है। इसके बाद इसके तीन भाग में बांट दिए जाते हैं, इनमें एक आज, कल और आने वाले समय के लिए नक्शा बनाकर ट्रीटमेंट किया जाता है। यह १५-२० मार्च के बीच किया जाता है। इसके बाद १ मई से ३१ मई के बीच तुड़ाई का कार्य पूरा किया जाता है और इसके बाद १० जून तक बारिश से पूर्व परिवहन कर गोदामी कार्य किया जाता है।
वर्सन:
इस वर्ष भी १७२०० मानक बोरा का लक्ष्य निर्धारित है। अभी तोरण का कार्य जारी है। लक्ष्य से अधिक संग्रहण की संभावनाएं जताई जा रही है।
मान सिंह मरावी, उप वनमंडलाधिकारी राजेन्द्रग्राम।
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इस जिले में लक्ष्य से अधिक तेंदुपत्ता संग्रहण की तैयारी, 50 हजार परिवार के सदस्यों को मिला रोजगार

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