एक माह से पानी के लिए तरस रहे रहवासी, बंद हो चुके हैं पांचों पंप

एक माह से पानी के लिए तरस रहे रहवासी, बंद हो चुके हैं पांचों पंप

Amaresh Singh | Publish: Jun, 04 2019 06:10:03 PM (IST) Anuppur, Anuppur, Madhya Pradesh, India

एक पंच चल रहा है मात्र दो घंटा

अनूपपुर/भालूमाड़ा। एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र के जमुना, भालूमाड़ा, गोविंदा में भीषण जल संकट का सामना लोगों को करना पड़ रहा है। सभी स्थानों पर कॉलरी श्रमिकों के साथ-साथ बड़ी संख्या में गैर श्रमिक भी निवासरत है। जिन्हेंं वर्षों से कॉलरी द्वारा पानी सप्लाई किया जाता रहा है, लेकिन पिछले दो-तीन वर्षों से कॉलरी द्वारा पानी सप्लाई किए जाने पर अपने संसाधनों में भारी कटौती की है। जिन स्थानों पर कॉलरी की सप्लाई किसी तकनीकी कारण से बंद हुई उसे चालू नहीं किया गया।

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पानी की उपलब्धता पर नहीं दिया गया ध्यान
यहां तक कि कॉलरी श्रमिकों के लिए भी पानी की उपलब्धता पर ध्यान नहीं दिया गया। जिसके कारण जमुनावासी पिछले एक माह से पानी के लिए तरस रहे हैं। वही क्षेत्र के भालूमाडा में अब एक-दो दिन में भारी जल संकट होने की स्थिति है। कारण कॉलरी द्वारा केवई नदी से पानी लेकर पूरे नगर में सप्लाई किया जाता है, जहां अब केवई नदी पूरी तरह सूख चुकी है। यहां पंप घाट पर कॉलरी के 5 मोटर पंप जो 100 एचपी से लेकर 80 एचपी तक के लगे हैं यह सभी पांचों पंप बंद हो चुके हैं। इनमें केवल एक पंप चल रहा है वह भी 24 घंटे में एक दो घंटे ही।

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पानी सप्लाई का 10 प्रतिशत भी नहीं है

बताया जाता है कि वर्तमान में कॉलरी के जैन कुंआं जिसमें खदान का पानी होता है उससे लोगों की प्यास बुझाई जा रही है। नगर के वार्ड क्रमांक 14 में कॉलरी के खदान है। जैन कुंआं में कॉलरी का 80 एचपी की मोटर एवं नगरपालिका की 20 एचपी की मोटर से पानी निकासी कर सप्लाई किया जा रहा। इसी प्रकार पंप घाट में भी जैन कुआं में कॉलरी के 70 एचपी की मोटर से पानी निकाल कर इसे सप्लाई किया जा रहा है जो पानी सप्लाई का 10 प्रतिशत भी नहीं है।

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केवई नदी की धार लुप्त हो गई है
नगर के लिए जीवनदायिनी कहे जाने वाली केवई नदी की धार लुप्त हो गई है। बताया गया कि कोतमा में स्टॉप डैम बनाए जाने के बाद से नदी में पानी का प्रवाह ही बंद हो गया है। वहीं पूरे नदी में अवैध रूप से खेती करने से भी जगह-जगह पानी को रोका जाना कोतमा स्टाप डैम से लेकर पंप घाट तक भारी मात्रा में रेत के खनन से भी नदी का स्वरूप ही समाप्त सा हो गया है। केवई नदी का संरक्षण ना करने के कारण यह नदी खुद प्यासी सुखी हो गई है। माना जाता है कि इसमें सिविल विभाग की लापरवाही है। केवई नदी में हर साल पानी की कमी होती है जिसके लिए कोतमा कॉलरी सिविल विभाग द्वारा पंप घाट के पास बोरी बंधान करके पानी को रोका जाता था लेकिन विभाग द्वारा पिछले एक माह से पंप घाट में ना कोई पानी की व्यवस्थाओं की जानकारी ली और ना ही व्यवस्था बनाई।

इनका कहना है
नदी में पानी नही होने से पम्प नहीं चल पा रहे है। लेकिन लोगो के लिए पानी की व्यवस्था की जा रही है।
सीके शुक्ला, ओवरसियर, कोतमा-गोविंदा उपक्षेत्र।

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