उफान पर नदी, बाइक सवार लगा रहे रपटा पर दौड़

उफान पर नदी, बाइक सवार लगा रहे रपटा पर दौड़

Shiv Mangal Singh | Publish: Sep, 03 2018 05:42:53 PM (IST) Anuppur, Madhya Pradesh, India

सुरक्षा में नदारत प्रशासनिक व्यवस्था : नहीं लगे बेरिकेट व आपदा प्रबंधन की टीम भी नदारद

अनूपपुर. पिछले कुछ दिनों से जिले में मानसून की लगातार लगी झड़ी में कोतमा-आमाडांड को जोडऩे वाली रपटा पानी की उफान से लगातार बह रही है। जहां पानी की तेज बहाव के बावजूद ग्रामीणों की आवाजाही बनी हुई है। यहीं नहीं बाइक सवार रपटा के उपर बहती लहरे पर तेजी से बाइक की गति के साथ खिलवाड़ भी कर रहे हैं। लेकिन आश्चर्य इन खतरनाक कारगुजारियों को रोकने जिला प्रशासन सहित आपदा प्रबंधन टीम का कोई भी सदस्य उपस्थित नहीं है।
जबकि कोतमा-आमाडांड रपटा पर रह पानी की रफ्तार पिछले कई दिनों से बनी हुई है। इससे पूर्व पत्रिका की खबर पर कोतमा एसडीएम ने होमगार्ड जवान के साथ पटवारी की तैनाती की थी। लेकिन वर्तमान नदी के रपटे पर बाइक सवारो की निकलती टोली को देखकर लगता है कि प्रशासन इन खतरों से बेसुध और उदासीन बन रही है। विदित हो कि कोतमा और आमाडांड के बीच बनी लगभग 180 मीटर लम्बी रपटे पर ग्रामीण लोग मौत की बाजी लगाकर नदी की तेजधारा से खिलवाड़ कर नदी पार कर रहे हैं, जहां थोड़ी सी चूक में किसी अप्रिय घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि पीएमजीएसवाई द्वारा 180 मीटर लम्बा पुल का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन पिछले दो सालों से पुल का निर्माण अबतक पूर्ण नहीं होने पर अब भी लोग जान की बाजी लगाकर इस खतरनाक रपटे से आवाजाही कर रहे हैं।
यह रपटा कोतमा व आस-पास के क्षेत्रो को जोडऩे वाली एक मात्र मार्ग है, जिसमें आमाडांड, खोड्री, राजनगर, जमुड़ी, उरा, मलगा, फुलकोना और आसपास के 50 हजार की आबादी की आवाजाही जुड़ी है। असुरक्षित बिना रेलिंग की बनी रपटा थोड़ी सी चूक में अबतक आधा दर्जन से अधिक लोगों को असामायिक मौत का शिकार बना चुकी है।
बावजूद प्रशासन की उदासीनता हर पल नए अनहोनी के इंतजार में बैठी है। जबकि इससे पूर्व वर्ष 2010 में ही तीन लोग दरिया में बह गए। इनमें 24 जुलाई 2010 को मंजू केवट पुरानी बस्ती बुढ़ार, 30 जुलाई नितेश उर्फ निन्नी टांडिया पुलिस कॉलोनी कोतमा, 7 नवम्बर 7 वर्षीय खेल्लु अहिरवार की मौत हो गई। जबकि अगस्त 2013 में शिक्षक लक्ष्मण तिवारी बह गए। वर्ष 2014 में वाहन सहित फिरदौस की मौत की बहकर हो गई, जिसका शव आजतक उनके परिजनों को नहीं मिल सका। इसके अलावा अन्य मौतें भी शामिल हैं।
कहां गई आपदा टीम
आपदा प्रबंधन समिति की बैठक में जिला प्रशासन ने कोतमा सहित पुष्पराजगढ़ और अनूपपुर के लिए प्रशासनिक अधिकारियों व आपदा प्रबंधन की टीम को सुरक्षा के इंतजाम तथा कोतमा के केवई के लिए प्रशासनिक अधिकारी को मॉनीटरिंग करने के निर्देश दिए थे। जबकि रपटा पर उफान के दौरान बेरिकेट लगाकर आवाजाही पर रोक के निर्देश दिए थे। लेकिन वर्तमान में न तो अधिकारी और ना ही आपदा प्रबंधन टीम ही मौजूद है।

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