शुभ दीपावली: धनतेरस में बाजारों में दिखी रौनक, 15-20 करोड़ की बाजार खरीदी के अनुमान

सराफा और ऑटो मोबाइल दुकानों पर उमड़ी भीड़, दीपावली पर्व की शुरूआत

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 13 Nov 2020, 08:42 PM IST

अनूपपुर। कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुद्र-मंन्थन के समय भगवान धन्वन्तरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसलिए इस तिथि को धनतेरस या धनत्रयोदशी के नाम से जाना जाता है। धन्वन्तरि जब प्रकट हुए थे तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था। इसलिए इस अवसर पर बर्तन खरीदने की भी परम्परा है। लोकमान्यता है कि इस दिन धन (वस्तु) खरीदने से उसमें तेरह गुणा वृद्धि होती है। जिसके कारण गुरूवार को जिला मुख्यालय सहित जैतहरी, कोतमा, बिजुरी, राजेन्द्रग्राम, अमरकंटक जैसे शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण बाजारों में विशेष रौनक दिखी। लोगों ने सराफा, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रोनिक की दुकान, मोबाइल, सहित बर्तन की दुकानों पर पहुंचकर अपने पंसद की खरीदारी की। उम्मीद है कि कोरोना काल के बावजूद इस वर्ष जिलेभर में सराफा, ऑटोमोबाइल्स, बर्तन सहित इलेक्ट्रोनिक व्यापार में १५-२० करोड़ से अधिक का कारोबार होगा। वहीं व्यापारियों ने बाजार की रौनक देखकर राहत की सांस ली है। व्यापारियों का कहना है कि अभी दीपावली तक अगर इसी प्रकार खरीदारी का सिलसिला बना रहा तो कोरोना काल में व्यापार में आई मंदी से कुछ हद तक उबडऩे में सफलता मिलेगी। वहीं इस वर्ष धनतेरस की तारीख को लेकर लोगों में असमंजस की स्थिति बनी है। लोगों यह नहीं समझ पा रहे हैं कि धनतेरस 12 नवंबर को है या 13 नवंबर को। दरअसल हिन्दू धर्म के व्रत एवं त्योहार हिन्दी पंचांग की तिथियों के अनुसार ही मनाए जाते हैं। हिन्दी पंचांग के अनुसार इस वर्ष कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 12 नवंबर दिन गुरुवार को रात 9 बजकर 30 मिनट से हो रहा है जो 13 नवंबर दिन शुक्रवार को शाम 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।
बॉक्स: आजीविका मिशन ने लगाया देशी सामानों का स्टॉल
स्व सहायता समूह द्वारा कोरोना काल में मास्क, साबुन बनाने के बाद अब दीपावली पर्व से पहले रंग बिरंगे मिट्टी के खूबसूरत दीयों तथा सजे-संवरे मंगल कलशों को बाजार मे लाकर रौनक ला दी है। 12 नवम्बर को कलेक्ट्रेट परिसर में अपर कलेक्टर सरोधन सिंह के निर्देशन में परियोजना की डीएम अंजू शुक्ला, डीएम राज कुमार जाटव, संजय विश्वास, सीमा पटेल, गंगा के साथ अन्य लोगों की उपस्थिति में मिट्टी के दीयों, कलश, आभूषणों की एक छोटी प्रदर्शनी लगाई गई। जिसका उद्देश्य चीनी दीयों के बहिष्कार और देशी दीयो सामाग्रियों के प्रति लोगों में प्रेरणा पैदा करना था। ग्रामीण आजीविका मिशन गांव की मिट्टी से बने लाखों देशी दीये बाजार में उतार चुकी है। इससे होने वाली आय से हजारों परिवार आत्मनिर्भरता की ओर बढ रहे हैं।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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