स्वच्छ भारत अभियान: अधिकारियों की अनदेखी और कागजी सफाई में नगरपालिका अनूपपुर का गिरा सफाई ग्राफ

सालभर में ही प्रदेश स्तर पर 10वें स्थान से पहुंचा 87 वां स्थान, देश स्तरीय में 96वें से 402वां स्थान

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 23 Aug 2020, 01:30 PM IST

अनूपपुर। स्वच्छता को नगरपालिका अनूपपुर के अधिकारी गम्भीर नहीं है। यहां भले ही प्रतिमाह सफाई पर लाखों खर्च किया जा रहा हो, लेकिन इसका पुष्टता स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए जारी हुए सूची में जाहिर हो गया है। वर्ष २०१९ में देश स्तरीय स्वच्छता सर्वेक्षण सूची में टॉप १०० के ९६वंा स्थान बनाने वाला नगर निकाय अनूपपुर वर्ष २०२० के जारी सर्वेक्षण सूची में नीचे गिरते हुए ४०२वें स्थान पर आ लुढका है। जबकि प्रदेश स्तरीय जारी स्वच्छता सर्वेक्षण सूची में वर्ष २०१९ में १०वें स्थान प्राप्त कर सम्मानित होने वाला यह निकाय वर्ष २०२० के जारी सूची में गिरकर ८७वां स्थान हासिल किया है। हालंाकि जिला स्तर पर अन्य नगरीय क्षेत्रों की जारी सूची में अनूपपुर बेहतर स्थिति में जरूर नजर आ रहा है। लेकिन प्रदेश स्तर और राष्ट्रीय स्तर पर जारी हुए स्वच्छता सर्वेक्षण सूची में अनूपपुर नगरपालिका की सफाई व्यवस्था सबसे अधिक बेवश नजर आई है। देश स्तर पर जारी सूची यह बताने के लिए काफी है कि नगर की सफाई और व्यवस्थाओं के प्रति नगरपालिका और जिला प्रशासक ने कितनी अनदेखी की है। जिसके कारण तीन सैकड़ा नीचे ग्राफ आया है। इसमें बेहतर के लिए अधिक प्रयास की जरूरत है। हालांकि इस वर्ष जारी हुई रैंकिंग में खुद नगरपालिका अधिकारियों ने माना कि वे गाइडलाइन के अनुसार स्वच्छता को लेकर कार्य नहीं कर सके। इसके अलावा स्वच्छता अभियान के लिए पर्याप्त बजट की कमी भी बाधा बनी है। वहीं नगर के लोगों को स्च्छता ऐप के माध्यम से जोडऩे में भी नगरीय प्रशासन ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिसके कारण २५ हजार की आबादी वाले शहर में मात्र ३७० लोगों ने ऐप डाउनलोड किया है। प्रदेश स्तर पर जारी जिले के छह नगरीय निकायों की रैकिंग में अनूपपुर 87वां, कोतमा 161, पसान 49, बिजुरी 233, अमरकंटक 269, जैतहरी 304 वें स्थान पर हैं।
बॉक्स: कागजों में सफाई, सडक़ किनारे कचरे और गाजर घास
नगरपालिका सूत्रों का कहना है कि पिछले साल सम्मान पाने के उपरांत नगरपालिका द्वारा सफाई को लेकर गम्भीरता नहीं दिखाई। कागजों पर नगर की सफाई व्यवस्था चलती रही। इस दौरान नगरीय प्रशासक की कमी के कारण उनका मॉनीटरिंग नहीं हो सका। वहीं अक्टूबर २०१९ में नगरपरिषद के कार्यकाल पूर्ण होने तथा परिषद के भंग होने के बाद कांग्रेस सरकार में बनाई गई प्रशासनिक समिति से भी अभियान प्रभावित हुआ। पुन: भाजपा सरकार के सत्ता आने और प्रशासनिक समिति समाप्त के बाद मार्च से बिना परिषद की नगरपालिका संचालित हो रही है। इसमें पार्षदों का अभाव भी नगरपालिका की लापरवाही में मददगार साबित हुआ। जिसके कारण हालात यह बने कि १५ अगस्त के मौके पर नगर की सफाई व्यवस्था नहीं हो सकी। सडक़ किनारे कचरा और गाजर घास आज भी काबिज हैं।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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