scriptTeak, bamboo forest being prepared from seed ball | इस गेंद को फेंक कर मध्यप्रदेश में तैयार किया गया सागौन व बांस के जंगल | Patrika News

इस गेंद को फेंक कर मध्यप्रदेश में तैयार किया गया सागौन व बांस के जंगल

- अनूपपुर जिले के छह रेंज में एक लाख से ज्यादा सीड बॉल डाले थे, 80 फीसदी बॉल से पौधे हुए अंकुरित

अनूपपुर

Published: July 24, 2022 02:50:38 pm

अनूपपुर। सीड बॉल से भी वनों का विकास हो सकता है। जिले में 2019 में सीडबॉल (मिट्टी के लड्डू) से एक लाख से अधिक पौधों को लगाने की कोशिश की, इसमें 80% पौधे अंकुरित हुए। इनमें से कितने जीवित हैं, इसका सर्वे नहीं किया है।

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हालांकि माना जा रहा है, 60% पौधों ने पेड़ का रूप लेना शुरू कर दिया है। एसडीओ वन परिक्षेत्र राजेन्द्रग्राम मान सिंह मरावी ने बताया, शहडोल के 4 डिवीजन में अनूपपुर के 7 वन परिक्षेत्र हैं। इनमें 6 अनूपपुर, जैतहरी, बिजुरी, अमरकंटक, अहिरगवां, राजेन्द्र ग्राम में वनों को वृहद बनाने 2019 में सीडबॉल से पौधारोपण किया गया। यह पायलट प्रोजेक्ट था। हालांकि शासकीय निर्देश मे 1 साल ही इस संचालित किया गया।

ऐसे तैयार होता है सीड बॉल
संस्थान के निदेशक का कहना है कि सीड बॉल टेक्नोलॉजी की मदद से बीज में नमी को लंबे समय तक बनाया रखना संभव होगा और इससे बीज के अंकुरण की क्षमता में बढ़ोतरी होगी। सीड बॉल गीली मिट्टी, गोबर या कोकोनट के रेसे अथवा अन्य खाद से तैयार होती है। इसे गेंद की तरह बनाकर अंदर बीज डाल दिया जाता है और फिर इस गेंद को धूप में सूखा कर भंडारित कर दिया जाता है। बारिश शुरू होते ही इसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में फेंक दिया जाता है।
60% पौधे बन रहे पेड़
इस प्रोजेक्ट से जिले के वनीय क्षेत्रों में लगभग 60% पौधे अब पेड़ का स्वरूप लेने लगे हैं। सीडबॉल योजना को 5 जुलाई 2019 को शुरू किया गया था। इससे पूर्व 15 जून से सीडबॉल बनाने की तैयारी की थी। विभागीय कार्य के साथ जुलाई में पौधारोपण का समय होने सेा इस प्रोजेक्ट को भी उसी के साथ शामिल कर रिवाइज एरिया में 1 लाख 2 हजार 940 सीडबॉल को विभिन्न वनपरिक्षेत्रों में डाला।
कहां-कितने सीडबॉल डाले

वन परिक्षेत्र : संख्या

अनूपपुर : 24700

जैतहरी : 44750

बिजुरी : 12690

अमरकंटक : 6000

अहिरगवां : 5300

राजेन्द्रग्राम : 9500

कुल : 102940

तीन क्षेत्रों में कई प्रजातियों के बीज
एसडीओ मान सिंह मरावी ने बताया, सीडबॉल जून में बनाए गए। इसमें विभिन्न प्रजातियों जैसे बांस, सागौन, महुआ, खमार, शीशम, शिशु, नीलगिरी, कहुआ, करंज सहित अन्य बीजों को मिट्टी के गीले गोले बनाकर उसके बीच डाले गए थे। मिट्टी सूखने के बाद बीज को नमी के बीच समेटे रही।

देश में यह था पहला प्रयोग: दरअसल साल 2019 में वन भूमि में अब पौधरोपण की जगह सीधे बीज से पौधे उगाने का प्रयोग करने की बात कही गई थी। इसी के तहत देश में पहली बार मध्यप्रदेश के वन विभाग यह नवाचार करने की तैयारी की थी। जिसके तहत साल 50 लाख सीड बॉल (खाद-मिट्टी की गेंद) से पौधों के अंकुरण का लक्ष्य तय किया गया। इसके लिए वन समितियों ने जनसहयोग से यह सीड बॉल तैयार की।

इस समय बताया गया था कि सीड बॉल को पहले से खोदे गए गड्ढों में डाल दिया जाएगा। बारिश में पौधे अपने आप उग आएंगे। इनकी सुरक्षा के लिए फेंसिंग भी कराई जाएगी। विभाग का दावा था कि इस पद्धति पर प्रति पौधा सिर्फ 20 पैसे की लागत आएगी। इस नवाचार की शुरूआत आदिवासी इलाकों से होगी। वन विभाग के अनुसार, वर्ष 2019 के लिए प्रदेश में पांच करोड़ रोपने का लक्ष्य है। 50 लाख पौधे सीड बॉल से तैयार किए जाएंगे।

खर्च में कमी
अभी नर्सरी में एक पौधे को तैयार करने में औसतन दस रुपए का खर्च आता है, लेकिन सीड बॉल 20 पैसे में तैयार हो जाएगी। पहले पौधों को पॉलीथिन में तैयार किया जाता था, लेकिन पॉलीथिन पर एनजीटी के प्रतिबंध के बाद इसका प्रभाव नर्सरियों में देखने को मिल रहा है। वहां पौधे सीड-ट्रे और कपड़े की थैलियों में तैयार किए जा रहे हैं। इस तरह से एक पौधा तैयार करने में वन विभाग को अतिरिक्त राशि खर्च करनी पड़ती है। सीड बॉल का प्रयोग सफल हुआ तो खर्च में बड़ी कटौती करने में मदद मिलेगी।

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