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Video Story- वनों को विस्तारित करने जिले में एक लाख से अधिक सीडबॉल किए गए थे तैयार, 80 फीसदी हुए अंकुरित

विभिन्न प्रजातीय पौधों के बीज को वातावरण के अनुसार किया था तैयार

अनूपपुर

Published: July 24, 2022 12:00:01 am

अनूपपुर। सीडबॉल के माध्यम से भी वनीय क्षेत्रों में वनों का विकास किया जा सकता है। इसकी वानिकी जिले के वनीय क्षेत्र है, जहां वर्ष २०१९ के दौरान सीडबॉल के माध्यम से १ लाख से अधिक पौधों को लगाने का प्रयास किया गया, जिसमें ८० प्रतिशत पौधे अंकुरित भी हुए। इनमें लगभग ६० फीसदी पौधों ने पेड़ का स्वरूप भी लेना आरंभ किया। लेकिन वास्तविकता में यह पेड़ अब कितना छायादार, सुरक्षित या विकसित है इस पर शासकीय या विभाग स्तर पर सर्वेक्षण नहीं कराए गए हैं। जिसके कारण ये गुमनाम सीडबॉल आज भी जिले के वनपरिक्षेत्रों में अपनी हरियाली और पेड़ बनने की मौजदूगी दर्ज करा रहे हैं। एसडीओ वनपरिक्षेत्र राजेन्द्रग्राम मान सिंह मरावी बताते हैं कि शहडोल सर्किल के चार डिवीजन में अनूपपुर जिले के सात वनपरिक्षेत्र में से छह वनपरिक्षेत्रों अनूपपुर, जैतहरी, बिजुरी, अमरकंटक, अहिरगवां, और राजेन्द्रग्राम में वनों को वृहद बनाने वर्ष २०१९ में सीडबॉल के माध्यम से पौध रोपण की विधि अपनाई गई थी। यह सीएम योजना के तहत पायलट प्रॉजेक्ट था। इस प्रॉजेक्ट का मुख्य उद्देश्य वन क्षेत्रों में कम खर्च में सामान्य स्थल से लेकर ऐसे स्थल जहां पैदल पहुंच पाना मुश्किल या कठिन है वहां उसे फेंककर अधिक से अधिक पौधों को अंकुरित करना और पेड़ का स्वरूप देना था। हालंाकि शासकीय निर्देश में मात्र एक साल ही इसे संचालित किया गया, इसके बाद शासन की ओर से कोई आदेश नहीं मिले, जिसके बाद यह योजना अब बंद है। लेकिन इस प्रॉजेक्ट से जिले के वनीय क्षेत्रों में लगभग ६० फीसदी पौधे अब पेड़ का स्वरूप लेने लगे हैं। उन्होंने बताया कि सीडबॉल योजना को ५ जुलाई २०१९ को आरंभ किया गया था। इससे पूर्व १५ जून से सीडबॉल को बनाने की तैयारी की गई थी। चूंकि शासन ने इसे विभागीय कार्य के साथ जुलाई माह में पौधारोपण का समय होने के कारण इस प्रॉजेक्ट को भी उसी के साथ सम्मिलित कर गैर एरिया या रिवाईस एरिया में सीडबॉल डलवाया गया। जिसमें लगभग १ लाख २ हजार ९४० सीडबॉल को विभिन्न वनपरिक्षेत्रों में डाला गया था।
सीडबॉल के लिए तीन क्षेत्रों का हुआ था चयन, विभिन्न प्रजातियों के बीज का हुआ उपयोग
एसडीओ मान सिंह मरावी बताते हैं कि सीडबॉल का निर्माण जून माह के दौरान किया गया था। जिसमें विभिन्न प्रजातियों जैसे बांस, सागौन, महुआ, खमार, शीशम, शिशु, नीलगिरी, कहुआ, करंज सहित अन्य बीजों को मिट्टी के गीले गोले बनाकर उसके बीच डाले गए थे। यह मिट्टी सूखने के बाद बीज को अपने भीतर नमी के बीच सिमटे हुए रही। जहां योजना के तहत जुलाई माह के प्रथम बारिश के दौरान खाली पड़े स्थलों पर दो पेड़ों के बीच गैप एरिया में एक सीडबॉल डालकर छोड़ा गया था। इनमें भी सीडबॉल को बिछाने स्थलों का चयन हुआ। जिसमें आरडीएफ यानी बिगड़े वनों का सुधार क्षेत्र, एससीआई यानी चयन सह सुधार एवं सुधार कार्य क्षेत्र एवं प्लांटेशन या पुराने स्थल क्षेत्र में सीडबॉल डाले गए थे।
कहां कितने सीडबॉल का हुआ उपयोग
वनपरिक्षेत्र संख्या
अनूपपुर २४७००
जैतहरी ४४७५०
बिजुरी १२६९०
अमरकंटक ६०००
अहिरगवां ५३००
राजेन्द्रग्राम ९५००
(कोतमा छोडक़र) कुल- १०२९४०
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वातावरण की अनुकूलता के अनुसार सीडबॉल का उपयोग
बताया जाता है कि सीडबॉल में स्थानीय प्रजातियों के बीज को स्थानीय वातावरण की अनुकूलता के अनुसार लगाया गया था। हालंाकि अनूपपुर जिला मिश्रित पौधों की अनुकूलता का क्षेत्र है। लेकिन वातावरण को देखते हुए बीजों का उपयोग किया गया। जैसे अहिरगवां क्षेत्र के लिए सागौन, दलदल युक्त क्षेत्र के लिए कहुआ के बीज का बॉल तैयार किया गया था।
बॉक्स: कितनी बनी हरियाली, नहीं हुआ सर्वेक्षण
इस प्रॉजेक्ट की सबसे कमजोर कड़ी यह रही कि सीडबॉल लगाए जाने के बाद अब तक उसके सर्वेक्षण नहीं कराए गए हैं। जिसमें यह पता लग सके कि कितने बीज पौध बने और कितने पौध पेड़ का स्वरूप लिया है। इसके लिए न तो शासकीय स्तर पर कोई आदेश या बजट आवंटित कराया गया है और ना ही विभागीय स्तर में इसे कार्य में रूप में शामिल किया गया है। लेकिन वनविभाग का मानना है कि सीडबॉल से ८० प्रतिशत पौधे अंकुरित हुए होंगे और खुले में मवेशियों या अन्य कारणों में नुकसान होने के बाद लगभग ६० प्रतिशत जिंदा पौध या पेड़ में अब नजर आ रहे होंगे।
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