गांव के पांव: भेजरी धान के नाम पर पड़ा ग्राम पंचायत का नाम भेजरी

भेजरी किस्म की धान का होता था सर्वाधिक उत्पादन, आदिवासी समुदाय द्वारा खैरो भेजरी माता की जाती थी पूजा

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 25 Feb 2021, 11:01 AM IST

अनूपपुर। पुष्पराजगढ़ जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भेजरी का नाम धान की एक किस्म के नाम पर भेजरी पड़ा था। आज भी गांव में इस किस्म के धान की खेती किसानों के द्वारा की जाती है। पूर्व में इस पंचायत में भेजरी किस्म की धान का उत्पादन अत्यधिक मात्रा में किया जाता था। जिसके कारण यह धान इस पंचायत की पहचान बन बैठा और इसी के नाम पर पंचायत का नाम भी भेजरी रख दिया गया। वर्तमान में गांव की आबादी लगभग 4000 की है जहां कुल 18 वार्ड हैं। इस गांव में बहपुरी तथा नोनघटी ग्राम भी शामिल है। गांव के स्थानीय निवासी शिक्षक सतीश द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने अपने परिजनों से यह कहानियां बचपन से सुनी है कि इस गांव में भेजरी किस्म के धान की पैदावार ज्यादा मात्रा में की जाती थी जिसके कारण इस गांव का नाम भेजरी पड़ गया है।
बॉक्स: आज भी होता है उत्पादन
ग्राम पंचायत भेजरी के सरपंच दिलराज सिंह टेन्द्रों ने बताया कि आज भी गांव के किसान भेजरी किस्म के धान का प्रयोग खेती के लिए करते हैं। लेकिन ज्यादा पैदावार के लिए हाइब्रिड नस्ल के बीजों का प्रयोग ग्रामीणों के द्वारा किया जाने लगा है। इसके बाद भी इस धान की किस्म का प्रयोग ग्रामीणों के द्वारा आज भी जारी है। उन्होंने बताया कि गांव में खैरो भेजरी माता की पूजा आदिवासी समुदाय के द्वारा की जाती थी। गांव के समीप ही स्थित मढय़िा में वर्तमान में भी माता की पूजा ग्रामीणों द्वारा की जाती है और इन्हीं के नाम पर गांव तथा धान का नाम रखा गया था।
---------------------------------------------

Rajan Kumar Gupta Desk
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned