गांव के पांव: फसलों की कटाई के लिए नहीं मिल रहे मजदूर, लॉकडाउन से धान की बुवाई हो सकती है प्रभावित

परिवहन और खाद बीज की कमी से सबसे बड़ा संकट

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 23 Apr 2020, 01:20 PM IST

अनूपपुर। प्रकृति और किसानों का सम्बंध हमेशा पूरक रहा है। देश के अन्नदाता किसान का भगवान पर हमेशा अटूट विश्वास रहा है, जिसमें लाखा आपदाएं आने के बाद भी किसान कभी थका नहीं, टूटा नहीं, बल्कि उतनी ही सिद्दत के साथ खेती कर परिवार और देश-दुनिया का पेट भरा है। वर्तमान में लॉकडाउन और मजदूरों की कमी के कारण किसानों और उनकी खेतों में लगी फसलों पर चिंता का साया मंडरा रहा है। मजदूरों के अभाव में गेहूं की कटाई समय पर नहीं हो पा रही है। पूर्व से ही प्रकृति की असामायिक बारिश और ओलावृष्टि की मार से अबतक उबड़े नहीं किसानों पर कोरोना संकट की दोहरी मार ने कमर तोड़ दिया है। किसान हताश है, उन्हें आगामी खरीफ की चिंता सता रही है, जहां मजदूरों के अभाव में खरीफ की बुवाई प्रभावित होगी। वेंकटनगर ग्राम पंचायत के किसान नवनीत शुक्ला कहते हैं कि कोरोना संकट के कारण उनकी खेती जरूर प्रभावित हुई है। लेकिन लॉकडाउन के दौरान मजदूरों की कमी ने किसानों को फिर से अपने खेतों की मिट्टी से जोडक़र कृषि कार्य के लिए प्रेरित किया है। मजदूरों पर आश्रित किसान अब खुद खेतों में फसल की कटाई कर रहे हैं। नीरज गुप्ता बताते हैं कि उनका लगभग २ एकड़ खेती का रकबा है। गेहूं की फसल तैयार थी, लेकिन उसकी कटाई के लिए मजदूर नहीं मिले, जो मिले संक्रमण के कारण काटने से इंकार कर दिया। खेतों की तैयार फसल को देखते हुए घर से सभी सदस्यों ने मिलकर निर्णय लिया और प्रत्येक सुबह ५ बजे से खेत में गेहूं की कटाई कर आज खलिहान में उसकी गहाई भी कर रहे हैं। ऐसे गांव में लगभग सभी किसानों ने खुद से फसलों की कटाई है और थ्रेसर से गहाई कर रहे हैं। अब किसानों की दिनचर्या अहले सुबह से खेतों की मेढ पर पहुंचकर फसल कटाई और शाम को उसकी गहाई में लगी है। हम किसानों की बस एक चिंता है मौसम के बिगडऩे से पूर्व अनाज घरों के अंदर आ जाए। परिवहन की असुविधा के कारण इन फसलों की सोसायटी तक उपार्जन में परेशानी होगी। किसानों का कहना है कि लॉकडाउन और बाजार के हालात के साथ परिवहन और खाद-बीज की कमी के कारण ङ्क्षचता बनी है। चिंता जताते हुए बताया कि वर्तमान समय किसानों के विपरीत है। बाजार में उपभोक्ताओं की कमी और परिवहन के अभाव में उन्हें नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। हालंाकि जिले में अधिकांश हिस्सों में दोहरी फसल होती है। अप्रैल माह के बाद जून-जूलाई तक कोई फसल नहीं लगाया जाता, लेकिन धान की नर्सरी जरूर लगाई जाती है। अभी किसानों के पास एकाध महीने का समय है, कोरोना संकट से उबडऩे हालात बेहतर हुए तो आगामी खरीफ की फसल बेहतर होगी, अगर कोरोना संकट से हालात गम्भीर बना तो खाद, बीज, ट्रैक्टर व मजदूरों के अभाव में किसानों की खेती चौपट हो जाएगी।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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