गांव-गांव कुपोषित बच्चे, तीसरी लहर के बढ़ते खतरे के बाद भी मैदान में नहीं उतरे अधिकारी-कर्मचारी

जिले में कुपोषित बच्चों के आंकड़ों में नहीं हो रहा सुधार

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 22 Jul 2021, 11:42 AM IST

अनूपपुर। अगस्त-सितम्बर माह के दौरान कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर आने की आशंकाएं जताई जा ही है। इसके लिए शासकीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में तीसरी लहर के खतरे से निटपने जहां अधिक से अधिक संसाधनों को स्थापित कर बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन इन तैयारियों के बीच संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले नौनिहालों के प्रति विभागीय लापरवाही बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग और महिला बाल विकास विभाग की टीम कुपोषित बच्चों का चिह्नांकन कार्य नहीं कर पा रहा है। यहीं नहीं गांवों में मैदानी अमलों की अनदेखी में घर घर दस्तक देकर गर्भवती माताओं का चिह्नांकन और कुपोषित नौनिहालों के इलाज भी जिम्मेदारी नहीं निभाई जा रही है। जबकि जिले के गांव-गांव में कुपोषित बच्चें हैं, खासकर आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र पुष्पराजगढ़ विकासखंड संसाधन और शिक्षा में सबसे अधिक पिछड़ा क्षेत्र हैं और वहां सबसे अधिक कुपोषित बच्चें भी हैं। लेकिन मैदानी अमलों की लापरवाही में सिर्फ कागजी कोरम को पूरा कर कुपोषण मिटाने की कार्रवाई हो रही है। जिसका नतीजा है कि कुपोषण के आंकड़े कम नहीं हो रहे हैं, जबकि शासन द्वारा प्रति वर्ष उनके सुपोषण के लिए करोड़ों खर्च कर रही है। मैदानी अमले की अनेदखी और विभागीय अधिकारियों की लापरवाही में जिले में संचालित पांच एनआरसी केन्द्र पर भी निर्धारित सीट आधी अधूरी भर पा रही है। जबकि जिले में वर्तमान में ५६७६ कुपोषित तथा ६१६ अतिकुपोषित नौनिहाल हैं। जिसके लिए बार बार जिला प्रशासन द्वारा निर्देश भी जारी किए जा रहे हैं। बावजूद मैदानी अमला और अधिकारी मैदान में नहंी उतर रहे हैं।
बॉक्स: प्रति माह १४० का लक्ष्य, भरपाई आधी
पोषण पुनर्वास सेंटर पर माहभर के दौरान लगभग १४० बच्चों को भर्ती किया जा सकता था। लेकिन पिछले दो माह के दौरान देखा जाए तो यहां मार्च माह के दौरान १४० में मात्र ६७ नौनिहालों का प्रवेश हुआ। जबकि अप्रैल और मई बंद रहे। जून माह के दौरान २८ बच्चे भर्ती हुए। वहीं जुलाई माह के प्रथम १४ दिनों के लिए ४६ बच्चे भर्ती हुए हैं। इससे पूर्व कलेक्टर ने एनआरसी केन्द्रों पर बच्चों की कमी और नौनिहालों की मौत मामले में महिला बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया था कि वे मैदानी अमले को क्षेत्रों में भेजकर गर्भवती महिलाओं के चिह्नांकन के साथ कुपोषित बच्चों की भी जानकारी जुटाएं। और गम्भीर बच्चों को पोषण पुनर्वास केन्द्र पर भेजने की व्यवस्था करें। इसके लिए एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता को अपने अपने क्षेत्र के गांवों में घर घर पहुंचकर जिम्मेदारी पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। वहीं कमिश्नर शहडोल ने नोटिस जारी करते हुए कुपोषित बच्चों को सेंटर पर भेजने निर्देशित किया था।
बॉक्स: जुलाई माह में कहां किन सेंटर पर बच्चों की संख्या
सेंटर क्षमता बच्चों की उपस्थिति
अनूपपुर २० १०
जैतहरी १० ०९
कोतमा १० १०
राजेन्द्रग्राम २० ०९
करपा १० ०८
वर्सन:
स्वास्थ्य अमले को निर्देशित किया गया है। कलेक्टर ने भी बैठक में कुपोषित और गर्भवर्ती माताओं को चिह्निंत करने निर्देश दिए हैं।
डॉ. बीडी सोनवानी सीएमएचओ अनूपपुर।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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