वादे हैं बातों क्या: सीएम की घोषणाओं के बीते साल, जिले में औद्योगिक विकास की योजनाएं रह गई अधूरी

खेती को तरसे बैगा परिवार , प्रशासन ने नहीं मुहैया कराई जमीन

By: Rajan Kumar Gupta

Published: 07 Sep 2020, 06:02 AM IST

अनूपपुर। फिल्म उपकार के गाने ‘कसमें वादे प्यार वफा बातें हैं बातों क्या’ की भांति अनूपपुर जिले की विकासी योजनाएं राजनीतिक कुचक्र का शिकार बनकर रह गई। जिला बनने के १७ साल बनने के बाद भी विकास के नए आयाम अनूपपुर से नही जुड़ सके। सडक़, बिजली और पानी जैसी मूल सुविधाओं के साथ स्वास्थ्य, शिक्षा और लोगों को रोजगार के साधन राजनीतिक घोषणाओं के मुख्य एजेंडे में शामिल होने के बाद भी गौण रह गए। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण इलाकों की सडक़े बदहाल बनी हुई है। २४ घंटे की अटल ज्योति योजना हर घंटे बाद गुल हो रही है। बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों का उन्नयन सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में कर तो दिया गया, लेकिन चिकित्सकों व स्टाफों की कमी में वह भी बंद है। ३० करोड़ से अधिक की फिल्टर प्लांट योजनां अनूपपुर और कोतमा में पिछले पांच साल बाद भी लोगों को घरों तक जलापूर्ति नहीं करा सकी है। सबसे आश्चर्य यह है कि जिले में कोयला के १८ खदान, दो विद्युत प्लांट, एक कागज फैक्ट्री के अलावा स्वरोजगार को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों को रोजगार मुहैया कराने से जुड़ी औद्योगिक ईकाइयां आजतक स्थापित नहीं सकी। ऐसे में कोरोना की मार से जूझकर वापस लौटे प्रवासी मजदूरों को स्थानीय स्तर पर कहां रोजगार मिल सकेगा।
बॉक्स: चार साल बाद भी औद्योगिक विकास परियोजना अधूरी
जिले में बेरोजगारी की समस्या को दूर करने कदमटोला में सितम्बर २०१६ में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने २ करोड़ २९ लाख ४६ हजार की औद्योगिक विकास परियोजना की आधारशिला रखते युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। घोषणा के ४ साल बाद भी परियोजना पूर्ण नहीं हो सकी। अब तो यह लागत ९.४३ करोड़ तक पहुंच गई है। लेकिन यहां के स्वरोजगार के लिए चयनित १०७ उद्यमियों सहित हजारों बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं प्रदान हो सके। प्रस्तावित लद्यु उद्योग आधारित ईकाइयां लगाने का काम आरम्भ नहीं हो सका है। जिसके कारण युवा काम की तालाश में बाहर प्रवासी मजदूर के रूप में काम को विवश है। वहीं स्थानीय मजदूरों को रोजगार नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। बताया जाता है कि इस पूरी १० करोड़ की परियोजना में पानी की टंकी के लिए बजट आवंटित नहीं है। औद्योगिक एरिया के विकास में प्रस्तावों के अनुरूप सडक़, नाली, बिजली सहित प्लॉट आवंटन पूरी तैयार है। लेकिन बिना पानी की सुविधा जिला उद्योग विभाग ने आवेदकों को प्लॉट आवंटन नहीं किया है।
बॉक्स: खेती को तरस गए बैगा परिवार किसान, प्रशासन ने नहीं मुहैया कराई जमीन
अनूपपुर जिले में शासकीय संरक्षित बैगा परिवार आज भी उपेक्षित हैं। वनाधिकार पट़्टा के तहत ऐसे परिवारों को बसाने और उन्हें भरण पोषण की गारंटी देने वाली सरकार उनकी सुधी नहीं ले रही है। पुष्पराजगढ़ के बेंदी ग्राम पंचायत के बेंदी और डूमरकछार के आधा सैकड़ा बैगा परिवार किसान खेती को तरस रहे हैं। लेकिन उनकी खेती पर सीमांकन के विवाद ने उन्हें खेती से वंचित कर दिया है। दशकों से काबिज भूमि पर हाल के दिनों में वनविभाग ने उसपर कब्जा जमाते हुए उनकी धान की फसल को मवेशियों को हवाले कर दिया। यहीं नहीं ट्रैक्टर से कुचल दिया था। कमिश्नर ने जांच कर सीमांकन के निर्देश दिए। लेकिन दो माह गुजर जाने बाद भी राजस्व विभाग बैगा परिवार किसानों को खेती का मालिकाना हक नहीं मिल सकी। जबकि राजस्व विभाग बैगा परिवार किसानों से खेती के एवज में राजस्व का लगान वसूल कर रही थी।
बॉक्स: गरीबों की थाली में पहुंच रहे खराब अनाज, जांच में दोषी आरोपियों पर नहीं कार्रवाई
सजहा वेयरहाउस और राजेन्द्रग्राम वेयरहाउस से आदिवासी क्षेत्रों में लगातार खराब खाद्यान्न का आवंटन किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों की मिलर, गोदाम संचालकों व वेयरहाउसिंग कर्मचारियों की सांठगांठ मे खराब खाद्यान्न को खपाने का खेल खेला जा रहा है। ऑटा फार्मेशन युक्त गेहूं और कीड़े लगे चावल गरीबों की थाली तक पहुंच रहा है। इस सम्बंध में पत्रिका ने लगातार खबर के माध्यम से मामले को उजागर किया था। जांच हुई और दोषी पाए भी गए। लेकिन दोषी के खिलाफ अबतक कार्रवाई नहीं हो सकी है।
बॉक्स: स्वास्थ्य भर्ती घोटाला, जिम्मेदारी नहीं तय
जिला मलेरिया कार्यालय में जिला स्तरीय भर्ती घोटाला किया गया। जिसमें शासन के आदेश के विपरीत स्वास्थ्य अधिकारियों ने बिना शासकीय संशोधन व नियम विरूद्ध अपने परिचितों की नियुक्तियां कर दी। यहीं नहीं ऐसे नवनियुक्त कर्मचारियों के वेतन निकासी सम्बंधित बिल ट्रेजरी में भेजे गए। मामला जांच में आया, लेकिन दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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Rajan Kumar Gupta Desk
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