तीन माह में 29 नवजात की मौत 156 गर्भवतियों में खून की कमी

शासन भले ही महिला के गर्भवती होते ही उसके स्वास्थ्य पर नजर रखने का दावा करता है

By: brajesh tiwari

Published: 13 Mar 2018, 10:14 AM IST

अशोकनगर. मातृ और शिशु मृत्युदर को नियंत्रित करने शासन भले ही महिला के गर्भवती होते ही उसके स्वास्थ्य पर नजर रखने का दावा करता है। साथ ही उनके पोषण और स्वास्थ्य पर जिले में हर माह करोड़ों रुपए खर्च भी होते हैं।

इसके बावजूद अकेले जिला अस्पताल में ही हर तीसरे दिन जन्म लेते ही एक नजवात शिशु की मौत हो जाती है और हर तीन दिन में दो गर्भवती महिलाएं हाईरिस्क पाई जाती हैं। हालत यह है कि पिछले तीन महीने में प्रसूतिगृह में 29 नवजात शिशुओं की मौत हो गई। लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी और प्रशासन इस पर गंभीरता नहीं दिखा रहा है।

पत्रिका ने जब जिला अस्पताल के प्रसूतिगृह के आंकड़ों की पड़ताल की, तो यहां एक दिसंबर से 28 फरवरी तक 2031 गर्भवती महिलाएं भर्ती हुईं। इनमें से 108 1 की डिलेवरी हुई और 29 नवजात शिशुओं की जन्म के दौरान मौत हो गई।

इनमें से कई तो गर्भ में ही मृत पाए गए, तो वहीं ज्यादातर जन्म के बाद कुछ ही मिनिट जी सके। इसके अलावा डिलेवरी के समय दो महिलाओं की भी मौत हो गई। वहीं 50 गर्भवती महिलाएं तो खून की कमी से पीडि़त पाई गईं डिलेवरी के बाद रक्त चढ़ाकर डॉक्टर उन महिलाओं की जान बचा सके। यह आंकड़े सिर्फ जिला अस्पताल के हैं, इससे जिलेभर की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।

रोशनी क्लीनिक फिर भी महिलाएं गंभीर
गंभीर बीमारियों से पीडि़त महिलाओं के स्वास्थ्य की निशुल्क जांच और इलाज के लिए जिला अस्पताल में शासन रोशनी क्लीनिक चला रही है। इसमें महिलाओं की निशुल्क जांचें की जाती हैं, इसके बावजूद भी तीन महीने में जिला अस्पताल में 156 गर्भवती महिलाएं गंभीर अवस्था मेंं पाई गई हैं, जो डिलेवरी के दौरान गंभीर बीमारियों से पीडि़त मिलीं।

इससे रोशनी क्लीनिक सहित प्रसूताओं के स्वास्थ्य की जांच व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। आखिर क्यों ये स्थिति बन रही है? क्या महिलाओं को पोषण आहार नहीं मिल रहा है।

पोषण आहार के बाद भी महिलाएं एनीमिक
इतना ही नहीं गर्भवती महिलाओं को स्वस्थ रखने के लिए शासन पोषण आहार की व्यवस्था करता है। जिले में 1089 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं और हर माह आंगनबाडिय़ों को करोड़ों रुपए का पोषण आहार गर्भवती महिलाओं और बच्चों के पोषण के लिए दिया जाता है।

वहीं महिलाओं को आयरन सुक्रोज के इंजेक्शन लगाने और आयरन की टेबलेट भी बंटवाई जाती हैं। लेकिन इसके बाद भी गर्भवती महिलाओं में गंभीर स्तर तक खून की कमी पोषण आहार पर सवाल उठा रही है।
व्यवस्थाओं पर सवाल
चार मार्च को ईसागढ़ के मनकचौक की सुमन पत्नी गोविंद ओझा को प्रसव पीड़ा होने की सूचना पर जननी एक्सप्रेस नहीं पहुंची। घर पर प्रसव हो गया। बाद में जननी से ईसागढ़ अस्पताल पहुंचाया। जहां खून की कमी होने से उसे जिला अस्पताल भेजा, लेकिन रास्ते में सुमन की मौत हो गई। गम में पति गोंविद ने भी ट्रेन के आगे कूंदकर आत्महत्या कर ली।

 

गर्भवती का गंभीर बीमारी से पीडि़त होना या फिर नवजात के फेंफड़े मजबूत न होने की वजह से ही जन्म के तुरंत बाद बच्चों की मौत होती है। इसके कई अन्य भी कारण हैं।
- डॉ.कीर्ति गोल्या, प्रभारी प्रसूतिगृह जिला अस्पताल

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