प्राइवेट जांच में मिल रहे डेंगू के मरीज, विभाग से कलेक्टर बोलीं- लोग मरने लगेंगे तब ध्यान दोगे!

प्राइवेट जांच में मिल रहे डेंगू के मरीज, विभाग से कलेक्टर बोलीं- लोग मरने लगेंगे तब ध्यान दोगे!

Praveen tamrakar | Publish: Oct, 14 2018 04:10:15 AM (IST) Ashoknagar, Madhya Pradesh, India

जिले में डेंगू-मलेरिया का प्रकोप बढ़ गया है, हालत यह है कि जहां अब तक करीब एक दर्जन से अधिक डेंगू पॉजीटिव मरीज मिल चुके हैं

अशोकनगर. जिले में डेंगू-मलेरिया का प्रकोप बढ़ गया है, हालत यह है कि जहां अब तक करीब एक दर्जन से अधिक डेंगू पॉजीटिव मरीज मिल चुके हैं तो वहीं जिलेभर की अस्पतालों में रोजाना एक हजार मरीज मलेरिया से पीडि़त पाए जा रहे हैं। लेकिन विभाग खुद की हुई जांचों को सही मान रहा है। जिले में बढ़ते डेंगू-मलेरिया के प्रकोप को देखते हुए कलेक्टर ने मलेरिया विभाग को फटकार लगाई। साथ ही यह भी कह दिया कि जब जिले में लोग मरने लगेंगे तब ध्यान दोगे क्या? वहीं जिले में जल्दी ही सर्वे कराने और दवाइयों का छिड़काव कराने के भी निर्देश दिए।

कलेक्टर डॉ.मंजू शर्मा अधिकारियों के साथ शनिवार को जिला अस्पताल पहुंची। जहां पर मलेरिया के मरीजों की संख्या देख भड़क गईं और मलेरिया अधिकारी डॉ.दीपा गंगेले से कहा कि प्राइवेट पैथोलॉजियों की जांचों में लोग डेंगू पॉजीटिव निकल रहे हैं, लेकिन मलेरिया विभाग सर्वे कराने या दवा छिड़काव कराने की बजाय उन्हें मरीज मानने को तक तैयार नहीं है। साथ ही कहा कि विभाग से ज्यादा मरीज तो मीडिया ढूंढ लाता है, फिर भी विभाग क्षेत्र में नहीं जा रहा है, इसलिए डेंगू-मलेरिया के मामले में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं अपर कलेक्टर डॉ.अनुज रोहतगी ने मलेरिया विभाग से कहा कि सिर्फ सोशल मीडिया पर फोटो अपलोड कर देने से काम नहीं चलेगा। क्षेत्र में जाओ और वहां लोगों की समस्या को देखो व सर्वे कराओ। अपर कलेक्टर ने यह तक कहा कि मलेरिया विभाग के अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं और बिल्कुल भी गंभीर नहीं हैं, इसलिए इनकी चुनाव में ड््यूटी लगाओ और मैं इन्हें बताऊंगा की काम क्या होता है। वहीं अपर कलेक्टर ने पूछा कि बताएं अब तक सर्वे में कितने घरों और कितने कंटेनरों की जांच की गई।

तीन से चार हजार में हो रहा इलाज
जिले में मलेरिया के मरीजों को इलाज के लिए परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालत यह है कि मलेरिया के मरीज को इलाज कराने के लिए तीन से चार हजार रुपए खर्च करना पड़ रहे हैं। लेकिन कई सरकारी अस्पतालों में मलेरिया का मरीज दवाइयां और इंजेक्शन की कमी बताकर किया ही नहीं जा रहा है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी उन गरीब परिवारों को हो रही है, जिनके पास तीन से चार हजार रुपए खर्च करने की व्यवस्था नहीं है।

टंकियों को देखा और जताई नाराजगी
कलेक्टर ने नाराजगी जताते हुए खुद ही जिला अस्पताल की छत पर जाकर यह कहते हुए टंकियों की जांच की कि कहीं टंकियों में ही लार्वा न पनप रहा हो। वहीं छत पर कबाड़ देखकर नाराजगी जताई। ट्रामा सेंटर में जगह-जगह थूक के धब्बे देखकर कलेक्टर ने कहा लगता है कि मेरे आने पर ही सफाई शुरू करते हो।

वाट्सएप पर ग्रुप बनाकर रोज एकत्रित करें रिपोर्ट
कलेक्टर ने मलेरिया अधिकारी को निर्देश दिए कि क्षेत्र में सर्वे कराएं और पीडि़तों को इलाज उपलब्ध कराएं। वहीं जिले की सभी प्राइवेट नर्सिंग होम और पैथोलॉजी संचालकों का व्हाट्सएप पर ग्रुप बनाकर रोजाना जानकारी लें कि कहीं पर डेंगू या मलेरिया का मरीज तो नहीं मिला है। जानकारी मिलते ही तुरंत क्षेत्र में पहुंचकर सर्वे कराएं और मरीजों का इलाज करें। साथ ही कलेक्टर ने चेतावनी भी दी कि यदि अब लापरवाही पाई गई तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह भी दिए अस्पताल और विभाग को निर्देश
आरओ खराब होने की वजह से डायलिसिस बंद है, दो मशीन रखें और जल्दी चालू करवाएं। ताकि मरीजों को डायलिसिस के लिए परेशान न होना पड़े।
बाहर से आने वाली डेंगू की जांचों को 24 घंटे के भीतर मंगवाने की व्यवस्था करें और पॉजीटिव मरीज मिलते ही गांव पहुंचकर जांच कराएं।
मलेरिया दलों को घर-घर भेजकर लार्वा का सर्वे कराकर नष्ट कराएं और स्प्रे भी करवाएं। इसका अभियान चलाया जाना चाहिए।
विभाग अपनी जिम्मेदारी को समझे और बीमारियों को बढऩे से रोकने के लिए ठोस कार्रवाई की जाए और नपा भी फॉगिंग मशीन चलाएं।

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