टंकियों पर 30 लाख खर्च और 45 हजार का पानी का ठेका, फिर भी पेयजल की समस्या

सिर्फ एक टोंटी ही चालू, निकलता है गर्म पानी, किसान शहर में लगे हैंडपंप से और व्यापारी घरों से लाते हैं पानी

By: Manoj vishwakarma

Published: 29 Mar 2019, 02:02 AM IST

अशोकनगर. प्रदेश की बड़ी मंडी होने से आसपास के चार जिलों के किसान यहां अपनी फसल बेचने आते हैं। जहां पेयजल के लिए तीन साल पहले टंकियों और टोंटियों पर 30 लाख रुपए खर्च किए गए और हर माह 45 हजार रुपए पीने के पानी के ठेके पर खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत में गर्मी के इस मौसम में मंडी में किसानों को पीने का पानी नहीं मिल पा रहा है। किसान और हम्माल शहर में लगे हैंडपंपों से पानी भरकर लाते हैं, तो वहीं व्यापारियों को अपने घर से पीने का पानी लाना पड़ता है।

 

गुरुवार को मंडी में इस सीजन की सबसे ज्यादा आवक रही। जिसमें आरोन, सिरोंज, कुरवाई और शिवपुरी जिले के साथ अशोकनगर जिले के करीब पांच हजार से अधिक किसान अपनी फसलों के साथ पहुंचे। तेज धूप और भीषण गर्मी होने से किसानों को मंडी में पीने के पानी के लिए भटकना पड़ा। यह एक दिन की बात नहीं, बल्कि रोजाना ही मंडी में पेयजल के यह हालात हैं। ज्यादातर टंकियां तो मंडी से गायब हो चुकी हैं और टोंटियां भी चोरी हो गई हैं, वहीं मंडी कार्यालय के पास ही एक प्याऊ में और टीनशेड़ में एक टोंटी में पानी आता है, लेकिन इनमें गर्म पानी निकलने की वजह से किसानों-हम्मालों के साथ व्यापारियों को भी पेयजल की समस्या से जूझना पड़ रहा है। जबकि मंडी में दो बड़ी टंकियां बनी टंकियां और छह छोटी टंकियां बनी हुई हैं, लेकिन यह टंकियां सिर्फ शोपीस बनकर रह गई हैं। जिनमें लोगों को पीने का पानी नहीं मिलता है। व्यापारी तो अपने घरों से पानी ले जाते हैं, लेकिन किसानों और हम्मालों को मंडी से बाहर शहर में लगे हैण्डपंपों पर पानी भरने के लिए जाना पड़ता है।

किसानों का कहना है कि मंडी में पीने के पानी की व्यवस्था न होने की वजह से उन्हें अपनी अनाज की ट्रॉलियों को छोड़कर मंडी के बाहर पानीभरने के लिए जाना पड़ता है। यदि कोई किसान अकेला है और वह पानी भरने चला गया तो उसका अनाज चोरी हो जाता है। किसान पानी भरने जाएं या फिर अनाज की रखवाली करें।

लाखों खर्च फिर भी व्यवस्थाएं गायब

किसानों को 24 घंटे पानी उपलब्ध कराने तीन साल पहले मंडी समिति ने एक बड़ी टंकी का निर्माण कराकर पार्क के चारों तरफ चार छोटी टंकियां बनवाई थीं। साथ ही पार्क के चारों तरफ 60 टोंटियां लगाई गई थीं। इसके अलावा मंडी के सभी कोनों पर 10-10 हजार लीटर की छह टंकियां भी रखी गई थीं। इन व्यवस्थाओं पर 30 लाख रुपए खर्च किए गए थे, लेकिन अब टोंटियां चोरी हो चुकी हैं तो कोनों पर रखी टंकियां भी गायब हैं। पार्क में लगी चारों टंकियां सूखी पड़ी हुई हैं। किसानों को लाइनों में ही पानी उपलब्ध कराने मंडी ने 45 हजार रुपए महीने पानी के ठेके पर खर्च कर रही हैं।

इनका कहना है

मंडी में बोर का जलस्तर घट गया है, लेकिन पानी आ रहा है। प्याऊ में टैंकरों से पानी भरवा रहे हैं और हाथठेलों से भी पानी की व्यवस्था की गई है। पानी की वैसे तो कोई समस्या नहीं है, यदि है तो हम दिखवाते हैं।

सुधीर शिवहरे, सचिव कृषि उपज मंडी अशोकनगर

Manoj vishwakarma Desk
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