नारेबाजी करते हुए कलेक्टर बंगले के सामने किसानों का चक्काजाम, तो प्रशासन ने की दुकानों पर कार्रवाई

यूरिया नहीं मिला तो किसानों ने किया हंगामा,

- एसडीएम-तहसीलदार ने सोसायटी को दिए गए यूरिया का कराया किसानों को वितरण, तब माने किसान। दो-दो बोरी ही मिल सका किसानों को यूरिया।

By: Arvind jain

Published: 18 Dec 2018, 02:14 PM IST

अशोकनगर. जिले में मार्कफेड अपनी गोदामों से पिछले साल से दोगुना से अधिक यूरिया इस बार बांट चुका है। इसके बाद भी किसानों को यूरिया नहीं मिल पा रहा है, यूरिया न मिलने से गुस्साए किसानों ने सुबह कलेक्टर के बंगले के सामने नारेबाजी करते हुए सड़क पर चक्काजाम कर दिया।

किसानों ने कालाबाजारी का आरोप लगाया और कहा कि सरकारी गोदामों से दुकानदारों को यूरिया दे दिया गया है और अब दुकानदार 272 रुपए की कट्टी को 350 रुपए में बेच रहे हैं। बाद में किसानों के समझाने के बाद किसान वहां से हटे और तहसीलदार ने शहर की खाद दुकानों पर छापामार कार्रवाई की। साथ ही एक दुकान को सील कर दिया।


सुबह करीब आठ बजे करीब दो सैंकड़ा किसान मार्कफेड की गोदाम पर पहुंचे तो कर्मचारियों ने यूरिया खत्म होने की बात कहकर लौटा दिया। गुस्साए किसानों ने कलेक्टर के बंगले के सामने पहुंचकर नारेबाजी की, लेकिन जब उनकी किसी ने समस्या नहीं सुनी तो वह कलेक्टर बंगले के सामने ही सड़क पर चक्काजाम कर बैठ गए।

आधा घंटे बाद एसडीएम नीलेश शर्मा और तहसीलदार इसरार खान ने मौके पर पहुंचकर किसानों को समझाया और कृषि अधिकारियों व गोदाम मैनेजर को मौके पर बुलाया। जहां पर गोदाम मैनेजर ने स्टॉक खत्म होने की बात कही तो एसडीएम-तहसीलदार ने फटकार लगाई और सोसायटी को दिया गया यूरिया किसानों को बंटवाया। इससे 180 किसानों को दो-दो कट्टी यूरिया ही मिल सका। वहीं प्रशासन ने किसानों को जल्दी ही और यूरिया उपलब्ध कराने का आश्वासन देकर वापस लौटाया।

फटकार लगाने के बाद गए मैनेजर
किसानों के चक्काजाम के दौरान जब एसडीएम-तहसीलदार ने कृषि विभाग के एसएडीओ और गोदाम मैनेजर को सोसायटी के रखे हुए यूरिया की कट्टियों की गिनती करने के लिए कहा तो वह वहीं पर खड़े रहे। बाद में एसडीएम व तहसीलदार ने फटकार लगाई इसके बाद ही गोदाम मैनेजर वहां से गए। बाद में प्रशासन ने किसानों को वह यूरिया वितरित कराया और मार्कफेड को पर्याप्त यूरिया उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।


दुकान पर मिला 357 कट्टी यूरिया, दुकान सील-
किसानों ने शिकायत की कि गोदाम से आने वाले यूरिया को किसानों की वजाय कालाबाजारी कर दुकानों पर भिजवा दिया जाता है। इससे दुकानदार 272 रुपए की यूरिया की एक बोरी को 350 रुपए में बेच रहे हैं। शिकायत पर तहसीलदार ने कृषि उपसंचालक एसएस मरावी के साथ खाद की लाईसेंसी दुकानों पर छापामार कार्रवाई की। इसके लिए कोलुआ रोड स्थित दुकान पर जांच के बाद वह आरोन रोड पर पहुंचे तो साईं ट्रेडर्स की दुकान पर पहुंचे।

जहां पर दुकानदार ने 1050 कट्टी यूरिया बाहर से मंगाना बताया और दुकान पर 357 बोरी यूरिया रखा भी मिला। लेकिन कितनी रेट में और कितने किसानों को यह यूरिया बेचा गया, इसके कोई दस्तावेज नहीं मिले। वहीं दुकान पर सीमेंट और लोहा भी बेचा जा रहा था। इससे दुकान को सील करा दिया गया। हालांकि कार्रवाई की जानकारी मिलते ही अन्य दुकानदार अपनी दुकानें बंद करके चले गए।


सरकारी यूरिया के कालाबाजारी की आशंका-
जहां किसान तो सरकारी यूरिया की कालाबाजारी की शिकायत कर ही रहे हैं, वहीं प्रशासन भी इस आशंका को अब सही मानने लगा है। क्योंकि पिछले वर्ष जिलेभर की तीनों गोदामों से मार्कफेड ने 2340 टन यूरिया वितरित किया था और इस बार रबी सीजन में अब तक 4796 टन यूरिया अब तक वितरित हो चुका है, जो पिछले साल से दोगुने से ज्यादा है। इसके बावजूद भी किसानों में अभी भी यूरिया की मांग बनी हुई है और किसान यूरिया के लिए भटक रहे हैं।

किसानों ने आरोप लगाया है कि सरकारी गोदामों से यूरिया की कालाबाजारी हो रही है। वहीं दुकानदार 272 रुपए की यूरिया की कट्टी को 350 रुपए में बेच रहे हैं। सोसायटी के यूरिया को 180 किसानों में बंटवा दिया गया। वहीं दुकानों पर कार्रवाई की गई, एक दुकान पर बेचे गए यूरिया के दस्तावेज न मिलने पर उसे सील किया गया। वहीं इस दुकान पर लोहा व सीमेंट भी बेचा जा रहा था, जो नियम विरुद्ध है। कालाबाजारी की जांच की जा रही है।
इसरार खान, तहसीलदार अशोकनगर


पिछले साल रबी सीजन में जिले में 2340 टन यूरिया बांटा गया था, इस बार अब तक 4796 टन बंट चुका है। इसके बाद भी अशोकनगर व मुंगावली में स्टॉक खत्म हो गया है और सिर्फ पिपरई में ही 105 टन यूरिया बचा है। और डिमांड भेजी गई है।
एमएस राजपूत, डीएमओ अशोकनगर

Arvind jain
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned