मरीज के बेड तक जूते-चप्पल

मरीज के बेड तक जूते-चप्पल
ashoknagar

Mukesh Kumar Sharma | Publish: Aug, 11 2015 11:30:00 PM (IST) Ashoknagar, Madhya Pradesh, India

किसी भी इंफेक्शन के लिए सबसे अधिक संवेदनशील माने वाले जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में डाक्टर,

अशोकनगर।किसी भी इंफेक्शन के लिए सबसे अधिक संवेदनशील माने वाले जिला अस्पताल के बर्न वार्ड में डाक्टर, नर्सिग स्टाफ व अन्य कर्मचारियों सहित परिजन भी जूते पहनकर ही मरीजों के पलंग तक चले जाते हैं। यहां तक कि डाक्टर व स्टाफ उस जगह भी जूते नहीं खोलते जहां अत्यधिक गंभीर रूप से जले मरीज को उपचार दिया जा रहा है।

मंगलवार को दोपहर जब पत्रिका टीम ने बर्न वार्ड का जायजा लिया तो हालात बेहद गंभीर नजर आए। कमरा गंदा पड़ा था। 12 बाई12 के इस कमरे में तीन पलंग पड़े थे। अलमारियों में धूल जमा थीं, यहीं मरीजों के बर्तन, दवाइयां आदि रखी थीं। मरीजों की निकली हुई यूरिन की नलियां, झाड़ू आदि भी कमरे में ही पड़े थे। बदबू से कमरे में खड़ा होना भी मुश्किल हो रहा था। मरीज को यूरिन भी कमरे में ही पॉट में कराया जा रहा है।

मरीजों पर पड़े धूल से भरे चादर-कंबल आदि उनके घावों को छूते रहे थे। इन कपड़ों की धूल व अन्य सूक्ष्मजीवी घावों में इंफेक्शन का कारण बन रहे हैं।


यानी कुल मिलाकर मरीजों को इंफेक्शन से बचाने के उपायों की जगह इंफेक्शन को बढ़ाने का काम यहां किया जा रहा है। पिछले महीने यहां भर्ती दो लोगों की उपचार के दौरान मौत हो चुकी हैं।


वार्ड में जूते

बर्न वार्ड में इंफेक्शन को रोकने के लिए बाहर के जूते-चप्पल पहनकर जाना प्रतिबंधित होता है लेकिन जिला अस्पताल में ऎसा कोई नियम नहीं है। वार्ड का दरवाजा 24 घंटे खुला रहता है और मरीजों के परिजन, नर्से, चिकित्सक सहित ही सफाई कर्मी व अन्य लोग भी वार्ड में जूते-चप्पल पहनकर आते रहते हैं।

घर से लाए मच्छरदानी

बर्न वार्ड में भर्ती दो मरीजों में से एक को मच्छरदानी तक नहीं दी गई। वह अपने घर से मच्छरदानी लेकर आया। इसके अलावा मरीजों के परिजन भी इसी कमरे में उठ-बैठ और सो रहे हैं।

उनके बैठने के लिए वार्ड के बाहर कोई व्यवस्था नहीं है। मच्छरदानी को पलंग पर लकडियां बांधकर लटकाना पड़ रहा है। मरीजों को ढंकने के लिए चादर-कंबल भी घर से लेकर आए हैं। आड़ करने के लिए भी कोई साधन नहीं है।

दिए थे निर्देश

बर्न वार्ड में मरीजों के घावों में इंफेक्शन का खतरा अधिक है। करीब 7-8 माह पहले अस्पताल का निरीक्षण करने आए स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव भी बर्न वार्ड को लेकर नाराजगी जता चुके हैं। उन्होंने व्यवस्थाएं सुधारने व भर्ती मरीजों को जरूरी सुविधाएं जैसे मच्छरदानी, मरीजों को ढंकने वाला उपकरण आदि उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए थे। उन्होंने बर्न वार्ड में इंफेक्शन का सर्वाधिक खतरा बताया था। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।

ये है खतरा

मरीज की त्वचा सीधे वातावरण के संपर्क में रहती है। हवा में मौजूद बैक्टीरिया व वायरस सीधे घाव पर चिपक जाते हैं। इससे संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। नियमानुसार बर्न वार्ड में बाहर के जूते-चप्पल नहीं जाना चाहिए, आवश्यक हो तो वार्ड के अलग से चप्पलें रखी जाती हैं, जो जिला अस्पताल में नहीं है। मरीजों को ढंकने के लिए विशेष प्रकार उपकरण होता है, ताकि कपड़ा मरीज की जली हुई त्वचा से न चिपके। निर्देश के बाद भी ये नहीं खरीदे गए हैं।

ये व्यवस्थाएं चाहिए

-बाहर के जूते-चप्पल अंदर न जाएं, दरवाजा बंद रहें ताकि बाहर की धूल व मक्खी-मच्छर आदि अंदर न जाएं।

-सेपरेट कमरा होना चाहिए और पूरी तरह से हाईजेनिक होना चाहिए। आईबी फ्लूड उपलब्ध होना चाहिए।

वार्ड में कूलर, मच्छरदानी आदि लगवा देंगे। गुड़गांव में इंफेक्शन रोकने का प्रशिक्षण भी लिया है, अस्पताल के डाक्टर्स व अन्य स्टाफ को भी प्रशिक्षण दिया गया है। दोबारा से प्रशिक्षण दिया जाएगा। कायाकल्प की टीम भी आने वाली उनके साथ मिलकर बर्न वार्ड सहित ही अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं को भी सुधारा जाएगा।डा. एबी मिश्रा, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल अशोकनगर

स्टाफ की कमी के कारण अव्यवस्था हो रही है। बर्न वार्ड के लिए डाक्टर अलग से होना चाहिए, लेकिन नहीं है। साफ-सफाई व इंफेक्शन को रोकने के सभी संभव व्यवस्थाएं की जानी चाहिए। हम कल जाकर वार्ड को देखेंगे और व्यवस्थाएं करवाई जाएंगी। डा. रामवीरसिंह, सिविल सर्जन अशोकनगर

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