दौड़कर मदद को पहुंची महिलाएं, कंबल की ओट में करवाई डिलिवरी

स्टेशन पर मौजूद महिलाओं की मदद, 25 मिनिट बाद पहुंची जननी

अशोकनगर। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरी गर्भवती दर्द से कराह रही थी। उसके साथ आई महिलाएं उसे जमीन पर लेटाकर मदद के लिए यहां-वहां देख रही थीं। तभी प्लेटफार्म पर मौजूद कुछ महिलाएं उठीं और उनकी तरफ दौड़ीं। आनन-फानन में कंबल की ओट की गई और प्रसूता ने रेलवे स्टेशन पर ही बच्चे को जन्म दिया। डाक्टर्स के अनुसार बच्चा सुरक्षित है। साथ ही उसकी मॉ भी खतरे से बाहर है।

महिलाओं की मदद से एक मां और उसके बच्चे की जान बच गई। इसी बीच लोगों ने 108 को भी फोन लगा दिया था। करीब 25 मिनिट बाद जननी वाहन पहुंचा और जच्चा-बच्चा को जिला अस्पताल ले जाया गया। जहां दोनों स्वस्थ हैं। जननी आने तक महिलाएं कंबल की आड़ कर प्रसूता को चारों ओर से घेरे रहीं और प्रसूता विशेष ध्यान रखा।

खुजराई निवासी विनोद धाकड़ ने बताया कि उनकी पत्नि विनीता (26) को सुबह छह साढ़े छह बजे पेट में हल्का दर्द हुआ था। हल्का-हल्का दर्द होने के कारण उन्होंने जननी वाहन को फोन नहीं लगाया। बीना-गुना ट्रेन का समय था तो ट्रेन से उसे अशोकनगर लेकर आ रहे थे। लेकिन रास्ते में दर्द बढऩे लगा और रेलवे स्टेशन पर उतरते ही डिलिवरी हो गई।

स्टाफ नहीं रहता, इसलिए नहीं ले गए पिपरई
विनोद धाकड़ के भतीजे अवधेश धाकड़ ने बताया कि पिपरई स्वास्थ्य केंद्र पर ना तो डॉक्टर मिलते हैं और ना ही नर्स। नर्स मिलती भी है तो कह देती है कि हमारा घर पास ही है, दर्द हो तो हमारे पास आ जाना। अकेले वहां पड़े रहने का कोई मतलब नहीं है, इसलिए वे विनीता को पिपरई न ले जाकर सीधे जिला अस्पताल ला रहे थे। पर, रास्ते में ही ऐसा हो गया और मदद के लिए जननी सुरक्षा वाहिनी भी नहीं आई। आस पास की महिलाओं ने मिलकर डिलेवरी करवा दी। नहीं तो पता नहीं क्या होता।

दीपेश तिवारी
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