मां के दरबार में मन्नतों की राई

अशोकनगर. करीला मेला की प्रसिद्धी साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। साथ ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। प्रशासन के अनुसार रविवार को शाम तक ही यहां करीब दो लाख श्रद्धालु पहुंच चुके थे। वहीं सोमवार की रात तक श्रद्धालुओं की संख्या 12 लाख को पार कर गई थी।

By: Brajendra Sarvariya

Published: 28 Mar 2016, 11:15 PM IST

अशोकनगर. करीला मेला की प्रसिद्धी साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। साथ ही यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी वृद्धि हो रही है। प्रशासन के अनुसार रविवार को शाम तक ही यहां करीब दो लाख श्रद्धालु पहुंच चुके थे। वहीं सोमवार की रात तक श्रद्धालुओं की संख्या 12 लाख को पार कर गई थी। माता के जयकारों के साथ निजी और सार्वजनिक साधनों से श्रद्धालु करीला पहुंचे। वहीं हजारों लोगों ने पैदल ही यह सफर तय किया। रैलिंग में अनुशासन के साथ श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए और मन्नतें मांगी। प्रसाद
चढ़ाने की व्यवस्था मंदिर के बाहर रखी गई थी।
हजारों की संख्या में पहुंची नृत्यांगनाएं
मेले में राई नृत्य के लिए पहुंची नृत्यांगनाओं की संख्या इस बार दो हजार तक पहुंच गई। पहले यहां बेडिय़ा जाति की महिलाओं द्वारा नृत्य किया जाता था, लेकिन अब कंजर जाति की महिलाएं भी यहां पहुंचने लगी हैं। इनकी संख्या में लगातार बढ़ रही है। इस बार बेडिय़ा और कंजर जाति की नृत्यांगनाओं की संख्या लगभग बराबरी पर पहुंच गई। प्रदेश के सागर सहित राजस्थान से भी बड़ी संख्या में नृत्यांगनाएं करीला पहुंची।
जमकर हुआ राई नृत्य
मान्यता पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने यहां राई नृत्य करवाया। आकर्षक सज्जा के साथ नृत्य करती हुई नृत्यांगनाएं स्वर्ग से उतरी अप्सराओं के समान लग रही थीं। ढोलक और नगडिय़ा की थाप व मंजीरे की धुन के बीच घुंघरुओं की झनकार के साथ रात तक नृत्य का दौर चलता रहा। रात में मशालों की रोशनी की राईनृत्य किया गया। उल्लेखनीय है कि करीला को लव-कुश का जन्म स्थान माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि उनके जन्म के बाद स्वर्ग से उतरी अप्सराओं ने यहां नृत्य किया था। तभी से यहां लोग संतान की कामना करते हैं और मनोकामना पूरी होने पर राई नृत्य करवाते हैं।
पानी के लिए करनी पड़ी मशक्कत
मेला प्रांगण में श्रद्धालुओं को पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी मुहैया कराने के प्रशासन के तमाम प्रयास विफल रहे। पीने के लिए एक 50 हजार और छह 5-5 हजार लीटर की पानी की टंकियों को भरने के साथ ही ग्राम पंचायत द्वारा टैंकरों की व्यवस्था भी की गई थी। पानी की टंकियों और टैंकरों पर पानी के लिए मारी-मारी होती रही। लोग बॉटलें और केन लेकर टैंकरों के पीछे दौड़ते नजर आए। कई लोगों ने जल्दबाजी में टंकी पर चढ़कर पानी भरने का प्रयास किया।
जोखिम में डाली जान
हर बार की तरह इस बार भी मेले में पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं ने अपनी जान जोखिम में डाली।बसों, जीपों व अन्य चार पहिया वाहनों की छतों पर बैठकर श्रद्धालु मेला स्थल पर पहुंचे। वहीं कई लोगों ने वाहनों पर लटककर यात्रा की। प्रशासन भी ओवर लोडिंग पर लगाम लगाने में विफल रहा। बड़ी संख्या में वाहनों के आने-जाने से बार-बार जाम की स्थिति बनी रही।
जाम में फंसे वीआईपी
बड़ी तादाद में वाहनों के आवाजाही के कारण बार-बार जाम की स्थिति बनती रही। शाम के समय ओंडेर से बंगला चौराहा एवं इकौदिया से बामोरीशाला मार्ग पर अधिक वाहन इकट्ठे हो जाने से जाम लगा। मेले में राजस्व मंत्री रामपालसिंह व जिले के प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव भी पहुंचे। लेकिन वे घाटबमुरिया से पहले जाम में फंस गए। यहां करीब दो किमी लंबा जाम लगा था। जाम के कारण वे वापस लौटकर सिरोंज वाले रास्ते से करीला पहुंचे।
कलेक्टर-एसपी सहित अधिकारी रहे मौजूद
मेले में सुरक्षा को लेकर कलेक्टर अरुण कुमार तौमर व एसपी संतोषसिंह गौर, एएसपी विनोद कुमार सिंह चौहान, अपर कलेक्टर एचपी वर्मा, जिपं सीईटो एमएल वर्मा, एसडीएम मुंगावली नेहा शिवहरे पूरे समय वहां मौजूद रहे।इसके साथ ही पुलिस जवानों व सेक्टर मजिस्ट्रेटों की तैनाती भी की गई। सीसी टीवी कैमरों व वॉच टावर से मेला परिसर व मंदिर परिसर पर पूरी निगरानी रखी गई।
प्रभारी मंत्री ने किया शिलान्यास
करीला मंदिर पर प्रभारी मंत्री गोपाल भार्गव एवं राजस्व मंत्री मप्र शासन रामपालसिंह ने सामुदायिक भवन का शिलान्यास किया। उन्होंने कहा कि यह परफारमेंस ग्रांट से 58 लाख रुपए की लागत से बनाया जा रहा है। भवन के निर्माण के लिए राशि कम नहीं पड़ेगी। जितनी राशि की आवश्यकता होगी, वह देने के लिए मैं तैयार हूं। करीला मेला वास्तव में बड़ा मेला है, यहां मूलभूत सुविधाओं की जरूरत है। यहां सभी सुविधाएं शासन के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएंगी। प्रसिद्ध लोक नृत्य राई के प्रोत्साहन के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।
 
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