कमरे में आराम फरमा रहीं थी नर्स, उधर अस्पातल में दर्द से तड़पती रही गर्भवती

नाइट वॉच: शनिवार-रविवार की दरमियानी रात 12.09 बजे न मिला इलाज और न ही शहर सुरक्षित

By: Amit Mishra

Published: 06 Jan 2020, 02:07 PM IST

अशोकनगर। अशोकनगर जिले में भले ही विकास की गंगा बहाने की दुहाई कांग्रेस और भाजपा देती हो, लेकिन हकीकत ये है कि रात के समय यहां के जिला अस्पताल में न तो मरीजों को इलाज मिलता है और न ही जरूरत पडऩे पर कोई भी दवा। ऐेसे ही सुरक्षा की बात की जाए तो सुरक्षा की जिम्मेदारी जिनके कंधों पर है वे ही रात में गहरी नींद में सो रहे हैं। चाहें उनके थाने से कोई भी कुछ सामान उठाकर ले जाए।

 Dutty Room

कोई गार्ड नजर नहीं आया
अस्पताल की पुलिस चौकी में सुरक्षा के लिए तैनात स्टाफ गेट बंद कर हुए सोता हुआ मिला। वहीं जीआरपी पुलिस थाने का मुख्य द्वार बंद था, अंदर जाकर देखा तो कुर्सियां खाली पड़ी हुई थी, एक जवान सोया हुआ मिला। शहर में अलग-अलग बैंकों के एटीएम हैं लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए कोई गार्ड नजर नहीं आया।

कोई भी मौजूद नहीं था
सर्दी के मौसम में पत्रिका की टीम शनिवार-रविवार की दरम्यानी रात को 12 बजकर 9 मिनट पर शहर की व्यवस्थाओं का जायजा लेने निकली, जिसमें एक नहीं कई तरह की खामियां नजर आईं, सबसे लचर व्यवस्था स्वास्थ्य विभाग की दिखी, जहां देखने और सुनने वाला कोई भी मौजूद नहीं था।

अलाव जलाकर तापते नजर आए
इसके साथ रात्रि के समय पुलिस के प्वाइंटों पर भी पुलिस की कोई व्यवस्था देखने को नहीं मिली। रात्रि के समय ऐसी कोई दुकान नहीं मिली जहां आसानी से दवाई मिल सकती थी। शहर के लोग बताते हैं कि भले ही दूध न मिले, रात्रि में खिड़की खटखटाओगे तो शराब अवश्य पीने को मिल जाएगी। बस स्टैण्ड पर लोग रात्रि के समय अलाव जलाकर तापते नजर आए।

रात 12.09 बजे
दृश्य: रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर सुरक्षा की दृष्टि का यह आलम दिखा कि वहां न तो जीआरपी का जवान था और न ही आरपीएफ का। दूर-दराज से आए लोग गंतव्य स्थान जाने के लिए रेल पकडऩे के लिए सोते जरूर मिले। रेलवे अधिकारी अपने कक्ष में गेट लगाकर ड्यूटी कर रहे थे। सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले जीआरपी पुलिस थाने के गेट बंद थे और पर्दा लगा हुआ था, अंदर जाकर देखा तो सारी कुर्सियां खाली थीं, एक जवान सोता हुआ मिला,
वह भी नहीं उठा।

रात 12.36 बजे
जिला अस्पताल के प्रसूति वार्ड में पछमऊआ गांव की गर्भवती महिला जमीन पर लेटी दर्द से कराह रही थी, स्टाफ नर्स एक कमरे में अंदर से आराम फरमाते हुए मिले। आईसीयू वार्ड के एक कमरे में स्टॉफ हीटर लगाकर सोता मिला। सांस के एक मरीज जिसको ऑक्सीजन लगी थी, उसका मास्क ठीक करने में उसके परिजन लगाते मिले, कैमरा देख गार्ड सक्रियता बताते घूमता मिला, लेकिन स्टॉफ का कोई भी बाहर निकल कर नहीं आया। इसके बाद शिशु वार्ड में नर्स का चेम्बर अंदर से बंद था।


रात 01.12 बजे
इस एटीएम की सुरक्षा भी भगवान भरोसे मिली, इस एटीएम बूथ पर सुरक्षा के लिए न तो कोई सुरक्षा गार्ड तैनात था और न ही कोई दूसरा स्टाफ। इसके अलावा शहर के दूसरे स्थानों पर एटीएम सेन्टर देखे तो वे भी एटीएम सेन्टर सुरक्षा के अभाव में लावारिश दिखाई दिए। जबकि पूर्व में एक एटीएम पर घटना हो चुकी है, इसके बाद भी सुरक्षा बढ़ाने को न तो बैंक प्रबंधन तैयार है और न ही संबंधित थाना क्षेत्र।

रात 01.15 बजे
हृदय स्थल गांधी पार्क
यहां बहुतायत संख्या में दुकानें हैं। इसको अशोकनगर का हृदय स्थल भी कहा जाता है। लेकिन इस पार्क के आसपास रात्रि के समय न तो कोईपुलिस कर्मी अपनी ड्यूटी पर मिला न ही कोईदूसरा सुरक्षा गार्ड। इसके अलावा सर्राफा बाजार में टीम पहुंची तो वहां तीन पुलिस कर्मी सर्दी से बचने के लिए अलाव जलाने की जुगत करते देखे गए।

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