भावांतर के भंवर में फंसे किसानों का टूटा सब्र

भावांतर के भंवर में फंसे किसानों का टूटा सब्र

Brajesh Kumar Tiwari | Publish: Mar, 14 2018 11:45:58 AM (IST) Ashoknagar, Madhya Pradesh, India

जिस भावांतर योजना को प्रदेश सरकार किसानों के लिए सबसे अच्छी योजना बता रही है, उसके भंवर में फंसे किसान चार महीने बाद भी राशि का इंतजार कर रहे हैं।

अशोकनगर. जिस भावांतर योजना को प्रदेश सरकार किसानों के लिए सबसे अच्छी योजना बता रही है, उसके भंवर में फंसे किसान चार महीने बाद भी राशि का इंतजार कर रहे हैं। मंगलवार को किसानों का सब्र टूट गया और उन्होंने मंडी के गेट बंद करके आवाजाही रोक दी। करीब ढाई घंटे तक मंडी के दोनों गेट बंद रहे।
नवंबर, दिसंबर माह में अपनी उपज बेचने वाले दो हजार से अधिक किसानों को अभी तक राशि नहीं मिली है। इसके कारण किसान परेशान हैं और लगातार मंडी समिति, कृषि उप संचालक, एनआईसी, तहसील, एसडीएम व कलेक्ट्रेट कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। कइयों ने तो सीएम हेल्प लाइन पर भी शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन भावांतर भुगतान नहीं मिल सका।





मंगलवार को सुबह करीब ११ बजे से किसानों ने हंगामा करना शुरू कर दिया था। सबसे पहले तो कार्यालय में किसी के न मिलने पर किसानों ने हंगामा किया और कार्यालय के दरवाजे बंद कर दिए। इसके बाद आक्रोशित किसान मंडी के नए बस स्टैंड वाले गेट पर पहुंचे और उसे बंद कर दिया। इससे वाहनों की आवाजाही रुक गई और अंदर के वाहन अंदर और बाहर के वाहन बाहर ही रह गए। किसानों ने प्रदेश सरकार व मंडी प्रशासन के मुर्दाबाद के नारे भी लगाए।

सुबह करीब ११.३० बजे तहसीलदार सूर्यकांत त्रिपाठी मौके पर पहुंचे। मंडी सचिव ओपी लाक्षाकार के साथ उन्होंने किसानों को समझाने का बहुत प्रयास किया। कुछ देर बाद एसडीओपी हेमंत तिवारी भी पहुंचे और किसानों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन किसान नहीं माने। आक्रोश बढ़ता देख और पुलिस बल मौके पर बुलाया गया। दो घंटे तक समझाइश देने के बाद भी किसानों ने किसी की एक नहीं सुनी।

अपर कलेक्टर भी रहे बेअसर
दोपहर १.३० बजे अपर कलेक्टर एके चांदिल भी मंडी में पहुंचे। उन्होंने जैसे ही किसानों ने बात करनी शुरू की, तो किसान कलेक्टर को बुलाने की मांग पर अड़ गए। इसके बाद कुछ किसान नरम पड़े और मंडी अध्यक्ष के कक्ष में अपर कलेक्टर ने किसानों की समस्याओं को सुना। उन्होंने सभी की गलतियां सुधरवाकर ३१ मार्च तक खातों में पैसा आ जाने का आश्वासन दिया। इसके बाद किसान माने। लेकिन कुछ किसान गेट बंद करके खड़े रहे।जिन्हें पुलिस की मदद से जबरदस्ती गेट पर हटाकर गेट खुलवाए गए।

चालू हुआ पोर्ट, २८३ किसानों की सूची आई
मंगलवार को सरकार की ओर से एक जारी आदेश में पोर्टल को १४ से २१ मार्च तक दोबारा चालू किया जा रहा है। इसमें त्रुटि सुधार के साथ ही छूटे हुए किसानों की पोर्टल पर एंट्री भी की जा सकेगी। इसके अलावा भुगतान से शेष २८३ किसानों के नामों की सूची भी आ गई है। इन्हें कुल ३० लाख ६८ हजार २५२ रुपए का भुगतान किया जाएगा। मंडी सचिव ने बताया कि सूची बैंक को भेजी गई थी, जो वापस आ गई।

किसानों की समस्याएं
किसान देवेन्द्र रघुवंशी ने बताया कि उसने सीएम हेल्प लाइन पर शिकायत की थी। शिकायत नंबर 5511337 में निर्णय दिया गया कि तुम्हारा भुगतान हो गया और शिकायत बंद कर दी, जबकि भुगतान नहीं हुआ।
किसान प्रबल प्रतापसिंह ग्राम ढिमरोली ने बताया कि उनकी उपज के ४० हजार रुपए आने थे, लेकिन १६ हजार ही आए। शेष पैसा कहां गया, पता नहीं। वहीं भाई भूपेन्द्रङ्क्षसह सिकरवार द्वारा नवंबर में बेची गई उपज की राशि अभी तक नहीं आई है।

किसान अर्जुनसिंह बल्दाई ने बताया कि उन्होंने मक्का का पंजीयन करवाया था। पहले बार २५ क्ंिवटल मक्का बेची भी। इसके बाद दूसरी बार जब मक्का लेकर पहुंचे तो पंजीयन में सोयाबीन की फसल बताने लगा। एक-डेढ़ महीने चक्कर लगाने के बाद जांच करवाई गई और सोयाबीन को वापस से मक्का किया गया। फसल लेकर आए तो बोले अब तारीख निकल गई।

किसान अजय रघुवंशी महिदपुर, जीतू रघुवंशी लिधौरा, हरिसिंह रघुवंशी बगुल्या, विश्वीरसिंह रघुवंशी, रामवीरसिंह पिपरिया, रतनसिंह रघुवंशी मुहासा, तोफानसिंह जोगी लखेरी, वीरभानसिंह बमनावर, महाराजसिंह रघुवंशी मुहासा, जसरथसिंह कैथाई आदि ने भी राशि न आने और पोर्टल पर एंट्री न होने की शिकायत की।

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