गेहूं का रकबा बढ़ा तो पिछले साल से ढ़ाई गुना हुए पंजीयन, पर्याप्त जगह न होने से भंडारण की बढ़ेगी समस्या

गेहूं का रकबा बढ़ा तो पिछले साल से ढ़ाई गुना हुए पंजीयन, पर्याप्त जगह न होने से भंडारण की बढ़ेगी समस्या

Arvind jain | Publish: Mar, 17 2019 11:38:28 AM (IST) | Updated: Mar, 17 2019 11:38:29 AM (IST) Ashoknagar, Ashoknagar, Madhya Pradesh, India

समर्थन मूल्य खरीदी: पंजीयन का पोर्टल हुआ बंद और पंजीयनों के लिए शेष रहे गए करीब 10 हजार किसान।

अशोकनगर. जिले में इस बार गेहूं का रकबा डेढ़ गुना हो गया तो इस गेहूं को समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए पंजीयन भी पिछले साल की तुलना में ढ़ाई गुना हो गए हैं। लेकिन इस बार विभाग को भंडारण बड़ी समस्या बनेगा। जिले में पिछले साल खरीदी हुआ अनाज रखा हुआ है, इससे गोदामों में जहां पहले से ही जगह की कमी है। ऐसे में पिछले साल से ढ़ाई गुना पंजीयन हो जाने से भंडारण के लिए जगह की कमी समस्या बनेगी। लेकिन इस पर जिम्मेदारों द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिले में इस बार 32 हजार 129 किसानों ने समर्थन मूल्य पर अपनी फसलें बेचने के लिए पंजीयन कराए हैं।

जिनमें सबसे ज्यादा 28 हजार 292 किसानों ने गेहूं का पंजीयन कराया है, जो पिछले साल की तुलना में ढ़ाई गुना है। लेकिन इस बार चना, मसूर के पंजीयनों की संख्या घट गई है। पिछले साल करीब 40 हजार किसानों ने चना का पंजीयन कराया था, लेकिन इस बार चना के 17 हजार 670 पंजीयन ही हो सके, वहीं मसूर के भी 3237 किसानों के पंजीयन हुए और सरसों के 2717 पंजीयन हुए हैं। इसका कारण विभाग के अधिकारी गेहंू के बढ़े हुए रकबे को बता रहे हैं, तो वहीं चना-मसूर के पंजीयन कम रहने का कारण किसानों द्वारा पिछले साल समय पर भुगतान न मिलना बता रहे हैं।

फसल गलत दर्ज होने से ज्यादा हो गए गेहूं के पंजीयन-
किसानों का कहना है कि पंजीयन के उपार्जन पोर्टल से इस बार गिरदावरी को जोड़ दिया गया है। पटवारियों द्वारा किसानों की बोई गई फसलों की जानकारी दर्ज की तो वही फसल पंजीयन में दर्ज हो गई। किसानों ने पहले भी आरोप लगाया था कि वह चना, मसूर का पंजीयन करा रहे हैं, लेकिन पंजीयन गेहूं का हो जाता है। संख्या बढऩे का कारण इस गड़बड़ी को भी बताया जा रहा है। इसी समस्या के लिए अशोकनगर तहसील के करीब 324 किसानों ने शिकायतें की थीं, जिन्हें तहसीलदार द्वारा सुधरवाया गया है।

सुधार करने विभाग को लिखा पत्र-
किसानों द्वारा पंजीयन में फसलों के नाम गलत दर्ज हो जाने की शिकायत की है। इससे खाद्य विभाग ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर सुधार के लिए पोर्टल चालू कराने की मांग की है। ताकि पंजीयनों में गलत दर्ज हुए फसल के नाम और रकबे में सुधार किया जा सके। साथ ही पंजीयन की धीमी गति से

जिले में करीब 10 हजार से अधिक किसान पंजीयन नहीं करा पाए हैं। विभाग ने पंजीयन की तारीख बढ़ाने की भी मांग की है। किसानों का आरोप है कि उन्होंने तो अपने एक-एक खेत में दो से तीन फसलें बोई हैं, लेकिन गिरदावरी रिपोर्ट में पटवारियों ने एक ही फसल पूरे खेत में दर्ज कर दी है। इससे कई किसानों के गेहूं के पंजीयन तो बोए गए रकबे से भी ज्यादा हो गए हैं और चना-मसूर व सरसों के कम पंजीयन हो पाए हैं।

भंडारण के लिए नहीं पर्याप्त जगह-
जहां पिछले वर्षों में गेहूं के कम पंजीयन होते थे, फिर भी जिले में भंडारण के लिए गोदामों में जगह कम पड़ जाती थी। इससे पिछले सालों में खुले जगहों पर अनाज को रखना पड़ता था। लेकिन इस बार पंजीयन पिछले साल से ज्यादा हुए हैं और गेहूं का रकबा भी बढ़ा है। वहीं पिछले साल का खरीदा हुआ अनाज गोदामों में भरा हुआ है, इससे इस बार गोदामों में पर्याप्त खाली जगह नहीं है। इससे खरीदी के दौरान भंडारण बड़ी समस्या रहेगी। फिर भी भंडारण की व्यवस्था के लिए खरीदी शुरू होने से पहले से ही विभाग द्वारा कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।

हमारे पास पंजीयनों में गलत फसल और रकबा में सुधार संबंधी 324 शिकायतें आई थीं, जिनका तुरंत ही निराकरण कर दिया गया था, इससे पंजीयनों में दर्ज गलतियों में सुधार हो गया था। अब हमारे पास कोई भी आवेदन पेंडिंग नहीं हैं।
इसरार खान, तहसीलदार अशोकनगर

भोपाल को पत्र लिखा है कि पंजीयनों में दर्ज हुई गलत जानकारी को सुधारने के लिए फिर से पोर्टल चालू किया जाए और छूटे हुए किसानों का पंजीयन कराने के लिए पंजीयन की तारीख बढ़ाने की भी मांग की गई है।
एमएस राठौर, कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी अशोकनगर

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