गजरथ देखने उमड़ी भारी भीड़

खंदार गिरि पर आठ दिनों से चल रहे पंचकल्याण व गजरथ महोत्सव का गजरथ यात्रा के साथ समापन हो गया।

चंदेरी. अतिशय क्षेत्र खंदार गिरि पर पिछले आठ दिनों से चल रहे पंचकल्याण व गजरथ महोत्सव का रविवार को गजरथ यात्रा के साथ समापन हो गया। गजरथ में दो गजरथ सहित सात अन्य रथ शामिल हुए। जिन्होंने पांडाल के सात चक्कर लगाए। इस दौरान जैन श्रद्धालुओं के साथ ही हजारों की संख्या में अन्य समाज के लोग भी उपस्थित रहे।ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग गजरथ देखने के लिए खंदारगिरि पहुंचे।

दोपहर १.३० बजे से विशाल गजरथ यात्रा का शुभारंभ किया गया। गजरथ यात्रा में आगे-आगे ऐरावत हाथी पर प्रमुख पात्र विराजित थे। जो विश्व शांति का प्रतीक ध्वज लिए थे। उनके आगे दिव्य घोष चल रहे थे। द्वितीय हाथी पर धर्म ध्वज लिए प्रमुख पात्र बैठे थे। रथों में दोनों ओर विशाल चमर ढोलते हुए देव चल रहे थे। उक्त रथों में श्रीजी की प्रतिमा को लेकर प्रमुख इंद्र सौधर्म इंद्र, सतन कुमार, महेन्द्र इंद्र, ईशान इंद्र, धनपति कुबेर, महायज्ञनायक, राजा सोम, राजा श्रेयांश, भरत चक्रवर्ती, बाहुवली, सभी यज्ञ नायक, ब्रहमेन्द्र इन्द्र, लान्तव इन्द्र, कपिष्ठ इन्द्र, शुक्र इंद्र एवं मण्डलेश्वर व महामण्डलेश्वर पर विराजमान थे।

रथ के आगे-आगे क्षेत्रीय विधायक नपाध्यक्ष जैन युवा वर्ग के संरक्षक विजय धुर्रा, मुनिश्री अभयसागर जी, प्रभात सागरजी व पूज्य  सागरजी महाराज व श्रद्धालु चल रहे थे। रथों के पीछे छप्पन कुमारियां व अष्ट कुमारी देवियां नाचती गाती हुईचल रही थीं। महिला रेजीमेंट व अरिहंत ग्र्रुप की पांचों बटालियन पचरंगा ध्वज लेकर यात्रा में शामिल हुईं।गजरथ में प्रत्येक रथ के आगे श्रद्धालु नाचते-गाते हुए चल रहे थे। कोई चांचड़ खेल रहा था तो कोई डांडिया। सात परिक्रमा पूर्ण करने के बाद श्रीजी को पंडाल में लाया गया जहां प्रभु का अभिषेक व  शांति की गई। इस महामहोत्सव में चन्देरी के अलावा मुंगावली, सेहराई, अशोकनगर, आरोन, ईसागढ़, बामौर कला, खनियाधाना, पचराई, गोलाकोट, पिपरा, अछरौनी, ललितपुर, राजघाट, टीकमगढ, ग्वालियर, भोपल, बैंगलोर, अहमदाबाद गुना, इन्दौर, उज्जैन सहित देश के विभिन्न भागों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

मनाया मोक्ष कल्याण
इससे पहले सुबह मुनिराज ऋषभ कुमार को मोक्ष कल्याणक मनाया गया। मुनिराज निर्वाण को प्राप्त हुए और देवों ने उनका अंतिम संस्कार किया। जगत कल्याण की कामना के साथ शांति धारा की गई। अग्नि संस्कार के बाद रत्न मंजुशा में मुनिराज के नख व केश रखकर उन्हें क्षीरसागर में विसर्जित किया गया।

कैलाश पर्वत पर मनाया निर्वाण कल्याणक
कैलाश पर्वत पर भगवान का निर्वाण कल्याणक मनाया गया। यहां भगवान के अंतिम दर्शन के बाद मोक्ष गमन हुआ। यहां भगवान का महामस्तकाभिषेक व शांति धारा के साथ ही भूत, भविष्य व वर्तमान की चौबीसियों की महापूजा की गई।इससे पहले शनिवार रात में अलवर से आईसुनील जैन एंड पार्टीने मनमोहक व ज्ञानवर्धक नाटिकाएं व नृत्य की प्रस्तुति दी।

यह भावना आराध्य के प्रति हमारे समर्पण को दर्शाती है
महोत्सव को संबोधित करते हुए मुनिश्री अभय सागरजी महाराज ने कहा कि कुंभकार जिस तरह पहले मटके को बनाता है, उसको पकाता है, सजाता है और उसके बाद बाजार में बेचता है। उसी प्रकार देवजनों ने भी हमारी परीक्षा ली।पंच कल्याणक के साथ गजरथ महोत्सव संपन्न हुआ। ये रथ श्रीजी की अतिशयकारी रचनाएं हैं। जिस प्रकार यहां जैन समाज व अन्य समाज के लोगों ने एक-दूसरे के पूरक बनकर जो सहयोग किया वह लंबे समय तक रहेगा। इस प्रकार की भावना हमारे आराध्य के प्रति समर्पण को दर्शाती है।
मनीष गीते
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