प्रसाधन से आ रही थी बदबू, कलेक्टर ने जताई नाराजगी

नवागत कलेक्टर ने कंपोजिट भवन का निरीक्षण किया, शौचालयों में नहीं आ रहा पानी, कार्यालयों में कर्मचारी भी परेशान

अशोकनगर। कंपोजिट भवन में सीढिय़ों के पास से गुजरना मुश्किल हो रहा है। यहां बनाए गए पुरुष व महिला प्रसाधनों में पानी न आने के कारण तेज बदबू बाहर तक आ रही है। जिसके कारण यहां आने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। कार्यालयों के शौचालयों में भी पानी आ रहा है।

गुरूवार को कलेक्टर डा. मंजू शर्मा निरीक्षण के दौरान इस पर जमकर नाराजगी जताई और पानी की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने गुरूवार को सुबह पहली व दूसरी मंजिल पर स्थित कार्यालयों का निरीक्षण किया। रिकार्ड के अव्यवस्थित होने व गंदगी पर व नाराज हुईं और अधिकारियों को साफ-सफाई व रिकार्ड को व्यवस्थित करने के निर्देश दिए।

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निरीक्षण के दौरान अधिकांश कार्यालयों में रिकार्ड अस्त-व्यस्त मिला। साथ ही उपस्थित पंजी को भी देखा और सभी अधिकारियों व कर्मचारियों से समय पर उपस्थित होने के हिदायत दी। उन्होंने कार्यालय अधीक्षक को नियमित रूप से विभागों की उपस्थित पंजी का निरीक्षण करने के निर्देश भी दिए। निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर एके चांदिल व डिप्टी कलेक्टर नीलेश शर्मा उनके साथ उपस्थित रहे।

झूला घर पर भी बिफरीं
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कार्यालय के पास ही एक कमरे में झूला घर बना रखा है। लेकिन इसका दरवाजा कभी नहीं खुलता। कलेक्टर ने जब दरवाजा खुलवाया तो अंदर धूल की परतें जमी हुई मिलीं। इस पर उन्होंने रोष जताते हुए झूला घर का संचालक महिला बाल विकास कक्ष में करने एवं झूला घर के कक्ष को रिकार्ड रूम के लिए आरक्षित करने के निर्देश दिए।

ये भी दिए निर्देश
-जिला अधिकारी बगैर अवकाश स्वीकृत कराए अवकाश पर न जाएं।

-नजूल शाखा प्रभारी रिकार्ड रूम को व्यवस्थित रूप से संधारित करें।

-कम्पोजिट भवन के शासकीय सेवकों को रिकार्ड संधारित करने संबंधी प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाए।

-कंपोजिट भवन की नियमित साफ-सफाई हो और शौचालयों में की व्यवस्था की जाए।

इनका कहना है-
हमें कृषि विभाग में काम था। पास ही प्रसाधन है, जिसके कारण यहां खड़ा होना मुश्किल हो रहा है। अंदर नलों में पानी नहीं आ रहा है। जिसके कारण बदबू फैल गई है।
सतभान्

प्रसाधनों में पानी न होने से बदबू फैल रही है। अंदर जाना तो दूर बाहर तक खड़े नहीं हो पा रहे हैं। इनमें पानी की व्यवस्था होनी चाहिए, दूर-दूर से लोग आते हैं, जरूरत पडऩे पर वे कहां जाएंगे।
राजेन्द्रसिंह, बामौरा।

दीपेश तिवारी
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