यहां सूखे पड़े हैं 200 हैंडपंप और 100 गांवों में पानी के गंभीर हालात

हैंडपंपों को सुधारने और लाइन बढ़ाने पर नहीं विभाग का ध्यान, कलेक्टर ने दिए निर्देश पेयजल पर दिखाएं गंभीरता

 

By: Manoj vishwakarma

Published: 03 Mar 2019, 03:02 AM IST

अशोकनगर. गर्मी का मौसम जहां अभी शुरू भी नहीं हुआ है और मार्च महीने में ही पेयजल की समस्या बढ़ गई है। हालत यह है कि जिले में 200 से अधिक हैण्डपंप सूखे हुए पड़े हैं और 170 हैंडपंपों में लाइन से बहुत नीचे चला गया है। इससे जिले के करीब 100 गांवों में पेयजल के हालात गंभीर हो चुके हैं और ग्रामीणों को घरों पर पानी की व्यवस्था करने डेढ़ से दो किमी दूर खेतों से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है। फिर भी जिम्मेदार विभाग पेयजल के गंभीर होते हालातों पर गंभीरता नहीं दिखा रहा है।

 

जिले में ज्यादातर नल-जल योजनाएं तो बंद पड़ी ही हैं, वहीं खराब पड़े हैण्डपंपों को सुधारने पर भी कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। पीएचई विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 170 हैण्डपंपों में पानी ज्यादा नीचे चला गया है, क्योंकि 150 फिट तक हैण्डपंप में लाइन होती है, लेकिन पानी नहीं निकल रहा है। वहीं 8 0 हैण्डपंप सामान खराब होने की वजह से खराब पड़े हुए हैं। इसके अलावा ग्रामीणों के मुताबिक जिले में 200 से ज्यादा हैण्डपंप ऐसे हैं, जो पूरी तरह से सूख चुके हैं और उन पर कोई गंभीरता नहंी दिखाई जा रही है। शनिवार को कलेक्टर डॉ.मंजू शर्मा ने पेयजल की समीक्षा की, साथ ही पीएचई विभाग को पेयजल के लिए गंभीरता दिखाने के निर्देश दिए।

वहीं खराब पड़े हैण्डपंपों को सुधारने और जलस्तर घटने वाले हैण्डपंपों में पाइप लाइन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशान न होना पड़े। इसके लिए अधिकारी जहां से भी हैण्डपंप खराब होने की सूचना मिले, उन्हें तुरंत सुधरवाएं। साथ ही हैण्डपंपों में सबमर्शिबल डालने के भी निर्देश दिए।

100 नए हैंडपंप खनन कराने की मांग

पीएचई विभाग के अधिकारियों ने बताया कि विभाग के पास 75 विद्युत पंप है, जिनमें से करीब 35 विद्युत पंप हैण्डपंपों में लगाए गए हैं। साथ ही शासन से 100 नए हैण्डपंपों की मांग की है और सिंगल फेस विद्युत पंपों की भी मांग की गई है। विभाग का कहना है कि गर्मी के मौसम में बढ़ती पेयजल समस्या को देखते हुए यह मांग की गई है।

पानी के लिए पहाड़ी चढ़ती हैं महिलाएं

1400 की आबादी वाला मुंगावली विकासखंड का बरखाना गांव। जहां 10 हैण्डपंपों में से दो ही चालू हैं और इनमें भी नाम मात्र का पानी निकलता है। विद्युत पंप खराब होने से महिलाओं को पहाड़ी के नीचे से पानी भरकर लाना पड़ रहा है। इसके लिए सिर पर पानी से भरे बर्तन रखकर रोजाना बड़े-बड़े पत्थरों के बीच से महिलाओं को पहाड़ी चढऩा पड़ती है।

स्कूल में पानी घरों से लेकर जाते हैं बच्चे

करीब डेढ़ हजार की आबादी वाले सोनाखेड़ी गांव में भी मात्र दो ही हैण्डपंप चालू हैं, जिनमें बहुत कम पानी है। वहीं स्कूल का हैण्डपंप भी खरबा पड़ा है। यहां भी खेत के ट्यूबवेल से पानी कुए में भरा जाता है। गांव के रामविलास तिवारी ग्रामीणों को पानी भरवा रहे हैं। बच्चों को घर से पानी लेकर स्कूल जाना पड़ता है और बोतल खाली होने पर फिर से दौड़ लगाकर बच्चे घर पानी भरने के लिए जाते हैं।

दो ग्रामीण ट्यूबवेल से भरवा रहे पानी

यही स्थिति कर्रा गांव की है। जहां पर सिर्फ स्कूल के पास का हैंडपंप ही चालू है और उसमें भी चार से पांच घरों को ही पानी मिल पाता है। गंभीर समस्या होने से महिलाओं को एक से डेढ़ किमी से पानी लाना पड़ रहा था। इससे दो ग्रामीणों ने खेतों के ट्यूबवेल से पाइप लाइन डालकर गांव में पानी भरने की व्यवस्था की है, लेकिन बिजली नहीं होती तो खेत से पानी लाते हैं।

&170 हैण्डपंपों में लाइन से नीचे पानी पहुंच चुका है और 8 0 हैण्डपंप खराब पड़े हैं। जिन्हें सुधरवाया जा रहा है। वहीं जलस्तर घटने वाले हैण्डपंपों में विद्युत पंप लगाए जाएंगे। 100 नए हैण्डपंपों की मांग शासन से की है।

एसके लहारिया, एई पीएचई विभाग अशोकनगर

Manoj vishwakarma Desk
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