64 रिद्धि मंत्रों के साथ की गई रिद्धिधारी मुनिराजों की आराधना

64 रिद्धि मंत्रों के साथ की गई रिद्धिधारी मुनिराजों की आराधना
64 रिद्धि मंत्रों के साथ की गई रिद्धिधारी मुनिराजों की आराधना

Arvind jain | Publish: Oct, 09 2019 04:44:05 PM (IST) Ashoknagar, Ashoknagar, Madhya Pradesh, India


-श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के चौथे दिन नृत्यगायन के साथ हुआ विधान

अशोकनगर. मुनिश्री प्रशांतसागरजी, मुनिश्री निवेगसागरजी, क्षुल्लकश्री देवानंद सागरजी महाराज के ससंघ सानिध्य में ब्रह्मचारी संजीव भैया कटंगी के निर्देशन में सुभाषगंज में आयोजित श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के चौथे दिन 64 रिद्धिधारी मुनिराजों की महाआराधना की गई। इस दौरान इंद्र इंद्राणियों ने नृत्य करते हुए भगवान की आराधना करते हुए पूजन भक्ति में लीन रहे।

 

मुनिश्री निर्वेगसागरजी व ब्रह्मचारी संजीव भैया द्वारा प्रत्येक मंत्र का अर्थ भक्तों को समझाया कि दूसरे के विचारों को जानने की सामर्थ प्राप्त कर लेना रिद्धिधारी मुनिराजों को प्राप्त होती है। उन्होंने दशम पूर्व का ज्ञान प्राप्त किया है। भविष्य में होने वाली घटना का ज्ञान मुनिराज कर लेते है। शरीर के अंग प्रत्य अंग का ज्ञान मुनिराज को हो जाता है। इन रिद्धिधारी मुनियां का चरण वंदन पूजन चल रहा है।


मुनिश्री निर्वेगसागरजी महाराज ने बताया कि मूक माटी महाकाव्य ऐसी रचना आचार्यश्री द्वारा लिखी गई हे जिसमें जीवन के हर कला का वर्णन है। जब सरिता किनारे पड़ी की कुंभ बनाने की यात्रा प्रारंभ हुई तो उसे छानकर मृदु माटी को अलग किया और कंकड़ पत्थर रह गए जिससे कंकड़ पत्थर नाराज हुए कि हमे माटी से अलग क्यों कर दिया। तब बताया गया कि तुम माटी के साथ रह रहे हो लेकिन आपने माटी के गुण धर्म को ग्रहण नहीं किया है। उन्होंने बताया कि संगति के साथ असर नहीं होता जो सत्य होता है उसे जीवन में उतारना पड़ता है।

 

उन्होंने बताया कि पांच पापो से यथा शक्ति बचोगे तो जीवन बहुत अच्छा श्रेष्ठ बनेगा। जिसके पास विनय गुण है लेकिन अन्य कम गुण है तो भी वह श्रेष्ठ है। उन्होंने बताया कि रामचंद्र अपने माता पिता का कितना विनय करते थे कैकई ने वनवास की मांग की और वनवास को निकल गए। इस दौरान मुनिश्री ने बच्चों को संकल्प दिलाया कि कभी भी अपने माता पिता को अलग नहीं करुंगा यदि बूढ़े माता पिता हमारे पास है तो अंतिम समय तक सेवा करुंगा। माता पिता की सेवा करना अभूतपूर्व पुण्य है।

 

मुनिश्री प्रशांतसागरजी महाराज ने बताया कि जिन शासन की प्रभावना श्रावक दान पूजन के माध्यम के माध्यम से और साधू ज्ञान दान के माध्यम स करते है। घर का रथ भी दो पहियों के माध्यम से चलता है। नर में दो मात्राएं होती है और नारी में चार हो जाती है जिस तरह शरीर में नाढ़ी का महत्व है उसी तरह जीवन में नारी का महत्व है।

 

नारियों में जो गुण है वह दया की मूर्ति है, त्याग की मूर्ति है। ऐसा कोई व्रत नहीं है जो पुरुष करते हों। पाप से बचाने वाली नारी होती है। मुनिश्री ने बालिकाओं से कहा कि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए ज्यादा ध्यान देना चाहिए। दो कार्यों से बचना चाहिए एक लिफ्ट और दूसरी गिफ्ट। लिफ्ट से कितना भी जरुरी काम हो मत जाना। गलत काम शुरू हो जाते है और गिफ्ट भी अनेक प्रकार से होती है जन्मदिवस में मोबाइल कपड़े मिल जाने से आपकी दोस्ती के संबंध प्रारंभ हो जाते है। उद्देश्य है कि आज जो घटनाएं घट रही है सुनने में आ रही है उनसे कैसे बचा जाए।


आज होगा बच्चों का संस्कार महोत्सव
आज रात्रि में बच्चों की कैरियर को लेकर ब्रह्मचारी संजीव भैया द्वारा एक संस्कार महोत्सव का शंखनाद किया गया है। यह संस्कार महोत्सव रात्रि साढ़े आठ बजे सुभाषगंज में होगा। जहां ब्रह्मचारी भैया द्वारा एक साल के बच्चों से लेकर ४० साल तक के अविवाहित बच्चों में संस्कार रोपित करेगें। उन्होंने बच्चों को घर से तीन तीन बादाम लेकर व्हाईट या लाईट वस्त्रों में आने के लिए कहा गया है। इस दौरान माता पिता को भी बुलाया गया है।

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