तालिबान ने खोली पाकिस्तान की पोल, बताया-इन धमाकों में की थी मदद

तालिबान ने खोली पाकिस्तान की पोल, बताया-इन धमाकों में की थी मदद

Shweta Singh | Publish: Feb, 11 2019 12:43:45 PM (IST) | Updated: Feb, 11 2019 02:07:24 PM (IST) एशिया

तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि वे अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान के साथ भाई जैसा व्यवहार करेंगे।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान भले ही आतंकियों के साथ अपने रिश्तों को नकारता हो, लेकिन आमतौर उसका आतंकी कनेक्शन साबित हो ही जाता है। इस बार जो खबर आई है उसमें खुद आतंकियों ने पाकिस्तान से अपने खास रिश्तों की ओर इशारा किया। दरअसल तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा है कि वे अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान के साथ भाई जैसा व्यवहार करेंगे।

पाकिस्तान के साथ भाई और पड़ोसी जैसा व्यवहार

उन्होंने अपने बयान में कहा कि अगर कभी उन्हें सत्ता में आने का मौका मिला तो पाकिस्तान के साथ भाई और पड़ोसी जैसा व्यवहार करेंगे। उन्होंने कहा कि वे आपसी सम्मान के आधार पर व्यापक और मजबूत संबंध चाहेंगे। एक पाकिस्तानी अखबार को दिए गए इंटरव्यू में मुजाहिद ने स्वीकार किया कि सोवियत आक्रमण के दौरान अफगान शरणार्थियों के लिए पाकिस्तान सबसे महत्वपूर्ण पनाहगाह बना था। यही नहीं पाक को अफगानिस्तान के लोग अपने 'दूसरे घर'के तौर पर ही देखते हैं।

अमरीका के साथ हुई बातचीत का जिक्र

इस इंटरव्यू में उन्होंने अमरीका के साथ हुई अपनी वार्ता के बारे में भी जिक्र करते हुए कहा कि वाशिंगटन के साथ तालिबान अपनी पहल पर वार्ता कर रहा है। उन्होंने कहा, 'किसी बाहरी देश द्वारा इसमें कोई भूमिका नहीं निभाई जा रही है। यह हमेशा से हमारी पहल और नीति रही है।' मुजाहिद ने कहा कि 2001 में अमरीका के आक्रमण करने से पहले तालिबान ने उससे युद्ध के बजाय बातचीत करने का आग्रह किया था लेकिन उस समय वह वार्ता करने का इच्छुक नहीं था। तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि चल रही वार्ता के बावजूद, समूह अभी तक किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा है जो शत्रुता को फौरन खत्म कर देगा।

महिलाओं के लिए ये प्लान

उन्होंने कहा, 'हम युद्ध छेड़ने के लिए मजबूर हैं। हमारे दुश्मन हम पर हमला कर रहे हैं। इसलिए, हम उनका मुकाबला भी कर रहे हैं।' प्रवक्ता ने अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि तालिबान ने एक 'इस्लामिक समाज' की कल्पना की और अधिकारों का एक ढांचा तैयार करना चाहता था, 'जो इस्लामी सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं करता है और सभी पुरुष और महिला सदस्यों के लिए मान्य है।'

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