अफगानिस्तान के सहयोग और आर्थिक विकास के लिए अमरीका ने दी ये छू़ट, काबुल ने की तारीफ

सोमवार को अफगानिस्तान के स्थाई प्रतिनिधि महमूद सैकल ने सुरक्षा परिषद के सामने ये बयान दिया।

By: Shweta Singh

Published: 18 Dec 2018, 12:35 PM IST

काबुल। अमरीका ने ईरान पर लगाए प्रतिबंधों से भारत द्वारा निर्मित चाबहार बंदरगाह परियोजना को अलग रखा है। उनके इस कदम का अफगानिस्तान ने स्वागत किया है। सोमवार को अफगानिस्तान के स्थाई प्रतिनिधि महमूद सैकल ने सुरक्षा परिषद को बताया, 'हम हमारे रणनीतिक साझेदार अमरीका के सहयोग और लचीलेपन को सराहते हैं कि उसने अफगानिस्तान, ईरान और भारत के साथ काम करने को लेकर इस बंदरगाह को छूट दे दी है।'

ईरान के साथ दुश्मनी के बावजूद चाबहार को छूट

अपने बयान उन्होंने कहा, 'चाबहार बंदरगाह अफगानिस्तान के साथ हिंद महासागर को जोड़ते हुए व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य पहुंच प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण द्वार बना रहेगा।' आपको बता दें कि भारत ईरान में इस बंदरगाह परियोजना और अफगानिस्तान को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए 50 करोड़ डॉलर का निवेश कर रहा है। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के साथ दुश्मनी के बावजूद अमरीका को चाबहार को प्रतिबंधों से छूट देनी पड़ी ताकि भारत, अफगानिस्तान का सहयोग करने में सक्षम रहे।

परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद लगाए थे प्रतिबंध

चाबहार तक पहुंच के बिना अफगानिस्तान को समुद्र मार्ग के लिए पाकिस्तान पर निर्भर होना पड़ता है। पिछले महीने अमरीका ने ईरान के साथ व्यापार प्रतिबंधों पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे। अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल के दौरान ईरान और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थाई देशों के साथ हुए ईरान परमाणु समझौते से ट्रंप के बाहर निकलने के बाद ये प्रतिबंध लगाए हैं।

भारत ने इसी बंदरगाह के जरिए भेजे 11 लाख टन गेहूं

पिछले महीने अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने इस प्रतिबंध से चाबहार बंदरगाह को बाहर रखने का ऐलान करते हुए कहा था कि यह अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण सहयोग और आर्थिक विकास से संबंधित है। ये गतिविधयां अफगानिस्तान के विकास और मानवीय राहत के लिए चल रहे सहयोग के लिए हैं। बता दें कि भारत ने इस बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान को 11 लाख टन गेहूं भेजा था।

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