श्रीलंका: सर्वदलीय बैठक में नहीं निकला कोई नतीजा, राजनीतिक संकट बरकरार

देश में चल रहे राजनीतिक विवाद को दूर करने के लिए रविवार को राष्ट्रपति सिरीसेना ने सर्वदलीय बैठक बुलाई जो बिना किसी नतीजे के समाप्त हुई

By: Siddharth Priyadarshi

Published: 19 Nov 2018, 08:00 AM IST

कोलम्बो। श्रीलंका में जारी राजनीतिक संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। देश में चल रहे राजनीतिक विवाद को दूर करने के लिए रविवार को राष्ट्रपति सिरीसेना ने सर्वदलीय बैठक बुलाई जो बिना किसी नतीजे के समाप्त हुई। विक्रमेसिंघे की संयुक्त राष्ट्रीय पार्टी ने बैठक में राष्ट्रपति के संसद न चलने देने के फैसले का जमकर विरोध किया। भारी हंगामे के चलते बैठक में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रिपला सिरीसेना द्वारा पिछले महीने प्रधान मंत्री रानिल विक्रमेसिंघे को हटाने के विवादास्पद फैसले से पैदा हुए राजनीतिक संकट को समाप्त करने में कोई सफलता नहीं मिली। बता दें कि राष्ट्रपति सिरीसेना ने विक्रमेसिंघे को बर्खास्त कर दिया है और उनके स्थान पर पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे को पीएम बना दिया है।

राजनीतिक संकट गहराया

रविवार को सिरीसेना ने अखिल-पक्षीय बैठक बुलाई जो बिना किसी सफलता के समाप्त हुई। 26 अक्टूबर को पैदा हुए राजनीतिक संकट के बाद यह पहला मौका था जब सिरीसेना, विक्रमासिंघे और राजपक्षे आमने-सामने थे। बैठक में विक्रमेसिंघे ने कहा कि सिरीसेना द्वारा उनकी बर्खास्तगी असंवैधानिक और अवैध थी और वह अभी भी प्रधान मंत्री हैं। एक वरिष्ठ यूएनपी नेता लक्ष्मण किरिला ने वार्ता के बाद कहा कि "हमने अपनी बात दृढ तरीके से रख दी है। हमने राजपक्षे से कहा कि यदि अध्यक्ष के फैसले गलत हैं, तो वे इसे चुनौती देने और इसे पारित करने के लिए संसद के भीतर एक प्रस्ताव ला सकते हैं। इस पर राष्ट्रपति सिरीसेना ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।" जेवीपी या पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट के नेता रविवार की बैठक से दूर रहे। सरिसेना को लिखे एक पत्र में पार्टी ने कहा कि वह संकट के निर्माता हैं इसलिए उन्हें ही इसे खत्म करना चाहिए। पार्टी ने कहा कि बैठक में भाग लेने का कोई कारण नहीं था। खुद संसद के स्पीकर कारू जयसूर्या ने इस बैठक का बहिष्कार किया। उन्होंने बुधवार को घोषणा की थी कि विवादित प्रधानमंत्री राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बाद अब देश में कोई प्रधानमंत्री या सरकार नहीं है।

राजपक्षे के खिलाफ दोबारा पारित हुआ अविश्वास प्रस्ताव

बता दें कि श्रीलंका की संसद में शुक्रवार को अराजकता इस कदर बढ़ गई थी अध्यक्ष जयसूर्या को सदन के अंदर पुलिस बुलाए जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। एक माइक्रोफोन का उपयोग करते हुए अध्यक्ष जयसूर्या ने संसद के तल पर खड़े होकर सदन की कार्रवाई चलाई। दूसरी बार राजपक्षे और उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया गया। शुक्रवार को श्रीलंका की संसद में अभूतपूर्व हिंसा देखी गई क्योंकि संसद सदस्यों ने एक दूसरे पर फर्नीचर और मिर्च पाउडर फेंका और एक दूसरे के खिलाफ जमकर अपशब्दों का प्रयोग किया। सांसदों ने शुक्रवार को राजपक्षे के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के दूसरे वोट को भी मंजूरी दे दी लेकिन सिरीसेना ने इसे स्वीकार करने से इंकार कर दिया और कहा कि संसद न चलाने की उनकी सलाह का पालन नहीं किया गया। इससे पहले सिरीसेना ने संसद को भंग कर दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने संसद को भंग करने के फैसले को उलट दिया और 5 जनवरी को प्रस्तावित चुनावों की तैयारी पर रोक लगा दी थी ।

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