भारत की आपत्ति के बाद चीन के बदले सुर, कहा राजदूत का बयान आधिकारिक नहीं

भारत की आपत्ति के बाद चीन के बदले सुर, कहा राजदूत का बयान आधिकारिक नहीं

| Updated: 20 Jun 2018, 09:35:56 PM (IST) एशिया

भारत के विरोध के बाद चीन त्रिपक्षीय वार्ता के अपने राजदूत के बयान से पीछे हट गया है।

बीजिंगः भारत के विरोध के बाद चीन ने बुधवार को अपने राजनयिक के बयान पर मौन साधे रहा। चीन के राजनयिक ने चीन, भारत और पाकिस्तान के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक प्रस्ताव का सुझाव दिया था। इस विचार को भारत पहले ही खारिज कर चुका है। विदेश मंत्रालय ने चीन के राजनयिक लुओ झाओहुई के सुझाव का न तो समर्थन किया और न इससे दूरी बनाई। इसके बारे में भारत का मानना है कि उन्होंने यह अपनी निजी राय दी।

लुओ के बयान से बनाई दूरी
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, "भारत -पाकिस्तान दोनों चीन के पड़ोसी और दोस्त हैं। हम इस क्षेत्र में बेहतर विकास व स्थिरता के लिए अपने सहयोग को मजबूत करने के लिए पाकिस्तान व भारत सहित सभी पड़ोसियों से संबंध बनाने के इच्छुक हैं।" गेंग ने कहा, "हमें उम्मीद है कि भारत - पाकिस्तान आपसी विश्वास और द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिए अपने संवाद को मजबूत कर सकते हैं। यह क्षेत्र के देशों के हित में है।" यह पूछे जाने पर कि क्या दिल्ली में लुओ की टिप्पणी चीन की आधिकारिक स्थिति थी, तो गेंग ने कहा, "मैंने जो अभी कहा है वह चीन की आधिकारिक स्थिति है।"

चीन दूतावास ने ये दिया था बयान
दिल्ली में सोमवार को चीन दूतावास द्वारा आयोजित एक सेमिनार में लुओ ने कहा था कि भारत, चीन और पाकिस्तान को एक संयुक्त बातचीत में शामिल होना चाहिए। उन्होंने दिल्ली में सामरिक समुदाय के चीन पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, "एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) के तीन स्तंभों में से सुरक्षा सहयोग भी एक स्तंभ है। कुछ भारतीय मित्रों ने भारत, चीन और पाकिस्तान में एससीओ से इतर त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा था कि ऐसा हो सकता है, क्योंकि यदि चीन, रूस और मंगोलिया त्रिपक्षीय शिखर सम्मेलन कर सकते हैं तो भारत, चीन और पाकिस्तान क्यों नहीं।" उन्होंने संवाददाताओं से बाद में कहा, "यह अभी नहीं, लेकिन भविष्य में हो सकता है, यह एक अच्छा विचार है। इससे द्विपक्षीय मुद्दों को हल करने और शांति बनाए रखने में मदद मिलेगी।"

भारत ने चीन दूतावास के बयान को किया था खारिज
भारत ने इस प्रस्ताव को फौरन खारिज कर दिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा था कि यह सुझाव लुओ की निजी राय हो सकती है। विदेश मामलों के मंत्रालय ने कहा, "हमने इस मामले में चीनी राजदूत द्वारा की गई टिप्पणियों पर रिपोर्ट देखी है। हमें चीनी सरकार से ऐसा कोई सुझाव नहीं मिला है। हम इस बयान को राजदूत की निजी राय मानते हैं।" भारत का कहना है कि इसकी पाकिस्तान के साथ विवाद पूरी तरह से द्विपक्षीय मामला है और इस मामले में किसी तीसरे देश के शामिल होने की कोई गुंजाइश नहीं है।

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