अमरीका को चीन की सलाह, टकराव का समर्थन खतरनाक, जारी रहेंगे मतभेद

अमरीका को चीन की सलाह, टकराव का समर्थन खतरनाक, जारी रहेंगे मतभेद

Mohit sharma | Publish: Feb, 15 2018 06:57:02 PM (IST) एशिया

चीनी राजदूत ने कहा कि किसी भी टकराव की रणनीति (चीन के खिलाफ) को समर्थन देना खतरनाक होगा।

नई दिल्ली। अमरीका के लिए चीनी राजदूत कुई तियानकाई ने कहा कि टकराव का समर्थन करना खतरनाक है और आपसी संवाद से कोई समाधान निकलेगा। एक समाचार एजेंसी ने मंगलवार को चीनी दूतावास में आयोजित वंसत महोत्सव स्वागत समारोह में कुई द्वारा दिए बयान के हवाले से बताया कि निश्चित रूप से इस बात से डरना पागलपन है कि चीन जो अपने विकास के पथ का अनुकरण करता है, वह अमरीका के लिए टकराव साबित होगा।

बातचीत से निकलेगा रास्ता

चीनी राजदूत ने कहा कि किसी भी टकराव की रणनीति (चीन के खिलाफ) को समर्थन देना खतरनाक होगा। कुई ने कहा कि चीन-अमरीका संबंध को समग्र रूप से सहयोग के रूप में पेश किया जाना चाहिए। दोस्ताना प्रतियोगिता..लेकिन टकराव नहीं। उन्होंने कहा कि हमारे बीच मतभेद जारी रहेगा, लेकिन हमारे साझा हित कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। सहयोग की जरूरत किसी भी मतभेद से ज्यादा जरूरी होगा। आपसी वार्ता हमें समाधान की ओर ले जाएंगे। समारोह में शामिल हुई वेस्ट वर्जीनिया की अमरीकी सीनेटर शैली मूरे कैपिटो ने कहा कि हमारा देश वास्तव में निवेश को लेकर उत्साहित है, जो चीन की ओर से होने जा रहा है और हमें लगता है कि यह परिदृश्य बदल देने वाला होगा। वह 83.7 अरब डॉलर निवेश के संदर्भ में बोल रही थीं, जिसे चीन ने ट्रंप के 2017 के देश दौरे के दौरान करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

 


फिर उखड़ा चीन

उधर, गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अरुणाचल प्रदेश के दौरे से चीन को मिर्ची लगी है और उसने पीएम मोदी के दौरा पर कड़ा ऐतराज जताया है। आपको बता दें कि चीन अरुणाचल के कुछ इलाकों को दक्षिणी तिब्बत का क्षेत्र बताता है। पीएम मोदी के दौरे के बाद चीनी विदेश मंत्रालय की तरफ से एक बयान जारी किया गया है, जिसमें चीन ने अरुणाचल प्रदेश की तीन इलाकों को अपना बताया है। चीन विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए बयान में कहा गया है कि वो पीएम मोदी के दौरे को लेकर कूटनीतिक विरोध दर्ज कराएगा। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता गेंग शुआंग ने कहा है, 'चीन का रूख भारत और चीन की सीमा को लेकर हमेशा ही स्‍पष्‍ट रहा है। चीनी सरकार ने कभी अरुणाचल प्रदेश को मान्‍यता नहीं दी है और ऐसे में 'विवादित क्षेत्र' में भारतीय नेता के जाने का चीन विरोध करता है।

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