भारत-जापान की दोस्ती से चीन घबराया, बोला-सफाई दो

Dharmendra Chouhan

Publish: Sep, 16 2017 12:48:53 (IST)

Asia
  भारत-जापान की दोस्ती से चीन घबराया, बोला-सफाई दो

भारत-जापान के संयुक्त बयान पर चीन का कहना है कि विवादित मुद्दों का निराकरण संयुक्त राष्ट्र में होना चाहिए।

बीजिंग. पिछले दिनों बुलेट ट्रेन के शिलान्यास के लिए भारत यात्रा पर आए जापान के पीएम शिंजो आबे पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी और जापान के पीएम शिंजो आबे ने जो संयुक्त बयान जारी किया था, उसमें हिन्द-प्रशांत क्षेत्र और दक्षिणी चीन सागर का जिक्र है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुअ चुनयिंग ने कहा कि इन विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के तहत होना चाहिए। विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक संवाददाता ने पूछा कि था भारत और जापान के पीएम के संयुक्त बयान में चीन से जुड़े विवादों का जिक्र है। उस पर चीन का क्या रुख है। इस सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, हम लोगों ने भी जापानी प्रधानमंत्री के भारत दौरे को गंभीरता से लिया है। दोनों पीएम ने जो संयुक्त बयान दिया है, उसमें हमारा यानी चीन का कोई जिक्र नहीं है।

मीडिया ने बढ़ाकर पेश किया मामला
चुनयिंग ने कहा कि इस मामले में भारतीय और जापानी मीडिया ने माहौल बनाने की कोशिश की कि संयुक्त बयान में चीन का जिक्र किया जाएगा। यह मीडिया की ओर से अटकलों पर आधारित चीजें थी जिन्हें बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया। इस मामले में भारत और जापान से ही पूछा जाना चाहिए या उन्हें खुद आगे आकर सफाई देना चाहिए।

उत्तर पूर्व के राज्यों में निवेश पर बौखलाया
चीन ने कहा है कि वह भारत के उत्तर-पूर्व के राज्यों में जापान समेत किसी भी विदेशी निवेश का विरोधी है। उसने कहा है कि वो सीमा विवाद को लेकर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को स्वीकार नहीं करेगा। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की भारत यात्रा के दौरान पूर्वोत्तर के राज्यों में निवेश करने में तेजी लाने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा पूर्वोत्तर के विवादित क्षेत्र में किसी भी तरह के निवेश का विरोध करता है। चुनयिंग ने कहा आपने ऐक्ट ईस्ट नीति का भी जिक्र किया। आपको स्पष्ट होना चाहिए कि भारत और चीन सीमा अभी पूरी तरह निर्धारित नहीं है। दोनों के बीच पूर्वी हिस्से में सीमा को लेकर मतभेद है। हम बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रहे हैं जो दोनों पक्षों को मंजूर हो। ऐसी स्थिति में विभिन्न पक्षों को इन पहलुओं का सम्मान करना चाहिए और विवाद को हल करने की हमारी कोशिशों में किसी भी तीसरे पक्ष को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

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