भारत-नेपाल के बीच इन तीन सीमा क्षेत्रों को लेकर है विवाद, क्या है इसकी वजह?

HIGHLIGHTS

  • लिपुलेख ( Lipulekh ) और कालापानी ( Kalapani ) पर पहले से ही दोनों देशों के बीच विवाद की बातें सामने आती रही है, लेकिन अब नेपाल ने लिम्पियाधुरा को भी अपना बता दिया है
  • नेपाल ने अपना नया राजनैतिक नक्शा ( Nepal Political maps ) जारी किया है, जिसमें इन तीनों जगहों को अपना हिस्सा बताया है

By: Anil Kumar

Published: 20 May 2020, 07:52 PM IST

नई दिल्ली। भारत और नेपाल के बीच एक बार फिर से सीमा विवाद उभर कर सामने आ गया है। दरअसल, बीते सोमवार को नेपाल ने एक नया राजनैतिक नक्शा जारी किया, जिसमें लिपुलेख समेत तीन भारतीय क्षेत्रों को अपना हिस्सा बताया। साथ ही नेपाल ने इन तीन इलाकों में करीब 500 चौकियां बनाकर सैनिक तैनात करना भी शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, नेपाली मीड़िया बहुत ही आक्रामक तरीके से इस विवाद पर खबरें छाप रहा है। इसके बाद से दोनों देशों में सियासी सरगर्मी तेज हो गई है।

आपको बता दें कि दोनों देशों के बीच पहले केवल दो जगहों को लेकर विवाद चल रहा था, लेकिन नेपाल ने अपने नए नक्शे में तीन जगहों को अपना बताया है। लिपुलेख ( Lipulekh Pass ) और कालापानी पर पहले से ही दोनों देशों के बीच विवाद की बातें सामने आती रही है, लेकिन अब नेपाल ने लिम्पियाधुरा को भी अपना बता दिया है।

सामरिक लिहाज से काफी अहम है लिपुलेख

आपको बता दें कि रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने बीते दिनों लिपुलेख तक 80 किलोमीटर लंबा एक सड़क मार्ग का उद्घघाटन किया था, जिसके बाद से दोनों देशों के बीच तल्खी देखने को मिला था। नेपाल में भारतीय दूतावास के सामने जमकर प्रदर्शन भी किया गया था। इस क्षेत्र का प्राचीन काल से ही काफी महत्व रहा है। कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्री इसी के रास्ते यात्रा पर जाते हैं।

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लिपुलेख क्षेत्र सामिरक तौर पर काफी अहम है। यह हिमालय का एक पहाड़ी दर्रा है जो 5,334 मीटर (17,500 फीट) की ऊंचाई पर है। यह इलाका नेपाल के साथ चीनी सीमा को भी छूता है। ऐसे में सामरिक लिहाज से भारत के लिए बहुत खास और जरूरी है। नेपाल कई सालों से यह दावा करता रहा है कि यह क्षेत्र उनका है। इसके लिए वह 1816 की सुगौली संधि का भी हवाला देता है। बता दें कि सुगौली संधि भारत के साथ उसकी पश्चिमी सीमा का निर्धारण करती है।

लिम्पियाधुरा इलाका

यह इलाका उत्तराखंड राज्य में है, जो कि नेपाल की सीमा को छूता है। इस क्षेत्र में महाकाली नदी का उदगम स्थल है। नेपाल का मानना है कि महाकाली नदी का उदगम लिपुलेख के पास लिम्पियाधुरा से है जो कि दक्षिण पश्चिम की तरफ बहती है। जबकि भारत मानता है कि महाकाली नदी कालापानी नदी से निकलती है और दक्षिण-पूर्व की तरफ बहती है।

1816 में सीमा विवाद को लेकर नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच सुगौली संधि हुई थी। इसके अनुसार, महाकाली नदी भारत और नेपाल दोनों की ही सीमाओं को छूती है। इस संधि में ये बताया गया है कि पूर्व की तरफ नेपाल को और पश्चिम की तरफ भारत को यह नदी छूती है।

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लेकिन अब बीते दिन नेपाल की कैबिनेट में जिस प्रस्ताव को पास किया गया उसमें यह दावा किया गया कि महाकाली (शारदा) नदी का स्रोत दरअसल लिम्पियाधुरा ही है जो फ़िलहाल भारत के उत्तराखंड का हिस्सा है, लेकिन वास्तव में वह उसका हिस्सा है।

कालापानी को लेकर विवाद

कालापानी को लेकर भी भारत और नेपाल में विवाद चल रहा है। कालापानी उत्तराखंड के पिथौड़ागढ़ ज़िले में 35 वर्ग किलोमीटर ज़मीन है। इस क्षेत्र में इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस के जवान तैनात हैं। यह क्षेत्र सामरिक तौर पर काफी अहम है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब 1962 में भारत और चीन का युद्ध हुआ था, तब चीन की सेनाएं तमाम कोशिश के बाद यहां तक पहुंच नहीं पाईं थीं।

काली नदी का उद्गम स्थल कालापानी है। भारत ने 1816 में ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल के बीच हुई सुगौली संधि का हवाला देते हुए अपने नए नक्शे में इस नदी को शामिल किया है। हालांकि नेपाल का दावा है कि 1961 में भारत-चीन के बीच हुए युद्ध के से पहले नेपाल में जनगणना हुई थी, तब भारत ने कोई आपत्ति दर्ज नहीं काराई थी।

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