चीन के बढ़ते वर्चस्व को यूं रोंकेंगे भारत और जापान

-टू प्लस टू (2+2) के नाम से हुई इस वार्ता में पहली बार एक साथ सुरक्षा नीति और रक्षा सहयोग (defence policy) पर विमर्श हुआ
-नए समझौते के तहत दोनों देश सुरक्षा बलों का आदान-प्रदान कर सकेंगे

By: pushpesh

Updated: 08 Dec 2019, 09:00 PM IST

जयपुर.

समुद्र में चीन के बढ़ते दबदबे के बीच भारत और चीन को अपनी समुद्री मार्गों को सुरक्षित करने के लिए बड़े प्रयास करने होंगे। पिछले सप्ताह भारत और जापान के विदेश और रक्षामंत्रियों की वार्ता में सुरक्षा नीति और रक्षा सहयोग पर चर्चा हुई। टू प्लस टू के नाम से हुई इस वार्ता में पहली बार एक साथ सुरक्षा नीति और रक्षा सहयोग पर विमर्श हुआ। इसमें जापान-अमरीका के नेतृत्व में मुक्त और खुले इंडो पैसिफिक विचार पर विशेष बल दिया गया।

अमरीका और ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत सातवां देश बन गया, जिसने जापान के साथ टू प्लस टू वार्ता की। भारत ने पिछले वर्ष अमरीका से भी इसी तर्ज पर वार्ता की थी। इसमें समझौते पर भी सहमति हुई है, जिसमें दोनों देश सुरक्षा बलों का आदान-प्रदान कर सकेंगे। यह भी तय किया गया कि दोनों देश पहली बार जापान में संयुक्त रूप से फाइटर जेट के प्रशिक्षण अभियान में हिस्सा लेंगे।

सैन्य उद्देश्यों के लिए चीन दूसरे देशों को साध रहा
चीन, हिंद महासागर के आसपास देशों में बंदरगाह विकास के नाम पर अपनी आर्थिक शक्ति के बल पर दक्षिण चीन सागर को एक सैन्य ठिकाना बनाने का प्रयास कर रहा है। इस बात को लेकर चिंता जताई गई कि चीन अपनी समुद्री रणनीति के तहत सैन्य उद्देश्यों के लिए इन बंदरगाहों का इस्तेमाल कर सकता है। जापान और अमरीका के साथ भारत का मजबूत सहयोग भी जाहिर तौर पर चीन को नियंत्रण में रखना है। चीन की विस्तारवादी सोच पर काबू करने के लिए बहुपक्षीय सहयोग प्रणाली को मजबूत करना जरूरी है।

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