चाबहार प्रोजेक्टर में शामिल होंगे पाकिस्तान और चीन, ईरान ने दिया न्यौता

चाबहार प्रोजेक्टर में शामिल होंगे पाकिस्तान और चीन, ईरान ने दिया न्यौता

Navyavesh Navrahi | Publish: Mar, 13 2018 09:43:23 PM (IST) एशिया

दक्षिण-पूर्व ईरान में भारत की ओर से चाबहार योजना के तहत बंदरगाह विकसित की जा रही है। पिछले साल इसके पहले फेज का उद्घाटन किया गया था।

ईरान समेत अन्य मध्य एशियाई देशों से व्यापार करने और अफगानिस्तान तक माल पहुंचाने के लिए भारत चाबहार बंदरगाह के रूप में वैकल्पिक मार्ग बनाने में जुटा है। चाबहार परियोजना के तहत यहां ऐसी बंदरगाह तैयार की जा रही है, जिसके माध्यम से भारत अपना सामान पाकिस्तान को बायपास करके अफगानिस्तान या अन्य मध्य एशियाई देशों में पहुंचा सकता है। किंतु भारत को झटका देते हुए ईरान ने इस परियोजना में शामिल होने के लिए पाकिस्तान और चीन को भी न्यौता दे डाला है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में इस बात का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार- ईरान के विदेश मंत्री जावेद जारिफ ने पाकिस्तान को चाबहार बंदरगाह परियोजना में शामिल होने की पेशकश की है।

भारत को दरकिनार करते हुए उन्होंने पाकिस्तान से कहा कि वे अपनी ग्वादर बंदरगाह को चाबहार प्रोजेक्ट के साथ जोड़े। बता दें, जारिफ तीन दिवसीय यात्रा पर पाकिसतान में हैं। इस्लामाबाद के सामरिक अध्ययन संस्थान में आयोजित एक समारोह में उन्होंने चीन को भी इस योजना से जुड़ने का आमंत्रण दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा था- 'हमने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) में शामिल होने की बात कही है। इसके साथ ही हमने पाकिस्तान और चीन को भी चाबहार में शामिल होने की पेशकश की है।'

जानकार चाबहार परियोजना को भारत और ईरान के बीच अच्छे संबंधों की शुरुआत के रूप में देख रहे थे। इस बंदरगाह के निर्माण को भारत की उपलब्धि माना जा रहा था। भारत बिना पाकिस्तान से गुजरे इसके माध्यम से अफगानिस्तान और मध्य-एशिया के अन्य देशों तक अपनी आवाजाई बढ़ा सकता था।
कुछ मीडिया रिपोर्स में कहा गया है कि जरीफ इस बंदरगाह के निर्माण में भारत के शामिल होने को लेकर पाकिस्तान की चिंताओं को दूर करना चाहते थे।

बता दें, दक्षिण-पूर्व ईरान में भारत की ओर से विकसित की जा रही चाबहार बंदरगाह के पहले फेज का उद्घाटन पिछले साल दिसंबर में ही किया गया था। इससे ईरान और अफगानिस्तान के बीच नया स्ट्रैटिजिक ट्रांजिट रूट खोल दिया गया, जिसमें पाकिस्तान को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया। उम्मीद थी कि इससे भारतीय सामान की आपूर्ति में कम खर्च आएगा और भारत, अफगानिस्तान और ईरान के बीच व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। जबकि इससे पहले पाकिस्तान इन दोनों देशों के साथ व्यापार के लिए भारत के रास्ते में रोड़े अटकाता रहा है।

ऐसे में माना जा रहा है कि ईरान के विदेशमंत्री की यह मंशा भारत के लिए सकारात्मक नहीं है। ईरान की न्यूज एजेंसी मेहर न्यूज के अनुसार- जरीफ ने कहा है कि ईरान और भारत के संबंध पाकिस्तान को नकारात्मक रूप से प्रभावित नहीं करेंगे।

 

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