...तो डूब जाएंगे दुनिया के कई शहर

...तो डूब जाएंगे दुनिया के कई शहर
...तो डूब जाएंगे दुनिया के कई शहर

Pushpesh Sharma | Publish: Sep, 21 2019 08:05:03 PM (IST) एशिया

-जलवायु परिवर्तन (climate change) के कारण जहां धरती का तापमान (temperature) बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर समुद्र का जलस्तर (ocean water level) भी बढ़ रहा है। इसका असर ये हो रहा है कि तटीय शहर विनाशकारी बाढ़ (flood) के खतरों से घिरे हुए हैं और इन्हें बचाने के लिए रचनात्मक समाधान खोजे जा रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन के कारण जहां धरती का तापमान बढ़ रहा है, तो दूसरी ओर समुद्र का जलस्तर भी बढ़ रहा है। इसका असर ये हो रहा है कि तटीय शहर विनाशकारी बाढ़ के खतरों से घिरे हुए हैं और इन्हें बचाने के लिए रचनात्मक समाधान खोजे जा रहे हैं। समुद्र का स्तर बढऩे से तटों का कटाव हो रहा है, जिससे कुछ शहर धीरे-धीरे डूब रहे हैं। तो कुछ अत्यधिक भूजल दोहन के कारण डूब के कगार पर हैं। दुनिया के ऐसे ही शहरों के बारे में जानते हैं, जो डूबने की कगार पर हैं।

जकार्ता, इंडोनेशिया : अत्यधिक भूजल दोहन के कारण जकार्ता हर वर्ष 6.7 इंच की दर से डूब रहा है। यही गति रही तो 2050 तक शहर समुद्र में डूब जाएगा। इंडोनेशिया सरकार ने एक करोड़ आबादी को बाढ़ से बचाने के लिए मौजूदा स्थान से 160 किलोमीटर दूर राजधानी स्थानांतरित करने की योजना को मंजूरी दी है। यह प्रॉजेक्ट 10 वर्ष में पूरा होगा और 33 अरब डॉलर की लागत आएगी।

लागोस, नाइजीरिया : समुद्र के बढ़ते स्तर ने लागोस को खतरे में डाल दिया है। एक अनुमान के मुताबिक यदि समुद्र का जलस्तर 8 इंच बढ़ता है तो यहां कि साढ़े 7 लाख की आबादी बेघर हो जाएगी। सरकार इसके विकल्प के रूप में ईको अटलांटिक द्वीप विकसित करने पर विचार कर रही है।

ह्यूस्टन, टेक्सास : अत्यधिक जल दोहन के कारण ह्यूस्टन के ज्यादातर हिस्से प्रतिवर्ष 2 इंच की दर से डूब रहे हैं। यही गति रही तो हार्वे तूफान जैसी आपदाएं बड़ी आबादी को चपेट में ले लेंगी। हार्वे 1.35 लाख घर तबाह हुए थे।

वेनिस, इटली : वेनिस हर वर्ष 0.08 इंच की दर से डूब रहा है। इटली ने 2003 में बाढ़ अवरोध के लिए 78 फाटकों को मिलाकर तीन नाकों का निर्माण शुरू किया है, जो 2011 में पूरा होना था, लेकिन 2022 तक भी पूर होने की संभावना नहीं है। 2018 में आए कई तूफानों के कारण 6.5 अरब डॉलर की परियोजनाएं अधूरी हैं।

ढाका, बांग्लादेश : बांग्लादेश दुनिया के कुल कार्बन उत्सर्जन का 0.3 फीसदी हिस्सेदार है, जो जलवायु परिवर्तन का बड़ा कारक है। लेकिन समुद्र का बढ़ता जलस्तर सबसे बड़ी चिंता है। 2050 तक देश का 17 फीसदी हिस्सा समुद्री बाढ़ की चपेट में आ सकता है, जिससे लगभग 1.8 करोड़ लोगों को विस्थापित होना पड़ सकता है।

वर्जीनिया बीच, वर्जीनिया : वर्जीनिया बीच के पूर्वी तट पर समुद्र के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई, जो बढ़ते जलस्तर और डूबती भूमि के फासले को कम कर रही है। नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन का अनुमान है कि सदी के अंत तक वर्जीनिया बीच समुद्र तल से 12 फीट तक ऊपर उठ सकता है।

बैंकाक, थाइलैंड : बैंकाक हर वर्ष एक सेमी की दर से समुद्र में डूब रहा है। यही रफ्तार रही तो 2030 तक इसका काफी हिस्सा डूब सकता है। बाढ़ के खतरे को देखते हुए एक कंपनी ने 11 एकड़ में पार्क बनाया है, जो दस लाख गैलन तक वर्षा जल को रोक सकता है। इसका नाम चुलालोंगकोर्न शताब्दी पार्क रखा गया है।

यहां भी आफत : अमरीका में लुइसियाना प्रांत का न्यू ऑरलियन्स के कुछ हिस्से हर वर्ष दो इंच डूब रहे हैं। नीदरलैंड का रॉटरडैम बड़ा पार्क बनाया जा रहा है, जो बाढ़ जैसी आपदा से बचाएगा। मिस्र के अलेक्जेंड्रिया के निकट तट गायब हो रहे हैं। इसके अलावा भी कई देश इस आपदा के करीब हैं।

भारत में भी खतरा : संयुक्त राष्ट्र की पर्यावरण रिपोर्ट के मुताबिक 2050 तक मुंबई और कोलकाता सहित भारत के तटीय शहरों की 4 करोड़ आबादी समुद्र का जलस्तर बढऩे के कारण प्रभावित हो सकती है।

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