दुनियाभर में विवादित नक्शे को फैलाएगा नेपाल, Google को भेजने की तैयारी कर रहा

Highlights

  • कालापी, लिंपियधुरा और लिपुलेख को अपने नए नक्शे में शामिल कर नेपाल (Nepal) ने विवाद खड़ा किया।
  • भारत सरकार ने कहा कि संबंधों को खराब करने की जिम्मेदारी खुद नेपाल की है।

By: Mohit Saxena

Updated: 02 Aug 2020, 06:37 PM IST

काठमांडू। भारत से नेपाल (Nepal) अपने सदियों पुराने रिश्तों को बिगाड़ने पर तुल गया है। वहां की सरकार लगातार ऐसे कदम उठा रही है जो भारत के लिए सहनीय नहीं है। दरअसल, कालापी, लिंपियधुरा और लिपुलेख को अपने नए नक्शे में शामिल कर नेपाल अब इस नक्शे (Map) को संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और गूगल को भेजने की तैयारी कर रहा है।

नेपाल के भूमि मामलों को देखने वाले मंत्री पद्मा अरयल ने इस बात की पुष्टि की। गौरतलब है कि भारत काफी लंबे समय से इन इलाकों को अपना मानता आया है। बीते 13 जून को नेपाल की संसद ने कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख को नए नक्शे के तहत शामिल करने वाले एक संशोधन विधेयक को परित किया है।

इस मामले को लेकर दोनों देशों में तल्खी सामने आई है। नेपाल के नक्शे वाले इस कदम को भारत ने पूरी तरह से मानने से इनकार किया है। भारत सरकार ने कहा कि संबंधों को खराब करने का जिम्मेदार खुद नेपाल है। अब बातचीत के लिए उपयुक्त माहौल बनाने की कोशिश उसी की बनती हैै।

गौरतलब है कि भारत ने नवंबर 2019 में एक नया नक्शा सामने रखा था। इसके करीब छह माह बाद नेपाल ने मई में देश का संशोधित नक्श पेश किया। इस पेश कर उसने कई इलाकों पर अपना दावा ठोका। नेपाली संसद के ऊपरी सदन यानी नेशनल असेंबली ने संविधान संशोधित बिल को पारित कर दिया था। इसके साथ ही राष्ट्रीय प्रतीक में नक्शे को बदलने का रास्ता साफ हो गया।

दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचुला से जोड़ने वाली अहम 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया। सड़क के उद्घाटन को लेकर नेपाल ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। ये सड़क नेपाली क्षेत्र से होकर गुजरती है। भारत ने नेपाल के दावों को खारिज कर दिया था। उसने इसे अपना भूभाग बताया।

Mohit Saxena
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned