300 साल पुराने तीर्थ स्थल का दर्शन करने पाकिस्तान पहुंचे भारतीय हिन्दू, वाघा बार्डर पर हुआ स्वागत

300 साल पुराने तीर्थ स्थल का दर्शन करने पाकिस्तान पहुंचे भारतीय हिन्दू, वाघा बार्डर पर हुआ स्वागत

Siddharth Priyadarshi | Publish: Dec, 06 2018 11:39:22 AM (IST) एशिया

इस हैरान करने वाले घटनाक्रम में सैकड़ों हिन्दू पाकिस्तान पहुंच गए हैं।

लाहौर। 300 साल पुराने हिन्दू तीर्थस्थल का दर्शन करने 200 भारतीय नागरिक पाकिस्तान पहुंच गए हैं। हिन्दू धर्म में शिव के अवतार कहे जाने वाले शदाराम साहिब की 310वीं जयंती पर आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए हिंदू तीर्थयात्री बुधवार को पाकिस्तान पहुंचे। वाघा सीमा पर इन तीर्थयात्रियों का स्वागत किया गया। यहां से ये तीर्थ यात्री सिंध प्रांत के मीरपुर मथीलू पहुंचे जहां पर शदाराम साहिब की 310वीं जयंती पर आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं।

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पाकिस्तान पहुंचे हिन्दू तीर्थयात्री

ईटीपीबी के अध्यक्ष तारीक वजीर ने भारत से गए तीर्थयात्रियों का वाघा सरहद पर स्वागत किया। नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग ने बताया कि उसने 220 भारतीय को सिंध प्रांत जाने के लिए वीजा जारी किया है। बताया जा रहा है कि बुधवार को 206 हिंदू लाहौर पहुंचे। आशा जताई जा रही है कि सिंध के सुक्कुर में 5 से 16 दिसंबर के बीच आयोजित होने वाले उत्सव में हिस्सा लेने के लिए पिछले साल की तुलना में इस बार अधिक भारतीय हिंदू पाकिस्तान पहुंचेंगे। पाकिस्तानी आधिकारियों ने कहा है कि यात्रियों को ले जाने और उनकी सुरक्षा के सभी इंतजाम कर लिए गए हैं। यात्री लाहौर से मीरपुर मथीलू के लिए ट्रेन से रवाना हो गए हैं, जहां गुरुवार को मुख्य कार्यक्रम होगा।

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करतारपुर के बाद दूसरा बड़ा आयोजन

नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग ने एक विज्ञप्ति के जरिए बताया कि उसने सुक्कुर में 5 से 16 दिसंबर तक शिव अवतार कहे जाने वाले संत शदाराम साहिब की जयंती के लिए पिछली साल से अधिक भारतीय हिंदू तीर्थयात्रियों को वीजा दिया है। उच्चायोग ने कहा कि ये वीजा धर्मिक तीर्थाटन पर जाने वाले लोगों में आपसी संपर्क को बढ़ाने के लिए किया जाता है। भारतीय यात्री युद्धिष्ठर लाल नामक एक नागरिक के नेतृत्व में गए हैं। हाल में ही पाकिस्तान सरकार द्वारा करतारपुर में सिखों के लिए एक बड़ा आयोजन किया गया था। आपकी जानकारी के लिए बड़ा दें कि दें सुक्कुर में 300 साल पुराना यह मंदिर हिंदू समुदाय के लिए पवित्र स्थल है। मंदिर की नींव 1786 में संत शदाराम साहिब ने रखी थी। इन्हें शिव का अवतार माना जाता है।

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