भारत के अंतरिक्ष में कारनामे से घबराए पाकिस्तान और चीन, कहा- मिल​ जुलकर काम करें

भारत के अंतरिक्ष में कारनामे से घबराए पाकिस्तान और चीन, कहा- मिल​ जुलकर काम करें

Mohit Saxena | Publish: Mar, 28 2019 05:13:56 AM (IST) एशिया

- ए-सैट ने तीन मिनट में 300 किलोमीटर दूर अपना निशाना बनाया
- एंटी सेटेलाइट मिसाइल का नाम दिया गया
- अमरीका,रूस और चीन के साथ भारत के पास भी यह तकनीक

नई दिल्ली। भारत के एक एंटी-सेटेलाइट मिसाइल (ए-सैट) ने बुधवार को स्पेस में एक दूसरी सेटेलाइट को मार गिराया। ए-सैट ने तीन मिनट में 300 किलोमीटर दूर अपना निशाना बनाया। इसी के साथ भारत उन देशों में शामिल हो गया जिनके पास ऐसी क्षमता है, जो किसी भी देश की सेटेलाइट को ध्वस्त करके उसके संचार माध्यम को तबाह कर सकते हैं। अमरीका, रूस और चीन के साथ भारत के पास भी अब यह क्षमता आ गई है। भारत के ए-सैट के सफल परीक्षण पर पाकिस्तान और चीन ने इशारों में कहा है कि स्पेस में ऐसा कोई काम नहीं होना चाहिए जिससे वहां सैन्य क्षमता बढ़ाने की होड़ शुरू हो।

भारतीय वैज्ञानिकों ने ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया

गौरतलब है कि भारत के वैज्ञानिकों ने बुधवार को एक ऐतिहासिक कारनामा दिखाते हुए पृथ्वी की निचली कक्षा में 300 किलीमीटर दूर एक सेटेलाइट को मार गिराया। इसी के साथ भारत उपग्रह-भेदी क्षमता हासिल कर चौथा अंतरिक्ष महाशक्ति बन गया। भारत ने जिस हथियार से मारा गया उसे ए-सैट यानी एंटी सेटेलाइट मिसाइल का नाम दिया गया। इस उपलब्धि पर भारत में जहां खुशी की लहर है तो पाकिस्तान ने इशारे में भारत पर हमला बोला है। पाकिस्तान ने कहा है कि वह स्पेस में हथियारों की होड़ का बिल्कुल हिमायती नहीं और अंतरिक्ष का उपयोग इंसानियत की भलाई के लिए होना चाहिए न कि सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलजुल कर काम करेंगे

पाकिस्तानी सरकार के प्रवक्ता ने एक बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान बाहरी स्पेस में हथियारों की रोकथाम का एक प्रबल समर्थक है। अंतरिक्ष इंसानियत की साझी विरासत है और हर देश की जिम्मेदारी है कि वह उन कार्यों से बचे जिससे अंतरिक्ष में सेना का दबदबा बढ़े। उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानूनों को ध्यान में रखते हुए यह तय करने की जरूरत है कि कोई भी देश सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए स्पेस टेक्नोलॉजी का उपयोग ऐसे न करे जिससे किसी की शांति भंग हो। बयान में कहा गया है कि वह आशा करते हैं कि जिन देशों ने पूर्व में की गई ऐसी कार्रवाई की आलोचना की है, वे स्पेस से जुड़े सैन्य खतरों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिलजुल कर काम करेंगे। भारत की इस उपलब्धि की जानकारी बुधवार को खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में दी. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत उपग्रह-भेदी क्षमता हासिल कर चौथा अंतरिक्ष महाशक्ति बन गया है।

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