भारत के सीमा के करीब बम-गोले बरसा रहा है पाकिस्तान, आखिर क्या करने का है इरादा?

HIGHLIGHTS

  • पाकिस्तानी सेना संघर्ष की तैयारी के लिए सिंध प्रांत में थार डेजर्ट में एक महीने तक चलने वाला युद्धाभ्यास कर रही है।
  • 28 जनवरी को शुरू हुआ 'जीदार-उल-हदीद' कूटनाम वाला यह अभ्यास 28 फरवरी को खत्म होगा।
  • चार सप्ताह तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य रेगिस्तानों में अभ्यास की अवधारणा को मान्यता देना है।

By: Anil Kumar

Updated: 14 Feb 2021, 10:19 PM IST

इस्लामाबाद। लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) पर पाकिस्तान लगातार नापाक हरकत करते हुए भारत में आतंकियों के घुसपैठ कराने की कोशिश करता रहता है। दूसरी तरफ पूर्वी लद्दाख सीमा पर बीते कई महीनों से भारत-पाकिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद अब हल होता हुआ नजर आ रहा है, पर इस बीच पाकिस्तानी सेना ने राजस्थान सीमा के करीब बम-गोले बरसाना शुरू कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सेना संघर्ष की तैयारी के लिए सिंध प्रांत में थार डेजर्ट में एक महीने तक चलने वाला युद्धाभ्यास कर रही है। पाकिस्तानी सेना ने एक बयान जारी करते हुए ये जानकारी दी है। सेना की ओर से बीती रात जारी किए गए बयान में कहा गया है कि 28 जनवरी को शुरू हुआ 'जीदार-उल-हदीद' कूटनाम वाला यह अभ्यास 28 फरवरी को खत्म होगा। 'चार सप्ताह तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य रेगिस्तानों में अभ्यास की अवधारणा को मान्यता देना है।'

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इस युद्धाभ्यास में कराची कोर के सैनिक भाग ले रहे हैं। सिंध के हैदराबाद से 165 किलोमीटर दूर सेना का मरूस्थलीय युद्ध विद्यालय है। इस विद्यालय की स्थापना 1987 में युद्ध के प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए किया गया था। बता दें कि थार डेजर्ट 200,000 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच सक्रिय सीमा बनाता है।

चीन के साथ मिलकर पाकिस्तान ने किया था युद्धाभ्यास

आपको बता दें कि अभी हाल ही में पाकिस्तानी सेना ने चीन के साथ मिलकर सैन्य युद्धाभ्यास किया था। इसके ले चीन ने गुजरात सीमा के पास बने पाकिस्तानी एयरबेस के लिए फाइटर जेट्स और सैनिकों को भेजा था।

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चीन ने इसका ऐलान करते हुए कहा था कि वायु सेना की कवायद का उद्देश्य दोनों सेनाओं के 'वास्तविक युद्ध प्रशिक्षण' में सुधार करना है। इसके अलावा दोनों देशों के सैन्य रिश्तों के विकास को बढ़ावा देने के लिए किया गया। इससे दोनों पक्षों के वास्तविक-युद्ध प्रशिक्षण स्तर में सुधार करेगा।

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