पाकिस्तान : पंजाब में सिख विवाह को मिली कानूनी मान्यता, पंजीकरण करने वाला इकलौता देश

Mazkoor Alam

Publish: Mar, 14 2018 10:59:12 PM (IST) | Updated: Mar, 14 2018 11:00:42 PM (IST)

एशिया
पाकिस्तान : पंजाब में सिख विवाह को मिली कानूनी मान्यता, पंजीकरण करने वाला इकलौता देश

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की विधानसभा ने बुधवार को 'पंजाब सिख आनंद कराज विवाह अधिनियम 2017' कानून सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

पाकिस्तान : पंजाब में सिख विवाह को मिली कानूनी मान्यता, सिख विवाह का पंजीकरण करने वाला इकलौता देश
लाहौर। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अब सिख विवाह को कानूनी मान्यता मिल गई है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की विधानसभा ने बुधवार को 'पंजाब सिख आनंद कराज विवाह अधिनियम 2017' कानून सर्वसम्मति से पारित कर दिया। जिससे प्रांत में सिख विवाह को कानूनी मान्यता मिल गई है। सिख पुरुष और सिख महिला का बंधन को सिख संप्रदाय में आनंद करज कहा जाता है। सूत्रों के अनुसार यह विधेयक प्रांतीय मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोरा ने 2017 में पेश किया था जिसे पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ ने पिछले सप्ताह मंजूरी दी थी।

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सिख विवाह का पंजीकरण करने वाला इकलौता देश
आपको बता दें कि राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह विधेयक लागू हो जाएगा। इस नए कानून के मुताबिक विवाह समारोह या 'आनंद करज' को सिख धर्मग्रंथ गुरुग्रंथ साहिब में वर्णित धार्मिक रीतियों के अनुसार पूरा किया जाएगा। इसके बाद पंजाब प्रांत द्वारा नियुक्त रजिस्ट्रार द्वारा वैधता पत्र जारी किया जाएगा। हालांकि सदन में विधेयक पेश करते समय प्रांतीय मंत्री सरदार रमेश सिंह अरोरा ने कहा कि कानून पास होने के बाद पाकिस्तान दुनिया का एक मात्र देश हो जाएगा जो सिख विवाह का पंजीकरण कराता है। अब तक सिख विवाह के आंकड़े गुरुद्वारों द्वारा संभाले जाते थे।

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हिंदू विवाह अधिनियम विधेयक को भी मिली है अनुमति
आपको बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान में हिंदू विवाह अधिनियम विधेयक को सर्वसम्मति से अनुमति मिल चुकी है। जिसके बाद से अब पाकिस्तान में हिंदुओं की शादियों को पंजीकृत किया जा रहा है। जबकि पहले हिन्दुओं की शादी को पंजीकृत नहीं की जाती थीं, जिसके चलते पाकिस्तान में रह रहे हिंदू समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस करते थे।

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क्या प्रावधान हैं हिन्दू शादी विधेयक में
बता दें कि शादी के समय हिंदू जोड़े की उम्र अठारह साल या उससे अधिक होनी चाहिए। साथ हीं अगर पति-पत्नी एक साल या उससे अधिक समय से अलग रह रहे हैं और वो एक दूसरे के साथ नहीं रहना चाहते, और शादी को रद्द करना चाहें तो वो ऐसा कर सकते हैं। इस विधेयक के अनुसार हिंदू विधवा को भी अपने पति की मृत्यु के छह महीने के बाद फिर से शादी करने का अधिकार होगा। जबकि अगर कोई हिंदू व्यक्ति अपनी पहली पत्नी के होते हुए दूसरी शादी करता है तो यह एक दंडनीय अपराध माना जाएगा। विधेयक में हिंदू विवाह पंजीकरण के नियमों का उल्लंघन करने पर छह महीने कैद की सज़ा का प्रावधान है।

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पहली बार कोई हिन्दू दलित महिला बनी सीनेटर
आपको यहां यह भी बता दें कि कुछ ही दिन पहले पाकिस्तान में पहली बार किसी हिन्दू दलित महिला को सीनेटर के लिए चुनाव हुआ था। पाकिस्तान की संसद में कृष्णा कुमारी कोहली का चुनाव एक हिन्दू दलित महिला के तौर पर हुआ है। कृष्णा पाकिस्तान के सिंध प्रांत की रहने वाली हैं। उन्होंने महिलाओं के लिए आरक्षित सीट से चुनाव लड़ा था। 39 साल की कृष्णा बिलावल भुट्टो की पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी यानि पीपीपी से चुनाव लड़ी थीं।

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कौन है कृष्णा कोहली
आपको बता दें कि कृष्णा कोहली के पिता का नाम जुगनू कोहली है। उनका जन्म 1979 में हुआ था। बचपन में जब वो तीसरी कक्षा में पढ़ती थीं तब उन्हें तीन साल प्राइवेट जेल में बितानी पड़ी थी। 16 साल की उम्र में उनकी शादी लालचंद के साथ हुई। उस वक्त वो 9वीं क्लास में पढ़ती थीं। शादी के बाद भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी और 2013 में उन्होंने समाजशास्त्र में मास्टर की डिग्री सिंध यूनिवर्सिटी से हासिल की।

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