परवेज मुशर्रफ की हो सकती है राजनीति में वापसी, 6 साल पहले छोड़ दिया था मुल्क

परवेज मुशर्रफ की हो सकती है राजनीति में वापसी, 6 साल पहले छोड़ दिया था मुल्क

Kapil Tiwari | Updated: 06 Oct 2019, 11:11:25 AM (IST) एशिया

परवेज मुशर्रफ पर राजद्रोह का मुकदमा चल रहा है। उन्होंने साल 2013 में पाकिस्तान छोड़ दिया था और दुबई में जाकर बस गए थे।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में इन दिनों राजनीतिक संकट गहराने की संभावनाएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। पाकिस्तान के मौजूदा प्रधानमंत्री इमरान खान अपने देश में कई मोर्चों पर घिर चुके है। ऐसे में इसकी उम्मीदें बहुत ज्यादा हो गई हैं कि पाकिस्तान में राजनीतिक तख्तापलट हो जाए। इस तरह की खबरों के बीच एक बड़ी जानकारी ये आई है कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ राजनीति में वापसी कर सकते हैं।

राजनीति में वापसी की तैयारी कर रहे हैं मुशर्रफ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, परवेज़ मुशर्रफ 6 अक्टूबर को अपनी पार्टी ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग(APML) के स्थापना दिवस पर राजनीति में वापसी का ऐलान कर सकते हैं। बताया जा रहा है कि इसके लिए मुशर्रफ ने एक योजना तैयार भी कर ली है। परवेज मुशर्रफ की पार्टी ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग की तरफ से कहा गया है कि अब उनका स्वास्थ्य पहले से बेहतर है और वह राजनीति में वापसी की तैयारी कर रहे हैं।

जल्द पाकिस्तान लौटने की संभावनाएं हैं तेज

फिलाहल दुबई में रह रहे परवेज मुशर्रफ पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए रविवार को इस्लामाबाद में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। पार्टी की तरफ से ये जानकारी दी गई है कि मुशर्रफ पिछले हफ्ते मेडिकल चेकअप के लिए अमरीका गए थे, जहां से लौट आए हैं। पार्टी ने कहा कि मुशर्रफ, जिन्होंने लगभग एक दशक तक पाकिस्तान पर शासन किया, हालांकि उनकी जल्द कभी भी पाकिस्तान लौटने की संभावना नहीं थी।

2013 में पाकिस्तान छोड़कर चले गए थे मुशर्रफ

76 साल के परवेज मुशर्रफ के खिलाफ पाकिस्तान की कोर्ट में राजद्रोह का मुकदमा चल रहा है। परवेज मुशर्रफ एक बीमारी का इलाज कराने के लिए साल 2016 में पाकिस्तान छोड़कर विदेश चले गए थे। इसके बाद से वो कभी पाकिस्तान नहीं लौटे हैं। नवंबर 2007 में नवाज सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति द्वारा अतिरिक्त संवैधानिक आपातकाल लगाने के खिलाफ 2013 में मुशर्रफ के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया था। इसके कारण कई वरिष्ठ अदालत के न्यायाधीशों और 100 से अधिक न्यायाधीशों को बर्खास्त किया गया था।

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