अस्ताना में चीनी राष्ट्रपति से मिले PM मोदी, सहयोग के लिए दिया धन्यवाद

अस्ताना में पीएम मोदी ने नवाज शरीफ से मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने एक दूसरे का हालचाल पूछा।

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी. जिंनपिंग से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति को एससीओ की सदस्यता में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। वहीं इससे पहले पीएम ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मुलाकात की थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पीएम मोदी और नवाज ने पहले हाथ मिलाकर एक दूसरे का अभिवादन किया और एक दूसरे के परिवार का हालचाल पूछा। सूत्रों ने मुलाकात के दौरान किसी अन्य मसले पर बातचीत होने की बात से इनकार किया है। वहीं दूसरी ओर कजाकिस्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नजरवायेव ने सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के स्वागत के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमें रूसी राष्ट्रपति बी. पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी चिंनफिंग समेत अन्य बड़े नेता शामिल थे। कार्यक्रम के लिए रवाना होने से पहले जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से पीएम मोदी से मुलाकात को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने मुस्करा कर सवाल को टाल दिया। 

एससीओ में भारत को स्थाई सदस्यता
दरअसल आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को गंभीरता से लड़ने और उसमें सहयोग देने की वजह से भारत को शंघाई सहयोग संगठन में स्थायी सदस्यता मिल रही है। पीएम मोदी ने अपनी यात्रा से पहले फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सदस्यता से भारत की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। इसके साथ ही आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन में भी मदद मिलेगी। पाकिस्तान को भी इस सम्मेलन में स्थाई सदस्यता मिलेगी। भारत सरकार ने पहले ही साफ कर दिया था कि सम्मेलन में मोदी और नवाज की मुलाकात के लिए न तो भारत और न ही पाकिस्तान की ओर से कहा गया है। इसी वजह से दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों में किसी मसले को लेकर बातचीत नहीं होगी। प्रधानमंत्री शुक्रवार को सम्मेलन को संबोधित करेंगे।

क्या है शंघाई सहयोग संगठन?
अप्रैल 1996 में शंघाई में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और तजाकिस्तान ने एक-दूसरे के बीच उत्पन्न तनावों को दूर करने के लिए सहयोग पर विचार किया। जिसे शंघाई फाइव का नाम दिया गया। जिसके बाद जून 2001 में एससीओ की शुरूआत हुई। पहले इस संगठन का नाम शंघाई फाइव था लेकिन उज्बेकिस्तान के जुड़ने के बाद इस संगठन का नाग शंघाई सहयोग संगठन कर दिया गया। रूस, चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान एससीओ के स्थानी सदस्य हैं। इस संगठन का उद्देश्य मध्य एशिया में सुरक्षा के लिए सहयोग बढ़ाना है। कई जानकार एससीओ की तुलना नेटो से भी करते हैं।
ghanendra singh
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