राष्ट्रपति अशरफ गनी तालिबान-अमरीका समझौते में बने रोड़ा! तालिबानी युद्धबंदियों को रिहा करने से किया इनकार

  • अमरीका-तालिबान ( America-Taliban ) के बीच 18 साल के लंबे संघर्ष के बाद 29 फरवरी को समझौता हुआ
  • समझौते में यह तय हुआ है कि 14 महीने के अंदर अमरीकी सैनिकों ( American Troops ) की वापसी होगी

By: Anil Kumar

Published: 01 Mar 2020, 06:24 PM IST

काबुल। अफगानिस्तान ( Afghanistan ) में शांति बहाली को लेकर 18 साल बाद तालिबान और अमरीका ( Taliban-America Agreement ) के बीच शनिवार को एक समझौता हुआ। लेकिन समझौते के महज 24 घंटे के बाद ही इसके लागू होने को लेकर संशय उत्पन्न हो गया है और इसमें सबसे बड़ी बाधा अफगानिस्तान ही बन गया है।

दरअसल, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ( Afghan President Ashraf Ghani ) ने रविवार को साफ शब्दों में कहा कि इस समझौते में शामिल तालिबान बंदियों ( Taliban Detainees ) की रिहाई के प्रावधान को लागू करने पर वह कोई प्रतिबद्धता नहीं जता सकते। इसके बाद से ये सवाल उठने लगे हैं कि क्या अमरीका-तालिबान का समझौता सफल हो पाएहा।

Afghan-US joint declaration: 14 महीने में अफगानिस्तान से अमरीकी सैनिकों की होगी वापसी

बता दें कि अमरीका और तालिबान ( America-Taliban ) के बीच शनिवार को कतर के दोहा में समझौते पर हस्ताक्षर हुए। इसमें तय हुआ है कि अगले 14 महीनों में विदेशी सेनाएं अफगानिस्तान छोड़ देंगी। इसमें यह शर्त रखी गई कि तालिबान अफगान भूमि का इस्तेमाल किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं होने देंगा और अफगानिस्तान में व्यापक व स्थायी शांति के लिए अफगान सरकार के साथ वार्ता में शामिल होगा।

तालिबानी बंदियों की रिहाई के लिए सरकार प्रतिबद्ध नहीं: गनी

राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हिंसा में कमी के समझौते के बिंदु पर अमल जारी रखा जाएगा जिसका लक्ष्य पूर्ण युद्धविराम है। जनरल (स्कॉट) मिलर (अफगानिस्तान में विदेशी सेना के प्रभारी अमरीकी कमांडर) ने कहा है कि तालिबान ऐसा करेगा। इसकी उम्मीद है।

इस बीच समझौते की राह की बाधाओं की ओर संकेत करते हुए गनी ने समझौते के इस प्रावधान पर अपनी प्रतिबद्धता नहीं जताई कि तालिबान अपने कब्जे से एक हजार बंदी छोड़ेंगे और अफगान सरकार पांच हजार तालिबान कैदियों को रिहा करेगी।

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गनी ने कहा कि पांच हजार बंदियों को रिहा करने के बारे में (हमारी) कोई प्रतिबद्धता नहीं है। यह अफगानिस्तान के लोगों का अधिकार और उनकी खुद की इच्छा पर निर्भर है। यह मुद्दा अफगानिस्तानियों के बीच होने वाली बातचीत के एजेंडे का हिस्सा हो सकता है लेकिन इस बातचीत की पूर्व शर्त नहीं।

उन्होंने कहा कि किसी भी बंदी की रिहाई का अधिकार अफगान सरकार के पास है, ना कि अमरीका के पास। गनी राष्ट्रपति पद के चुनाव में फिर से निर्वाचित हुए हैं लेकिन इस चुनाव पर कई तरह के प्रश्न उठे हैं। नतीजा यह हुआ है कि गनी नए कार्यकाल के लिए अभी शपथ नहीं ले सके हैं। अमेरिका ने भी अभी तक गनी के पुनर्निर्वाचन को मान्यता नहीं दी है।

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